Ex CM रमन सिंह से वीरेंद्र पाण्डेय की मौलश्री में मुलाकात, बीजेपी की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत, पाण्डेय की पार्टी में वापसी का अटकलें शुरू

याज्ञवल्क्य मिश्रा

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रायपुर,4 फ़रवरी 2019। पूर्व मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह का खुला विरोध कर पार्टी छोड़ने वाले पूर्व बीजेपी नेता वीरेंद्र पाण्डेय की मुलाकात से भाजपा की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें शुरू हो गई है। पाण्डेय की हाल ही में रमन सिंह के मौलश्री स्थित निवास पर भेंट हुई। हालांकि, इस मुलाकात की खबर सार्वजनिक तब हुई, जब पूर्व मंत्री राजेश मूणत की बेटी की शादी में ललीत महल में लोगों ने रमन और पाण्डेय को एक-दूसरे से ठहाका लगाते हुए हाथ-पकड़कर घूमते देखा। दोनों को जिसने भी देखा, वो दंग रह गया। क्योंकि, एक समय में विपक्ष से अधिक पाण्डेय रमन सिंह के विरोध में खड़े हो गए थे।
वीरेंद्र पाण्डेय वही शख्सियत हैं, जिन्होंने 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद अजित जोगी को दुबारा सीएम बनने से रोक दिया था। पाण्डेय में वह साहस था कि डॉ रमन सिंह के सीएम रहते हुए डॉ रमन सिंह के निर्वाचन क्षेत्र में कहा
“डॉ रमन सिंह के राज को देखते हुए मुझे अजित जोगी देवता लगते हैं”
जनता पार्टी के दौर में विधायक रह चुके पाण्डेय को अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर से भाजपा और उसके पहले दिया छाप वाली पार्टी जनसंघ का बस्तर इलाक़े में आधार कार्यकर्ताओं में एक माना जाता है।
2008 में पाण्डेय ने तब भाजपा छोड़ दी जबकि मूल्यों को लेकर टकराव अपने चरम पर हुआ, उन्होंने विधानसभा का फ़ॉर्म भर दिया। बताते हैं कि तब उन्हें मनाने की कोशिश हुई, यह पहल खुद डॉ रमन सिंह ने की.. पर सियासत के इस अगिया वेताल ने दो प्रश्नों के जवाब माँगे और कहा
“मुझे इस पर संतुष्ट कर दीजिए.. मैं आपकी बात मान जाउंगा”
और दो प्रश्न उन्होंने किए
“लाभचंद बाफना को टिकट क्यों दिए, जबकि उस पर भ्रष्टाचार के आरोप थे.. सरोज पांडेय महापौर हैं उन्हें टिकट क्यों दिया.. और जब ये दो को दिए तो मुझसे आग्रह क्यों”
सियासत में चर्चित यह क़िस्सा आगे बताता है कि डॉ रमन सिंह का जवाब आया-
“ बाफना .में…तो गलती हो गई” पांडेय ने कहा
“तो गलती सुधारिये”
सरल सहज डॉक्टर रमन ने हाथ थामा और कहा
“ यह मेरे बस में नहीं है..”
विरेंद्र पांडेय ने कहा
“तो आपको लगता है .. मैं आपके बस में हूँ”
विरेंद्र पांडेय चुनाव लड़े और हार गए, लेकिन अगर हार विरेंद्र पांडेय को शून्य कर पाती तो फिर बात ही क्या थी। विरेंद्र पांडेय अकेले ही पूरे सूबे में तूफ़ान मचाते रहे, वे फ़ेसबुक पर लिखते और उनका लिखा विपक्ष के मीडिया पैनलिस्टों के लिए मामला बन जाता।
इस अगिया बेताल ने पूरे प्रदेश की अलग अलग अदालतों में सौ से अधिक मामले दायर किए जिसमें सरकार की विभिन्न एजेंसियों पर भ्रष्टाचार के अभिलेखीय प्रमाण थे। विरेंद्र पांडेय ना कांग्रेस को बख्शते ना सत्तानशी भाजपा को। बहुचर्चित सीडी कांड में विरेंद्र पांडेय ने फ़ेसबुक पर लिखा
“या तो काम करते हो या नहीं करते हो.. अब नहीं करते हो तो नहीं करते हो.. सीधे बोलो मेरा नहीं है.. यह बोलने का क्या मतलब कि, मैंने देखा है मैं नहीं हूँ”
विरेंद्र पांडेय का यह तंज बेहद चर्चित हुआ दरअसल कथित सीडी आई जिसमें कथित रुप से तब मंत्री राजेश मूणत के इसमें होने की बात आई और मूणत ने पत्रकारों से कहा
“मैंने यह सीडी देखी है खुद .. मैं नहीं हूँ.. यह फ़र्ज़ी है फ़र्ज़ी है फ़र्ज़ी है”
और इसी व्यक्तव्य पर विरेंद्र पांडेय ने फ़ेसबुक पर वह पोस्ट लिखी थी। आपको बता दें कि सीडी को लेकर बाद में यह पाया गया कि वह फ़र्ज़ी थी और ब्ठप् ने इस मामले में अपराध दर्ज किया और यह मामला अब भी चल रहा है।
11 साल के अंतराल के बाद डॉ रमन सिंह के घर आख़रिकार विरेंद्र पांडेय गए, विरेंद्र पांडेय के साथ डॉ कमलेश गए थे। सहज रुप से औपचारिक यह मुलाक़ात चाय पर हुई और डॉ रमन की इस बात के साथ समाप्ति हुई
“मैं परिवार के साथ विरेंद्र पांडेय जी को भोजन पर बुलाउंगा”
लोगों को यह मुलाक़ात पता नहीं चलती अगर राजेश मूणत के वैवाहिक समारोह में उपस्थित जनसमुह डॉ रमन सिंह और विरेंद्र पांडेय को एकसाथ हाथ मिलाते और मुस्कुराते नहीं देख लेता।
विरेंद्र पांडेय और डॉ रमन सिंह के बीच यह मुलाक़ात और अगर आगे होगी जिसकी संभावना है.. तो और क्या क्या होगा….
विरेंद्र पांडेय ने इसके आगे कुछ भी कहने से इंकार कर दिया और मुस्कुराते हुए कहा
“सब तो बोल दिया जी.. “

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