आज ढलते सूरज को पहला अर्घ्य देंगी व्रती, संतान के सुख की करेंगे कामना…. जानें- डूबते सूर्य की उपासना का क्या है पौराणिक महत्व

रायपुर 2 नवंबर 2019. छठ पर्व पर पहला अर्घ्य षष्ठी तिथि को दिया जाता है. यह अर्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाता है. इस समय जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है. इस व्रत पूजा पर स्वच्छता का विशेष महत्व होता है। छठ व्रती दिनभर पूजा घाटों पर वेदी बनाने, साफ-सफाई तथा पूजन सामग्री की खरीदारी करने में जुटे रहे। नए-नए वस्त्र , बांस की टोकनी, सूप अनेक प्रकार के फल-फूल, गन्ना आदि की खरीदारी के दौरान बाजारों में काफी रौनक रही। यह पूजा पर्व दिवाली के बाद सबसे बड़ा माना जाता है।

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छठ पूजा के व्रती निर्जला उपवास कर शहर के हीरापुर, रामकुंड, गुढियारी मच्छी तालाब, भनपुरी, बिरगांव में व्यास तालाब सहित राजधानी के धार्मिक स्थल में आस्था का मेला लगेगा। शाम के पहर में छठ मइया के जयकारे लगाते हुए व्रतियों का समूह सिर पर पूजन सामग्री लिए नंगे पैर पूजा घाटों पर पहुंचेंगे। जलाशय घाटों में कमर तक पानी में सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर गन्ने के मंडप के नीचे छठ मइया की पूजा-अर्चना करेंगे। सूर्य उपासना का सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा पर शनिवार को शाम के पहर शहर के तालाबों और नदी के घाट आस्था से छलकेंगे। छठ मइया के व्रती शहर के अनेक स्थानों के जलाशय घाट पर पहुंच कर ढलते हुए सूर्यदेव को पहला अर्घ्य देकर संतान सुख की कामना करेंगे। आइए जानते हैं कि डूबते सूर्य की उपासना का क्या पौराणिक महत्व है और इससे आप को कौन से वरदान प्राप्त हो सकते हैं।

छठ पूजा के व्रती निर्जला उपवास कर शहर के हीरापुर, रामकुंड, गुढियारी मच्छी तालाब, भनपुरी, बिरगांव में व्यास तालाब सहित राजधानी के धार्मिक स्थल में आस्था का मेला लगेगा।

शाम के पहर में छठ मइया के जयकारे लगाते हुए व्रतियों का समूह सिर पर पूजन सामग्री लिए नंगे पैर पूजा घाटों पर पहुंचेंगे। जलाशय घाटों में कमर तक पानी में सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर गन्ने के मंडप के नीचे छठ मइया की पूजा-अर्चना करेंगे।

सूर्य षष्ठी पर मिलेगा खोया हुआ मान सम्मान

– सूर्य षष्ठी के दिन सुबह के समय जल्दी उठे और  स्नान करके हल्के लाल वस्त्र पहनें

– एक तांबे की प्लेट में गुड़ और गेहूं रखकर अपने घर के मंदिर में रखें

– अब एक लाल आसन पर बैठकर तांबे के दीये में घी का दीपक जलायें

– भगवान सूर्य नारायण के सूर्याष्टक का 3 या 5 बार पाठ करें

– अपने खोए हुए मान-सम्मान की प्राप्ति की प्रार्थना भगवान सूर्यनारायण से करें

– तांबे की प्लेट और गुड़ का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को सुबह के समय ही कर दें

छठ माता देंगी उत्तम संतान का महावरदान

– सूर्य षष्टि के दिन सुबह के समय एक कटोरी में गंगाजल लें और घर के मंदिर में रखें

– अब लाल चन्दन की माला से ॐ हिरण्यगर्भाय नमः मन्त्र का 108 बार जाप करें

– अपने घर के पास किसी शिवालय में जाकर यह गंगाजल एक धारा के साथ शिवलिंग पर अर्पण करें

भगवान शिव और सूर्यनारायण की कृपा से उत्तम संतान का महावरदान मिलेगा

सूर्य षष्टि पर उत्तम नौकरी का वरदान

– सूर्य षष्ठी के दिन सुबह के समय एक चौकोर भोजपत्र लें

– तांबे की कटोरी में लाल चंदन और गंगाजल मिलाकर स्याही तैयार करें

– अब भोजपत्र पर ॐ घृणि आदित्याय नमः तीन बार लिखें

– गायत्री मंत्र का लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से तीन माला जाप करें

– जाप के बाद यह भोजपत्र अपने माथे से स्पष्ट करा कर अपने पर्स या पॉकेट में रखें

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