छत्तीसगढ़ के इस कारसेवक ने राम मंदिर के लिए खायी थी गोलियां…. आज भीख मांगकर गुजार रहा है जिंदगी…..सुनी फैसले की खबर तो रोने लगे… पूछने लगे…

कोरबा 10 नवंबर 2019। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर का रास्ता साफ हो गया है। फैसले के साथ ही 500 साल पुराना विवाद खत्म हो गया। फैसले के बाद देशभर से साल 1990 और 1992 में अयोध्या पहुंचे कारसेवकों को भी लोग याद कर रहे हैं। उस दौरान कई कारसेवक पुलिस की गोली का शिकार हुए थे। इस दौरान छत्तीसगढ़ के भी एक कारसेवक पुलिस की गोली से जख्मी हुए थे। उस कारसेवक का नाम था गेसराम चौहान। गेसराम को उस वक्त पेट में गोली लगी थी, जिसका इलाज पहले फैजाबाद और बाद में बिलासपुर में हुआ था। शनिवार को कोर्ट के फैसले की जानकारी जब मीडिया ने गेसराम को दी तो वो भावुक होकर रोने लगे।

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पत्रकारों से ही पूछा- अब तो मंदिर बन जायेगा ना !. जिस वक्त राममंदिर बनने की बातें उन्हें लोगों ने बतायी, वो भीख मांगने ही निकले थे, सुनते ही वो अवाक रह गये, हाथ से लाठी और झोला नीचे गिरा और उनकी आँखें डबडबा गयी… बोले-..ये सुनने के लिए कब से इंतजार कर रहे थे, आपलोग का बहुत-बहुत धन्यवाद, हमको तो मालूम नहीं था कुछ। दुर्भाग्य की बात ये है कि कारसेवक गेसराम आज भीख मांगकर अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। 65 साल के गेसराम खबर सुनने के बाद रास्ते में ही रोने लगे। राम भक्ति को लेकर गेसराम का जुनून इस कदर था कि 1990 में फैजाबाद में पेट में गोली खाने और महीनों तक अस्पताल में गुजारने के बाद फिर 1992 में भी वो कारसेवक के तौर पर अयोध्या गये और वहां पुलिस की लाठियां खायी। हालांकि गेसराम की हालत इन दिनों काफी बुरी है। उनके भाईयों ने जमीन हड़प ली है, तब से वो भीख मांगकर अपनी जिंदगी चला रहे हैं।

कोरबा में आधा दर्जन लोगों के साथ गेसराम अयोध्या गये थे और 2 नवंबर को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें गेसराम गंभीर रूप से जख्मी हो गये। लेकिन जैसे ही जख्म भरा वो फिर से 1992 में कारसेवा के लिए अयोध्या निकल गये।

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