दीप पर्व पर कलेक्टर की अच्छी पहल “मिट्टी के दीये बाज़ार में बेचने आएँ ग्रामीण तो उन्हे कोई टैक्स नहीं देना होगा.. प्रशासन ध्यान भी देगा और सहयोग भी देगा”

मुंगेली,17 अक्टूबर 2019। दीपोत्सव याने दीपावली की रंगत मिट्टी के दीये से होती है, लेकिन बाज़ार जिन झालरों और चाईनीज आईटम से सज गया है, उसने दीये की उपयोगिता और उसके अस्तित्व को ही एक प्रकार से लीलना शुरु कर दिया है।

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प्रतिस्पर्धा और सुविधा के इस दौर में लोग दीपक नहीं बल्कि चाईनीज झालर या दिगर वैकल्पिक साधनों पर ध्यान दे रहे हैं जिससे मिट्टी के दीये और उसे बनाने वाले दोनों विलुप्त हो रहे हैं।
लेकिन छत्तीसगढ़ के एक इलाक़े मुँगेली में कलेक्टर ने अनूठी पहल की है। 2011 बैच के आईएएस डॉ सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने मुंगेली में मिट्टी के दीये को बेचने पर उस पर किसी भी कर की वसुली करने से रोक लगा दी है। कलेक्टर ने आदेश जारी कर लिखा है
“मिट्टी के दीये विक्रय किये जाने हेतु आने वास्तव ग्रामीणों को किसी प्रकार की असुविधा ना हो,इसका पूर्ण रुप से ध्यान रखा जावे,नगरपालिका/नगरपंचायत क्षेत्रों में इनसे किसी प्रकार की कर की वसूली ना की जावे,साथ ही मिट्टी के दीये के उपयोग को प्रोत्साहित भी किया जाये”

I.A.S. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने NPG से कहा
“मिट्टी के दीये हमारे त्यौहार की पहचान तो हैं ही साथ ही एक बड़ा रोज़गार इस माटीकला से जुड़ा है, यह हमारी कोशिश है कि, वे प्रोत्साहित हों..और लोग भी मिट्टी के दीये ख़रीदें”

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