…जिसने आइंस्टाइन को हराया था…वो सिस्टम से हार गया :…. मौत के 2 घंटे बाद तक अस्पताल के बाहर पड़ा रहा शव, कोई पूछने तक नहीं आया….एंबुलेंस वाले ने मांगे 5 हजार रुपये……. ये वीडियो देख आंखे भर जायेगी आपकी

पटना 14 नवंबर 2019। प्रसिद्ध गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में निधन हो गया। लेकिन दुनियाभर से चर्चित गणितज्ञों में शुमार किए जाने वाले वशिष्ठ नारायण निधन के बाद भी सरकारी उपेक्षा के शिकार बने और काफी देर तक उनका शव एंबुलेंस का इंतजार करता रहा. अस्पताल प्रबंधन द्वारा उनके परिजनों को पार्थिव शरीर ले जाने के लिए एंबुलेंस (Ambulance) तक नहीं मुहैया कराया गया. इस महान विभूति के निधन के बाद उनके छोटे भाई ब्लड बैंक के बाहर शव के साथ खड़े रहे. वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर अस्पताल परिसर में करीब डेढ़ घंटे तक स्ट्रेचर पर रखा रहा। अस्पताल प्रशासन की तरफ से एंबुलेंस नहीं मुहैया कराई गई। उनके भाई को वशिष्ठ सिंह के पार्थिव शरीर के साथ काफी देर तक अस्पताल के बाहर खड़ा रहना पड़ा।

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परिजनों का आरोप है कि वशिष्ठ नारायण सिंह की मृत्यु के 2 घंटे तक उनकी लाश अस्पताल के बाहर पड़ी रही. 2 घंटे के इंतजार के बाद एबुंलेंस उपलब्ध कराया गया.उनके भाई ने बताया कि एंबुलेंस वाले ने पार्थिव शरीर भोजपुर ले जाने के लिए पांच हजार रुपए मांगे। बाद में कलेक्टर कुमार रवि और कुछ नेता पहुंचे, जिसके बाद पार्थिव देह को एंबुलेंस से उनके पैतृक आवास भोजपुर ले जाने की व्यवस्था हुई। परिजनों के साथ पटना के कुल्हरिया कांप्लेक्स के पास रहने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह की तबीयत आज सुबह अचानक खराब हो गई. बताया जा रहा है कि आज तड़के उनके मुंह से खून निकलने लगा। डॉक्टरों ने बताया कि जिस वक्त उन्हें अस्पताल लाया गया, उस समय तक उनका ब्रेन डेड हो चुका था।

निधन के बाद पीएमसीएच प्रशासन द्वारा केवल डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाणपत्र) देकर पल्ला झाड़ लिया गया. इस दौरान जब वशिष्ठ नारायण सिंह के छोटे भाई से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि हम अपने पैसे से अपने भाई का शव गांव ले जाएंगे. उन्होंने कहा, ‘मेरे भाई के निधन की खबर के बाद से न तो कोई अधिकारी आया है और न ही कोई राजनेता.’ वशिष्ठ नारायण सिंह के छोटे भाई ने कैमरे के सामने रोते हुए कहा, ‘अंधे के सामने रोना, अपने दिल का खोना. मेरे भाई के साथ लगातार अनदेखी हुई है. जब एक मंत्री के कुत्ते का पीएमसीएच में इलाज हो सकता है, तो फिर मेरे भाई का क्यों नहीं.’

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