नए सीएस मंडल का रायपुर को मेट्रो लुक देने में बड़ा योगदान, मरीन ड्राईव और केनाल रोड जैसे कई चमचमाती सड़कें बनाकर राजधानी का नक्शा बदला

रायपुर, 31 अक्टूबर 2019। छत्तीसगढ़ के नए चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल ने आज पदभार संभाल लिया। मंडल काम के प्रति जुनूनी अफसर माने जाते हैं। वे जिले में कलेक्टर रहे या फिर मंत्रालय में सिकरेट्री, हर जगह कुछ नया करके उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

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याद होगा, छत्तीसगढ़ बनने के बाद रायपुर भले ही राजधानी बन गया था। लेकिन, चमक-धमक में जिला लेवल के शहर से नहीं उबर पा रहा था। 2004 में रायपुर का कलेक्टर बनने के बाद मंडल ने पहला बड़ा काम किया स्टेशन रोड का चौड़ीकरण। जो लोग 2006 के बाद रायपुर आए होंगे, उन्हें नहीं पता था कि राजधानी बनने के बाद स्टेशन रोड कितना सकरा था। मंडल ने रोड को सिक्स लेन किया ही कचहरी चौक पर अव्यवस्थित ट्रैफिक पर लगाम लगाने जेल के बगल से बाईपास सड़क निकाल दिया। मंडल के कलेक्टर बनने से पहले रायपुर का कलेक्टर ताबेला था। इतनी झाड़ियां थी कि घड़ी चौक तरफ से कलेक्ट्रेट नजर नहीं आता था। झाड़ियों में जुआ और शराबियों का जमघट लगा रहता था। मंडल ने झाड़ियों की सफाई करवाकर न केवल बड़ा गार्डन बनवाया बल्कि कलेक्ट्रेट बिल्डिंग का नक्शा भी बदल दिया।

रायपुर आने वाले लोग अगर यहां के डेवलपमेंट को देखकर चमत्कृत होते हैं, तो उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ आरपी मंडल की भूमिका है। तेलीबांधा तालाब पहले क्या था? गंदगी और बजबजाता हुआ तालाब। लोगों को बगल से गुजरने पर नाक पर रुमाल रखना पड़ता था। वहां अब मरीन ड्राईव बन गया है। वह अब राजधानी का सबसे बड़ा चौपाटी बन गया है। केनाल रोड की तो किसी ने कल्पना ही नहीं की थी। नगरीय प्रशासन सचिव बनने के बाद मंडल ने मरीन ड्राईव के बाद दूसरा काम किया केनाल रोड का। आज इसकी उपयोगिता को देखकर लोगों को लगता है, ये पहले क्यों नहीं बन गया।

डीडी नगर इलाका अब तो काफी डेवलप हो गया है। लेकिन, उधर जाने के लिए ठीक-ठाक सड़क नहीं थी। मंडल ने इंजीनियरिंग कालेज के सामने से गोल चौक से होते रिंग रोड तक फोर लेन रोड निकाल दिया। मंडल का सपना था रायपुर में बड़ौदा से भी खूबसुरत और सुविधायुक्त हाईटेक बस स्टैंड बनें। इसके लिए जमीन की कमी पड़ रही थी। मंडल ने अपना काम समझकर इसके लिए प्रयास किया। इंटरस्टेट बस स्टैंड के पास सरकारी जमीन कम थी। बगल में शिवरीनारायण मठ की जमीन थी। उस समय सरकार भाजपा की थी और मठ के प्रमुख महंत रामसुंदर दास कांग्रेस के विधायक थे। मंडल ने अपना काम समझकर महंत के यहां सुबह-शाम हाजिरी लगाना शुरू किया। और आखिरकार 22 एकड़ जमीन दान करने पर महंत रामसुंदर दास को राजी कर लिया। तब जाकर बस स्टैंड आकार ले पाया।

विधानसभा रोड का फोरलेन मंडल के पीडब्लूडी सिकरेट्री रहने के दौरान ही हुआ। रायपुर एयरपोर्ट की सड़क सिंगल लेन थी। आए दिन वहां दुर्घटनाएं होती रहती थी। मंडल ने धरमपुर होकर एयरपोर्ट के लिए बाईपास सड़क निकाली। इसके बाद वीआईपी चौक से एयरपोर्ट तक सिक्स लेन रोड की प्लानिंग भी उन्होंने ही की थी। इस सड़क का 50 परसेंट काम हो गया था कि मंडल का नगरीय प्रशासन से ट्रांसफर हो गया। मंडल ने न केवल सड़कों का चौड़ीकरण कर आवागमन को सुगम बनाया बल्कि उन सड़कों का सौंदर्यीकरण भी कराया।

मंडल को ट्राईबल सिकरेट्री बनाया गया तो वहां उन्होंने आदिवासी बच्चों के लिए प्रयास संस्था खोलकर सौ से अधिक आदिवासी बच्चों को उन्होंने जेईई और आईआईटी में सलेक्ट करा दिया। सरकार ने लेबर में भेजा तो उन्होंने श्रमिकों और गरीबों के लिए पांच रुपए में सस्ता खाना योजना शुरू कर दी। यही नहीं, वे खुद इन योजनाओं को मानिटरिंग करते थे।

यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं कि पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल ने रायपुर में हवाई अड्डा और दूरदर्शन केंद्र खोलवाकर रायपुर को राष्ट्रीय क्षितिज पर लाया। लेकिन, रायपुर को डेवलप करने का काम आरपी मंडल ने किया।

मंडल बिलासपुर में कलेक्टर थे तो वहां भी शहर को बदल दिया था। पहली बार लोगों ने वहां डेवलपमेंट देखा। बिलासपुर की अरपा नदी पर पानी रोकने के लिए उन्होंने बड़ा काम किया। तब सरकार के पास पैसे नहीं थे कि एनईकट बनाया जा सकें। मंडल ने वहां एक अद्भूत आंदोलन की शुरूआत की। जनसहयोग से उन्होंने रेत की बोरियों से पानी को रोक दिया। इस काम को देखकर तत्कालीन वित्त मंत्री रामचंद्र सिंहदेव को एनईकट के लिए राशि स्वीकृत करनी पड़ी थी।

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