4 दिनों से ग्रामीणों के लिए आतंक बना तेंदुए की हुई मौत..ट्रेंकुलाइजर गन से बेहोशी के बाद उसे नंदनवन इलाज करने ले जाया जा रहा था, पोस्टमार्टम में शरीर पर चोट के निशान.. 

फारुख मेमन..newpowergame.com

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गरियाबंद 2 नवंबर 2019. बीते 4 दिन से खरहरी गांव में आतंक मचाने वाला और लोगों पर हमले का प्रयास करने वाला तेंदुआ अंततः पकड़ में आ गया और उसकी स्थिति गंभीर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे नंदनवन भेजा जा रहा था.  इस दौरान रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. बीते 3 दिन से भूखा प्यासा था और गंभीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो चुका था. आज नंदनवन से पहुंचे विशेषज्ञ डॉक्टर ने तेंदुए को ट्रेंकुलाइज कर बेहोश किया फिर पिंजरे में डालकर उसकी स्थिति का आकलन किया तब उसकी गंभीर समस्याओं का पता चला. इन स्थितियों में तत्काल उसे नंदनवन नंदनवन इलाज के लिए ले जाया जा रहा था.

नंदनवन पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गयी जहां उसकी पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है. पोस्टमार्टम में यह भी बात सामने आई है कि तेंदुए के पीठ एवं पीछे के दाएं पैर पर चोट के निशान हैं. जिससे उसका फैक्टर फैक्चर हो गया था. जिसके चलते वह लगातार गांव में आ रहा था. लगातार मवेशियों और इंसानों पर आक्रमण करने का प्रयास कर रहा था. जिससे लोगों में दहशत वह आक्रोश व्याप्त था. यह बताना भी आवश्यक है कि तेंदुआ वन्य प्राणी में शेड्यूल वन का प्राणी आता है. जिसके जिसके चलते उसका एक अपना अलग महत्व है. पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार तेंदुए को वहां जलाया जाएगा.

कल दोपहर से पिंजरा लगाने के बाद जब देर शाम तक तेंदुआ पिंजरे में नहीं आया तब वन विभाग ने रायपुर के विशेषज्ञों से इस मामले में सलाह ली. जिस पर उच्च अधिकारियों ने नंदनवन से वन्य जीव विशेषज्ञ चिकित्सक रवि वर्मा को ट्रेंकुलाइजर गन के साथ गरियाबंद भेजा जिसके बाद आज सुबह हिंसक तेंदुए को पकड़ने रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया गया तेंदुआ जिन झाड़ियों में छिपा था. वहां ट्रेंकुलाइज करना संभव नहीं दिख रहा था कुछ देर बाद तेंदुआ निकलकर घरों के आसपास मंडराने लगा तब एक घर की छत पर चढ़कर बेहोशी का इंजेक्शन वाले ट्रेंकुलाइज गन से तेंदुए को निशाना बनाकर बेहोश किया गया. इंजेक्शन लगने के 3 मिनट के भीतर ही तेनुआ बेहोश हो गया. इसके बाद तेंदुए को तत्काल पिंजड़े में डाला गया और गांव से गरियाबंद लाया गया यहां चिकित्सक ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बताया कि बीते तीन-चार दिनों से भूखा प्यासा नजर आ रहा है.

गंभीर रूप से डिहाइड्रेशन का शिकार हो चुका है इसके अलावा इसके किस अंग में तकलीफ है. यह पता लगाने का प्रयास रायपुर में किया जाएगा तेंदुआ की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल उच्च चिकित्सा के लिए नंदनवन रायपुर ले जाया गया है. किंतु दुर्भाग्य की बात यह रही कि तेंदुआ को ड्राइव नंदनवन ले जाते समय रास्ते में कहीं उसकी मौत हो गई. आज नंदनवन पहुंचने के बाद राजपत्रित अधिकारी के सामने उसका पोस्टमार्टम किया गया. पोस्टमार्टम में पाया गया कि उसकी पीठ और पैर दाएं पैर पर गंभीर चोट के निशान हैं और हड्डी टूटी हुई है. इन स्थितियों के बीच तेन्दुआ अधिक चल फिर नहीं पा रहा था जिसके चलते वह लगातार गांव पहुंच रहा था गांव में पहुंचकर वह मवेशियों पर लगातार आक्रमण कर रहा था वहीं दूसरी ओर लोगों को भी आक्रमण करने दौड़ा रहा था.

जिसके चलते गांव में दहशत व भय का माहौल था इन सबके बीच कुछ सवाल अभी भी पड़े हुए हैं कि तेंदुए की मौत कैसे हुई और यह चोट तेंदुए के शरीर पर कहां से आए कहीं पेड़ों से छलांग लगाते हुए तो यह चोट नहीं आई इस पर भी विभाग विचार कर रहा है. इन्हीं सब बातों के बीच अब यह मौत रहस्य काफी गहरा गया है. वहीं दूसरी ओर तेंदुआ वन्य प्राणियों में शहडोल का प्राणी होता है जिसका एक अपना अलग ही महत्व होता है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी वैसे वन विभाग एवं डॉक्टरों ने इसे बचाने का काफी प्रयास किया किंतु इसमें सफलता नहीं मिल पाई. गरियाबंद में भी जब लाया गया था तो उसे इलेक्ट्रोल एवं अंडे का घोल इंजेक्शन के द्वारा मुंह में डाला गया था किंतु फिर भी उसे बचाया नहीं जा सका..

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