कलेक्टर ने निकाला पराली की समस्या का एक और हल, जिनके पास ज्यादा पराली वे मुनादी करा दूसरों को दे दें या गोठान में कर दें दान

गरियाबंद, 6 नवंबर 2019। सीएम भूपेश बघेल ने पराली की समस्या का जो हल बताया था, वह पूरे देशभर में काफी चर्चित रहा। सीएम ने पराली को जलाने के बजाय खाद बनाने का तरीका बताया है। यह दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश आदि के लिए ज्यादा कारगर है, जहां हालात बेकाबू हो चुके हैं। अब गरियाबंद कलेक्टर श्याम धावड़े ने छत्तीसगढ़ के लिए एक तरीका बताया है। इसके मुताबिक जिन किसानों के पास उपयोग से ज्यादा मात्रा में पराली हैं, वे किसी ग्रामीण को ही दे दें या गोठान के लिए दे दें।

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गरियाबंद में 48 गोठान हैं, जहां चारे के साथ जैविक खाद बनाने के लिए उपयोग हो जाएगा। कलेक्टर ने बुधवार को टीएल की बैठक में रबी फसल लेने वाले किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए भी निर्देश दिए हैं। दरअसल, गरियाबंद, मैनपुर, फिंगेश्वर और छुरा मिलाकर 15 हजार से ज्यादा हेक्टेयर में रबी की फसल ली जाती है। धान की कटाई के बाद किसान रबी की फसल लेने में जुट जाते हैं। सबसे ज्यादा हड़बड़ी दिसंबर तक खेत को रबी फसल तैयार करने की रहती है। इसलिए किसान आग लगा देते हैं। इससे प्रदूषण होता है।

जिन किसानों के घर में मवेशी नहीं हैं, वे भी पराली को जला देते हैं। पिछले साल पराली जलाने वाले 56 लोगों पर कार्रवाई कर 5 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया था। बता दें कि 2 हेक्टेयर जलाने पर ढाई हजार का जुर्माना, 5 हेक्टेयर तक जलाया तो 5 हजार व 5 हेक्टेयर से ज्यादा जलने पर 15 हजार तक जुर्माने का प्रावधान है।

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