टीम मंडल

10 नवंबर, 2019
वैसे तो कहने के लिए सूबे में 80 हजार के स्केल वाले तीन पद हैं, चीफ सिकरेट्री, डीजीपी और पीसीसीएफ। लेकिन, ये कहने के लिए है। सीएस ब्यूरोक्रेसी का मुखिया होता है, लिहाजा उसका रुतबा सबसे उपर होता है। पिछले 19 साल में लोगों ने देखा भी कि बड़ी बैठकों में डीजीपी को तीसरे या चौथे नम्बर की ही कुर्सी मिलती थी… पीसीसीएफ तो किसी गिनती में ही नहीं होते थे। डीजीपी में विश्वरंजन ने जरूर अपना ओहरा कायम रखा। बाकी डीजीपी और पीसीसीएफ का प्रोटोकॉल के लायक कभी समझा ही नहीं गया। लेकिन, चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल ने सूबे में नई पहल करते हुए अफसरों को निर्देश दिया है कि कोई भी बड़ी बैठक हो तो सीएस के अगल-बगल डीजीपी और पीसीसीएफ की कुर्सी लगनी चाहिए। पहली बार राज्योत्सव में लोगों ने इसे देखा भी। डीजीपी डीएम अवस्थी और पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी मंच पर नजर आए। यही नहीं, मंडल इन डीजीपी और पीसीसीएफ को साथ लेकर दौरे पर निकलने वाले हैं। टीम मंडल का पहला दौरा बस्तर का होगा।

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पूर्व मंत्री का गुस्सा

भाजपा मुख्यालय में 7 नवंबर को जो हुआ, वह पहले कभी नहीं हुआ। नेतृत्व सीधे निशाने पर था। दरअसल, नगरीय निकाय और संगठन चुनाव के लिए बुलाई गई बैठक में पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय को बोलने की बारी आई तो उन्होंने भिलाई में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति के तरीके पर सवाल उठा दिए। उन्होंने बेहद तल्खी के साथ कहा कि 15 साल तक आप लोग भिलाई के संदर्भ में कोई नियुक्ति करनी होती थी तो अपने मन से नाम तय कर मुझे सहमति के लिए भेज देते थे। अब पार्टी विपक्ष में आ गई तो सहमति के लिए मुझसे पूछने की जरूरत नहीं समझी गई। प्रेमप्रकाश का इतना बोलना था कि पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर और विधायक शिवरतन शर्मा खड़े हो गए। इसके बाद तो कुछ बाकी नहीं रहा। अजय चंद्राकर यहां तक बोल गए कि 15 साल तक सत्ता में रही पार्टी का ये हाल है कि एक साल होने जा रहा और एक कार्यक्रम नहीं कर सकी है…लोग पूछ रहे हैं, कहां है बीजेपी। इस वाकये के बाद बैठक कक्ष में सन्नाटा पसर गया….बड़े नेताओं की काटो तो खून नहीं वाली स्थिति हो गई। पार्टी पदाधिकारियों के तेवर भांप कर ही फिर 13 नवंबर से जेल भरो आंदोलन का ऐलान करना पड़ा।

एडीजी को आईजी

गृह विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों का जवाब नहीं है। एडीजी, आईजी लेवल के आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर में ऐसी चूक कि अफसर बगले झांकते रहे। पिछले हफ्ते 22 आईपीएस के ट्रांसफर हुए, उसमें एसआरपी कल्लूरी और हिमांशु गुप्ता के भी नाम थे। हिमांशु दुर्ग रेंज से एडीजी इंटेलिजेंस बनाए गए। और एसआरपी कल्लूरी ट्रांसपोर्ट से पुलिस मुख्यालय। चूकि, इन दोनों जगहों पर आईजी लेवल के अफसर पोस्टेड होते हैं। लिहाजा, मंत्रालय के अफसरों ने ज्यादा दिमाग लगाने की बजाए दोनों को आईजी बना दिया…हिमांशु गुप्ता आईजी खुफिया होंगे कल्लूरी पीएचक्यू में आईजी। जबकि, दोनों कबके एडीजी हो चुके हैं।

कलेक्टरों का ट्रांसफर?

कलेक्टरों की बड़ी लिस्ट हालांकि, नगरीय निकाय चुनाव के बाद निकलेगी। लेकिन, खबर आ रही है कि चुनाव का ऐलान होने से पहिले एक-दो कलेक्टरों को सरकार बदलने पर विचार कर रही है। खासकर एक कलेक्टर से सरकार कुछ नाराज भी है। संकेत यह भी हैं कि कहीं एक-दो के ट्रांसफर हुए तो हो सकता है, चेन कुछ बड़ा हो जाए।

दो पीसीसीएफ

कैबिनेट द्वारा पीसीसीएफ के दो पदों बढ़ाने की हरी झंडी देने के बाद प्रमोशन की अनुमति के लिए फाइल भारत सरकार भेज दी गई है। वहां से सहमति मिलते ही डीपीसी होगी और आरबीपी सिनहा और संजय शुक्ला पीसीसीएफ हो जाएंगे। हालांकि, सिनहा इसी महीने रिटायर होने वाले हैं। इसलिए, अगले हफ्ते तक अगर डीपीसी हो गई तो मुश्किल से वे 15 दिन पीसीसीएफ रह पाएंगे। दिसंबर में फिर उनकी जगह पर नरसिम्हा राव पीसीसीएफ बन जाएंगे। पता चला है, इसी डीपीसी में नरसिम्हा राव का नाम लिफाफा में बंद कर दिया जाएगा। ताकि, फिर से डीपीसी करने की जरूरत न पड़े। सिनहा अभी मेडिसिनल प्लांट बोर्ड के सीईओ हैं और संजय लघु वनोपज संघ के एडिशनल एमडी। प्रमोशन के बा समझा जाता है, संजय वहीं पर एमडी बन जाएंगे।

अंत में दो सवाल आपसे

1. गृह और जेल और पंचायत मिलने से सुब्रत साहू प्रसन्न होंगे या…..?
2. सुनील कुजूर और केडीपी राव को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग कब तक मिलेगी?

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