पंचायत विभाग ने भी दिया शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नति के मामले में झटका ….जारी किया मार्गदर्शन…. पढ़े आदेश के क्या है सरल शब्दों में मायने…..

रायपुर 11 अक्टूबर 2019. स्कूल शिक्षा विभाग के बाद अब पंचायत विभाग ने भी क्रमोन्नति के विषय में अपना स्पष्ट मार्गदर्शन जिला पंचायतों को दे दिया है जिसके बाद यह पूरी तरह क्लियर हो चुका है की क्रमोन्नति के मामले में बाजी शिक्षाकर्मियों के हाथ से निकल चुकी है । 23 सितंबर को पंचायत संचालक जितेंद्र शुक्ला ने जिला पंचायत बालोद के पत्र पर मार्गदर्शन प्रदान किया है जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालय के कई प्रकरणों में विभाग द्वारा निराकरण लंबित है इस विषय में उन्होंने बताया है कि

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“विभाग द्वारा 2 नवम्बर सन 2011 को जारी किए गए आदेश के अनुसार ऐसे शिक्षाकर्मी जिनकी पदोन्नति नहीं हुई थी और जिनकी 10 साल की सेवा पूर्ण हो चुकी थी उन्हें क्रमोन्नत वेतनमान स्वीकृत किया गया था बाद में 8 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके समस्त शिक्षक संवर्ग को 1 मई 2013 से शासकीय शिक्षकों के समतुल्य वेतनमान (पुनरीक्षित वेतनमान) स्वीकृत करने की वजह से क्रमोन्नति के आदेश को भूतलक्षी प्रभाव से निरस्त कर दिया गया यानी क्रमोन्नति का लाभ केवल और केवल नवंबर 2011 से मई 2013 तक उन शिक्षाकर्मियों को मिलना था जिनकी 10 वर्ष की सेवा पूर्ण हो चुकी थी और जिनकी पदोन्नति नहीं हुई थी उन्होंने स्पष्ट करते हुए बताया है कि विभाग के 28 अप्रैल 2015 को जारी किए गए आदेश में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया है कि क्रमोन्नति केवल 30 अप्रैल 2013 तक ही प्रभावशील रहा है । इसके आगे उन्होंने लिखा है 30 अप्रैल 2013 के पश्चात जिन कर्मचारियों की सेवा 10 वर्ष पूर्ण हुई है और उनकी पदोन्नति नहीं हुई है उन्हें क्रमोन्नति वेतनमान प्राप्त करने की पात्रता नहीं है ।

सरल शब्दों में क्या है आदेश के मायने

इस आदेश से यह स्पष्ट हो चुका है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति अप्रैल 2003 के बाद हुई है वह क्रमोन्नति के हकदार हैं ही नहीं क्योंकि उनकी 10 वर्ष की सेवा जब अप्रैल 2013 के बाद पूर्ण हुई तब तक क्रमोन्नति के प्रावधान को ही हटा लिया गया था ।

2003 के पहले के सिर्फ और सिर्फ उन्हीं शिक्षकों को क्रमोन्नति की पात्रता थी जिन्हें सेवा में 10 वर्ष हो चुके थे और जिन्हें पदोन्नति नहीं मिली थी ।

इन शिक्षकों को भी उनके 10 वर्ष पूर्ण होने की अवधि से गिनती करते हुए केवल 2011 से 2013 के बीच की अवधि तक ही क्रमोन्नत वेतनमान की पात्रता है और बाद में 30 अप्रैल सन 2013 से किसी भी कर्मचारी को क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ नहीं दिया जाना है क्योंकि यह भूतलक्षी प्रभाव से निरस्त हो चुका है ।

ऐसे में अब केवल उन्हीं शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा जिनकी 10 वर्ष की सेवा अवधि 2011 से अप्रैल 2013 के बीच पूर्ण हो चुकी थी उन्हें अप्रैल 2013 के बीच में यदि क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया होगा तो उनकी गणना करके एरियर्स के तौर पर बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा ।

इससे स्पष्ट है कि पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ मिलते ही तात्कालिक शासन ने क्रमोन्नत वेतनमान के लाभ को छीन लिया था और उसकी कोई गुंजाइश नहीं बची थी । भले ही शिक्षक संघ इसके नाम पर जमकर राजनीति करते रहे लेकिन अभी तक 6 सालों में यदि शिक्षाकर्मियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया वह भी तब, जब आदेश स्पष्ट तौर पर जारी हो चुका था और उसके बाद निरस्त किया गया तो इसके पीछे की वजह यही थी जो अधिकारियों ने एक बार फिर क्लियर कर दिया है ।

इस आदेश के जारी होने के बाद एक बार फिर शिक्षक संघों की राजनीति गर्म होने की उम्मीद है लेकिन वास्तविकता यही है कि क्रमोन्नति के नाम पर सिर्फ और सिर्फ शिक्षक नेताओं ने अपना जेब गर्म किया और इस लड़ाई को कभी वैसा लड़ा ही नहीं गया जैसा संविलियन के लिए लड़ाई लड़ी गई । यही वजह है कि भूतलक्षी प्रभाव से आदेश निरस्त होने के बाद भी मुद्दे ने कभी भी वैसी हवा नहीं पकड़ी जैसी पकड़नी चाहिए थी और अब स्कूल शिक्षा विभाग में पहुंचने के बाद पंचायत विभाग से क्रमोन्नत वेतनमान मिलने की लगभग सभी गुंजाइश खत्म हो चुकी है।

इधर स्कूल शिक्षा विभाग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह 1 जुलाई 2018 के बाद के ही किसी भी प्रकार के देय लाभ का जिम्मेदार होगा साथ ही शासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिस समय तक क्रमोन्नत वेतनमान प्रभावशील रहा केवल उसी दौर के शिक्षाकर्मियों को इसका लाभ मिलेगा यानी लड़ाई से 2003 के बाद के शिक्षाकर्मी पहले ही बाहर हो गए हैं और उनको इसका किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं मिलेगा यह आदेशों से पहले ही तय हो गया है ।

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