NPG EXCLUSIVE: NPG से बोले मंत्री कवासी लखमा “ जिसे मुझसे जान का डर हो.. मैं उसे अपने घर पर रखूँगा.. हर साँस की रखवाली करूँगा..ताड़ी काटता था..ग़रीब हूँ..तीन पाँच नहीं जानता..बस इतना पता है जब तक ज़िंदा हूँ बस्तर के लिए समर्पित रहूँगा”

चित्रकोट,12 अक्टूबर 2019।झीरम कांड को लेकर मौजूदा सरकार में मंत्री कवासी लखमा एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। जब झीरम कांड हुआ तब कांग्रेस के उस परिवर्तन यात्रा में बतौर कांग्रेसी शामिल रहे शिवनारायण द्विवेदी जो कि अब भाजपा में शामिल बताए गए उन्होने न्यायिक जाँच आयोग के समक्ष बयान के बाद डीजीपी डी एम अवस्थी को एक पत्र सौंपा है जिसमें उन्होंने सुरक्षा की माँग करते हुए मंत्री कवासी लखमा से ख़ुद को जान का ख़तरा बताया है।
झीरम घटना को लेकर मौजूदा सरकार में मंत्री कवासी लखमा कई मर्तबे निशाने पर लिए जाते हैं। NPG से मंत्री कवासी लखमा ने कहा

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“क्या करुं मैं .. कि.. माओवादियों ने मुझे ज़िंदा छोड़ दिया.. मैं बार बार जंगलवालों को बोला छोड़ दो.. तो मुझे बंदूक़ के बट से मारे ..गाली दिए..और मैं ही ज़िंदा बचा था क्या.. मेरे अलावा भी तो लोग ज़िंदा बचे.. यदि ज़िंदा बचना ही सवाल है तो सवाल केवल कवासी से क्यों..”
डीजीपी को सौंपे गए पत्र पर मंत्री कवासी ने कहा
“मैं सीधा आदिवासी हूँ.. तीन पाँच नहीं जानता.. मेरे से जान का ख़तरा है..जिसको ख़तरा है.. वो मेरे घर मेरे गाँव में रहे.. हर समय उसका ध्यान मैं रखूँगा.. जो चाहेगा वो खिलाऊँगा..जैसा चाहेगा रखूँगा..मैं क्या मारुंगा साहब किसी को”

 

मंत्री कवासी लखमा ने सवाल किया
“झीरम के तुरंत बाद बल्कि पाँच साल तक कुछ याद नहीं आया.. आज क्या हो गया .. कभी ख़तरा नहीं था.. आज ख़तरा हो गया.. ये इसको बोलते हैं राजनीति”
माओवादियों के हालिया बयान जो कि विज्ञप्ति की शक्ल में आएँ हैं, वे कवासी लखमा को सीधी धमकी का पुट लिए हुए हैं। मंत्री कवासी लखमा ने कहा

 

“कोई क्या लिखता बोलता मैं नहीं जानता..मैं बस्तरिहा हूँ.. बस्तर के साथ जब ग़लत हुआ तब बोला.. तब लड़ा.. आदिवासियों का घर जलाए तब लड़ा.. सलवा जूडूम में ग़लत किए तब लड़ा.. कल भी लड़ा और आज भी लड़ूँगा..बस्तरिहा हूँ और बस्तर के लिए लड़ते रहूँगा”
मंत्री कवासी लखमा ने आगे कहा
“ज़िंदगी जब तक है..जब तक भी है.. बस्तरिहा बस्तर के लिए लड़ते रहेगा..मैं ताड़ी काटता था.. मवेशी चराता था…मेरे को बोलते नहीं आता.. लेकिन आदिवासी हूँ.. बस्तरिया हूं.. जंगल पानी नदी खेत जानता हूँ.. इसको कोई नहीं छीन सकता”

मंत्री कवासी लखमा सलवा जूडुम के समय तत्कालीन जिला प्रशासन, राज्य सरकार और सलवा जूडूम के तत्कालीन नेतृत्व कर्ता और उनके समर्थकों के निशाने पर आ गए थे, जबकि कोंटा विधायक रहे कवासी ने सलवा जुड़ूम के दौरान हुई बेलगाम हिंसा..आगज़नी.. समेत कई अमानुषिक घटनाओं का उल्लेख किया और सलवा जूडूम का खुला विरोध किया था। कवासी लखमा को तब नक्सल समर्थक बताते हुए उन्हें प्रश्नांकित किया गया था, और तब कवासी लखमा ने कहा था

 

“ नक्सली से लड़ना है लड़ें.. घर जला रहे आदिवासी को मार रहे है.. आदिवासी लोग अपना गाँव घर छोड़कर आंध्रा भाग रहे हैं.. हत्या कर रहे हैं बलात्कार कर रहे हैं..ये कैसा सलवा जूडूम है.. आम ग़रीब आदिवासी के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं.. यह रोकना होगा”
मंत्री कवासी लखमा के कई रिश्तेदारों को माओवादियों ने मार डाला है, कई इलाक़े उनके निर्वाचन के ऐसे हैं जहाँ कवासी मुश्किलों से पहुँचते हैं या फिर नहीं भी पहुँच पाते।

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