NPG Breaking: अपहृत तीन व्यक्तियों के मसले पर समूचा PHQ मौन व्रत पर.. DGP का फ़ोन नो रिस्पांस..मैसेज भी NO REPPLY सूत्रों के अनुसार “देर शाम तक हो सकती रिहाई”

रायपुर/दंतेवाड़ा,12 अक्टूबर 2019।इसे आप मुँह छुपाना कहिए या नज़र चुराना..पर आलम यही है। प्रदेश के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में दो शासकीय कर्मचारी समेत सड़क निर्माण कंपनी के कल दोपहर से अपहरण होने की ख़बर कल शाम से तैरनी शुरु हुई जो आज दोपहर तक ख़बर के रुप में तब्दील हो गई। पर यह ख़बर इन पंक्तियों के साथ नुमाया हुईं
“माओवादियों द्वारा तीन व्यक्तियों के अपहरण की ख़बर.. अधिकृत पुष्टि नहीं”
दिलचस्प है या शर्मनाक मगर मामला “मसला” बन गया है..इंटिलिजेंस के आसमानी दावे के साथ बात बे बात नुमाया होता PHQ घंटों बाद भी यह नहीं कह पा रहा है कि, यह अपहरण है या नहीं है.. यदि अपहरण नहीं है तो तीनों व्यक्ति क्या जंगल घूमने गए हैं और थक कर कहीं सो गए हैं।
ना खंडन और ना ही मंडन के बीच यह भी ग़ौर तलब है कि डीजीपी डीएम अवस्थी का इस मसले पर ना तो फ़ोन ही उठ रहा है और ना ही टैक्स्ट मैसेज पर कोई जवाब आ रहा है। यही आलम रेंज से लेकर मैदानी अमले का है, ऐसा मौन उस सुभाषित की याद दिलाता है जिस पर लिखा है
“मौनस्य स्वीकृति लक्षणं”
याने यदि प्रश्न हो रहें हों और जवाब में मौन आ रहा हो तो उसे स्वीकार्यता समझना चाहिए, यहाँ यह याद रखिए कि, प्रश्न बेहद संक्षिप्त था और वह प्रश्न केवल यह था
“क्या दंतेवाड़ा इलाक़े में तीन व्यक्तियों जिनमें दो शासकीय कर्मचारी हैं उनका नक्सलियों ने अपहरण कर लिया है”
अब जवाब में मौन है.. तो ख़बर को यूँ पढ़ना बेहतर होगा
“दंतेवाड़ा में तीन व्यक्तियों के नक्सलियों द्वारा अपहरण की ख़बर.. समुचा पुलिस महकमा मौन”
इस मौन के बीच जो ख़बरें आ रही हैं वह यह कहती हैं कि
“अपहरित कर्मचारी जिनमें पीएमजीएसवाई के सब इंजीनियर अरुण मराबी जनपद पंचायत के तकनीकि सहायक मोहन बघेल और सड़क निर्माण कंपनी जिसे गुप्ता कंस्ट्रक्शन बताया जा रहा है का एक कर्मचारी शामिल है, कल दोपहर तकारी मुटगेड़ के बीच तब अपहरित कर लिए गए जबकि वे प्रस्तावित सड़क को देखने गए थे, यह सड़क बनाने का हालिया अनुबंध हुआ है”
पुलिस अधिकारियों के मौन व्रत के बीच सूत्रों से मिली सूचना कहती है
“देर शाम या रात तक अपहरित व्यक्तियों की रिहाई हो सकती है, पुलिस भले मौन हो लेकिन उसकी ओर से हरसंभव क़वायद जारी है कि अपहरित लोगों को छुड़ाया जा सके, इसके लिए तीन स्तर पर काम चल रहा है”
सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार इस मसले पर तीन बिंदू हैं, पहला यह कि दोनों शासकीय कर्मचारी ट्रेप में फँसे,जिसे निर्माण कंपनी का कर्मचारी भी नहीं समझ पाया, दूसरा यह कि निर्माण कार्य को लेकर हमेशा की तरह लेव्ही का मसला हो, और तीसरा यह भी है कि ग्रामीण कुछ कारणों से नाराज़ थे। हालाँकि यह पढ़ते हुए कृपया यह भी पढ़ें कि, इनमें से किसी सुचना की अधिकारिक पुष्टि नहीं है।

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