मंत्री को भी चाहिए न्याय

1 दिसंबर 2019

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सूबे के युवा आदिवासी मंत्री का बेटा दुर्ग के इंजीनियरिंग काॅलेज से बीई कर रहे हैं। वहां किसी बात को लेकर हाॅस्टल में कुछ छात्रों से विवाद हो गया। छात्रों के समर्थन में एनएसयूआई के नेता हाॅस्टल पहुंचे और मंत्रीजी के बेटे की जमकर पिटाई कर दी। अब बेटा पिट जाए, किसी भी पिता को भला बर्दाश्त कैसे हो सकता है। वो भी पिता जब मंत्री हों। गुस्से में तमतमाते हुए मंत्रीजी ने फौरन दुर्ग के सीनियर पुलिस अधिकारियों को फोन लगाया। बोले, बेटे के साथ मारपीट करने वालों को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भिजवाओ, वरना खैर नहीं….विधानसभा चालू होने वाला है…समझ जाना। मगर मंत्रीजी की इस घुड़की का पुलिस अधिकारियों पर कोई असर नहीं हुआ। मंत्रीजी इसके बाद दुर्ग गए और बेटे को साथ लेकर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के पास न्याय मांगने पहुंचे। गृह मंत्रीजी बोले, निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी। मगर क्लास यह है कि घटना के एक हफ्ते बाद गिरफ्तारी तो छोड़िये, अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। सुना है, अब मंत्रीजी कार्रवाई के लिए डीजीपी डीएम अवस्थी से मिलने वाले हैं। ऐसे में, समझा जा सकता है, सूबे में पोलिसिंग की क्या हालत है। मंत्री रिपोर्ट लिखाने भटक रहे हैं, तो आम आदमी का क्या होगा?

अफसर, पुलिस और चोर

एक अफसर के घर में चोरी हुई। पुलिस में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई। चूकि, बड़े अफसर का मामला था, पुलिस हरकत में आई और हाईप्रोफाइल चोर को पकड़ लिया गया। अब आई पैसे और जेवरात की बरामदगी की बारी। चोरी की रिपोर्ट में जो नगदी और गहने का ब्यौरा दिया गया था, चोरों के पास माल उससे कहीं अधिक ज्यादा मिला। रिपोर्ट जितने की लिखाई गई है, पुलिस उससे अधिक भला बरामदगी कैसे दिखा सकती है। चोरों ने भी मीडिया की खबरों को पढ़ लिया था कि इतनी राशि की चोरी हुई है। लिहाजा, पुलिस और चोरों ने मिलकर आपस में समझ लिया और जितनी रकम और जेवरात अफसर द्वारा बताई गई थी, उतना लौटा दिया गया। व्हाट इज आइडिया!

आईएएस में एक, आईपीएस में जीरो

डीजी जेल और होमगार्ड बीके सिंह के रिटायर होने के बाद आईपीएस में सीनियर लेवल पर शून्यता की स्थिति निर्मित हो जाएगी। राज्य बनने के बाद यह पहली बार होगा कि डीजी लेवल पर डीजीपी के अलावा एक भी अफसर नहीं होगा। जबकि, सूबे में डीजी के चार पोस्ट हैं। लेकिन, इस साल डीजी लेवल के तीन आईपीएस रिटायर हो गए। पहले गिरधारी नायक, फिर एएन उपध्याय और अब बीके सिंह। इससे पहिले डीजी लेवल पर अफसरों की संख्या इतनी होती थी कि स्पेशल डीजी बनाना पड़ता था। संतकुमार पासवान स्पेशल डीजी रह चुके हैं। यानि पोस्ट न रहने के बाद भी भारत सरकार से अनुमति लेकर प्रमोशन दे दिया जाता था। मगर इस बार मामला ही उल्टा है। डीजी लेवल पर कोई अफसर ही नहीं है। पूरे तीन पद खाली हैं। कमोवेश इसी तरह के हालात आईएएस में भी है। चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल के बाद मंत्रालय में सिर्फ एक एडिशनल चीफ सिकरेट्री हैं। अमिताभ जैन। ऐसा कभी नहीं हुआ कि सरकार के पास एक एसीएस हो। एक समय तो छह-छह एसीएस हो गए थे। स्वीकृति पद से भी अधिक। और अभी मात्र एक। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सीएस 87 बैच के हैं। उनसे नीचे 88 बैच में केडीपी राव थे। वे 31 अक्टूबर को रिटायर हो गए। 89 बैच में भी एक ही आईएएस हैं। अमिताभ जैन। 90 बैच के शैलेष पाठक नौकरी छोड़ दिए। 91 बैच में रेणु पिल्ले, 92 बैच में सुब्रत साहू और 93 बैच में अमित अग्रवाल हैं। याने सभी बैच में एक-एक अफसर। 94 बैच में जरूर चार-पांच आईएएस हैं। मगर दिक्कत यह है कि 2024 या बहुत हुआ तो 2023 के एंड में ये एसीएस बन पाएंगे। तब मंत्रालय में यही स्थिति रहनी है।

सीएस के ग्रुप में एसपी

अवैघ धान पकड़ने में जिले के पुलिस कप्तान कितने सजग हैं, चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल इस पर नजर रख रहे हैं। इसके लिए चीफ सिकरेट्री ने एक अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हैं। उन्होंने इस ग्रुप में सभी 27 जिलों के कलेक्टरों को जोड़कर सभी को एडमिन बना दिया। कलेक्टरों को उन्होंने अपने-अपने जिलों के एसपी को जोड़ने का मैसेज भेजा। अब सारे कलेक्टर, एसपी सीएस के व्हाट्सएप ग्रुप में हैं। हालांकि, कलेक्टर तो सीएस के ग्रुप में रहते ही हैं, पहला मौका होगा जब सीएस के व्हाट्सएप ग्रुप में एसपी भी जोड़े गए हैं। सीएस लगातार व्हाट्सएप के जरिये धान के अवैध ढुलाई को वाॅच कर रहे हैं।

डीएम भी अब सड़क पर

डीजीपी डीएम अवस्थी भी अब पुलिस मुख्यालय से निकलकर फील्ड में उतर गए हैं। पिछले हफ्ते अचानक वे धमतरी जिलों के कई थानों में धमक गए। एक थाने में डीजीपी जब पहुंचे तो वहां जश्न की तैयारी चल रही थी। थाने में एक भी स्टाफ बर्दी में नहीं था। कोई जिंस में था तो कोई टीशर्ट में। डीएम ने थानेदार समेत सात पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया।

अजय अध्यक्ष?

विधानसभा के शीत सत्र में विधायक अजय चंद्राकर गजब फर्म में दिखे। लगा पूरी पार्टी एक तरफ और अजय एक तरफ। विपक्ष की ओर से सत्ता पक्ष पर हमला बोलने का जिम्मा अकेले ही संभाले रहे। उनकी आक्रमकता ने मंत्रियों को भी कई बार असहज किया। पता चला है, बीजेपी में नया अध्यक्ष अपाइंट होने वाला है। उसमें अजय चंद्राकर का भी नाम है। चंद्राकर के साथ सिर्फ एक रोड़ा है वह कुर्मी होना। असल में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी उन्हीं के समुदाय से आते हैं। अब एक ही वर्ग से दो बड़े पदों पर नियुक्ति तो हो नहीं सकती। लेकिन, यह अवश्य है कि अजय चंद्राकर तगड़े दावेदार हैं अध्यक्ष पद के। भाजपा भी चाह रही है कि सूबे में अगर सीएम भूपेश बघेल जैसे नेता से अगर टक्कर लेना है, तो आक्रमक नेता को ही पार्टी की कमान सौंपनी होगी। शिवप्रताप सिंह, रामसेवक पैकरा, विष्णुदेव साय, विक्रम उसेंडी….अब बहुत हो गया।

बनवारीलाल की चूक

भाजपा नेता बनवारीलाल अग्रवाल की एक राजनीतिक चूक ने छत्तीसगढ़ में विपक्ष को विधानसभा का उपाध्यक्ष पद देने की परंपरा ही खतम कर दी। अजीत जोगी सरकार के समय बनवारी लाल अग्रवाल डिप्टी स्पीकर थे। उन्होंने सरकार से किसी बात पर अनबन होने पर इस पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद तत्कालीन सीएम अजीत जोगी ने कांग्रेस के धरमजीत सिंह को विस उपाध्यक्ष बनवा दिया। कांग्रेस के बाद बीजेपी के कार्यकाल में भी ऐसा ही हुआ। भाजपा ने अपनी ही पार्टी के नारायण चंदेल और बद्रीधर दीवान को विस उपाध्यक्ष बनाया। अब कांग्रेस भी मनोज मंडावी को उपाध्यक्ष बनाने जा रही है।

अंत में दो सवाल आपसे

नगरीय निकाय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन न करने पर कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नरों को क्या बदला जाएगा?

राजस्व सचिव एनके खाखा रिटायर हो रहे हैं, क्या उन्हें कोई पोस्ट रिटायरमेेेंट पोस्टिंग मिलेगी?

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