मां लक्ष्मी को ऐसे करें प्रसन्न…इस नक्षत्र में करें मां लक्ष्मी गणेश पूजन आपके पास स्थिर रहेंगी लक्ष्मी… ये दिव्य उपाय कर मिलेगा महावरदान…पढ़ें पूजा विधि और मंत्र

रायपुर 27 अक्टूबर 2019. आज पूरे देश में धूमधाम से दिवाली का त्योहार मनाया जा रहा है. धनतेरस से शुरू होने वाला यह त्योहार भाई दूज तक चलता है. दिवाली पर पूजा का खास महत्व होता है. कार्तिक मास की अमावस्या को महानिशा काल में और स्थिर लग्न में महादेवी लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है. इससे संपूर्ण वर्ष में लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य की वृद्धि रहती है और धन की कमी बिल्कुल नहीं होती. ऐसे में अगर पूजा के वक्त कुछ विशेष बातों को ध्यान रखा जाए तो आपका भाग्य चमक सकता है.

वाट्सएप पर अपडेट पाने के लिए कृपया क्लीक करे

तीन ग्रहों का बन रहा संयोग : ज्योतिष के जानकार पंडित राकेश झा शास्त्री का कहना है कि इस बार दीपावली पर चतुर्दशी एवं अमावस्या दोनों तिथि मौजूद होने से युग्म योग का भाव बन रहा है। इस बार दीपावली पर 27 अक्टूबर रविवार को सुबह चतुर्दशी और संध्या में अमावस्या तिथि रहेगी। इस दिन गुरु वृश्चिक राशि में तथा सूर्य व चंद्र तुला राशि विद्यमान होंगे। बारह वर्ष पूर्व 08 नवंबर 2007 को भी ऐसा ही योग बना था। उस समय भी शनि तथा  केतु की युति थी, लेकिन ये ग्रह सिंह राशि में स्थित थे। 23 अक्टूबर 1995 को भी गुरु वृश्चिक राशि में था और तब भी चतुर्दशी युक्त अमावस्या तिथि पर दीपोत्सव का पर्व मनाया गया था। पंडित झा का कहना है कि इस दिन स्वास्थ्य वृद्धि कारक योग भी बन रहा है। इस योग में माता लक्ष्मी की पूजा-आराधना से आरोग्य सुख, भौतिक समृद्धि, मानसिक तथा आत्मिक बल की प्राप्ति होगी।

सजाये थाली…

रोली-मोली, चावल, केसर, इत्र, कपूर, धूप, घी का दीपक, खील-बताशे, खांड के खिलौने, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, लाल फूलों की माला खासकर कमल के फूल से थाली सजाएं। कुछ खुले फूल भी रख लें।

गणेश विवेक के देवता हैं तो लक्ष्मी संपदा की देवी। संपत्तिवान की अपेक्षा विवेकवान होना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। ऐसे में पहले गणेश पूजन करें। यह जरूरी है कि धन का उपार्जन न्याय नीति के आधार पर हो और उसका उपयोग भी विवेकशीलता से हो। लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू है। वह रात में ही देख सकता है। ऐसे में उस पर सवार होकर लक्ष्मी रात्रि में ही भ्रमण करती हैं। इसी कारण ब्रह्मांड पुराण में महानिशीथ काल की लक्ष्मी पूजा को विशेष फलदायिनी कहा गया है। इससे आर्थिक संकट दूर होते हैं।

महालक्ष्मी मंत्र:  श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

पूजन सामग्री : कलश, कुबेर, महालक्ष्मी व श्री गणेश की प्रतिमा, दक्षिणवर्ती शंख, कमलगट्टा, गोमतीचक्र व छोटा नारियल, श्री लक्ष्मी पादुका,श्रीयंत्र व पुस्तक पूजन ।
महालक्ष्मी होंगी ऐसे प्रसन्न : दूभि,ईत्र, हल्दी,कुमकुम, अक्षत एवं कमलगट्टा से पूजन करें ।

कैसे करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा?

– अपने घर की उत्तर या पूर्व दिशा को (पूजास्थल) को साफ करके स्थिर लग्न में एक लकड़ी के पटरी पर सवा मीटर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश देवी लक्ष्मी और कुबेर आदि देवताओं की स्थापना करें

–  सभी देवी देवताओं को रोली मोली चावल धूप दीप सफेद मिष्ठान्न अर्पण करें और भगवान गणेश को 27 हरी दूर्वा की पत्तियां और देवी लक्ष्मी को कमल का पुष्प अर्पित करें

– स्थिर लग्न में स्वयं आप लाल आसन पर बैठकर अपने दाएं हाथ में जल लेकर देवी लक्ष्मी से अपने घर में चिर स्थाई रूप से रहने की प्रार्थना करें

– ॐ गं गणपतये नमः और ॐ ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः और ॐ कुबेराय नमः मन्त्र का कमलगट्टे की माला से 108 बार जाप करें

– जाप के बाद भगवान गणपति देवी लक्ष्मी और सभी देवी देवताओं को सफेद मिठाई और फल और साबूदाने की खीर का भोग लगाएं  और परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ले

ये विशेष उपाय करने से दौड़कर आएंगी देवी लक्ष्मी

– दिवाली की पूजा अर्चना से पहले अपनी पूजन की समस्त सामग्रियों को एक जगह पूजन स्थल पर इकट्ठा करके रखें.

– पूजन करने से लगभग 15 मिनट ठीक पहले किसी जरूरतमंद सुहागन स्त्री को लाल साड़ी या सवा मीटर लाल कपड़ा सुहाग की समस्त सामग्री और सफेद मिठाई घर पर बुलाकर अवश्य दें.

– दिवाली की पूजा अर्चना करने से पहले घर के सभी कमरों में रोशनी करें और घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां खुली रखें और घर में गुलाब की सुगंध करें.

तिजोरी में रखें दिव्य पोटली

– एक चौकोर रेशमी पीला रुमाल ले और 27 कमलगट्टे 11 पीली कोड़िया/शुद्ध गुलाब का इत्र और शुद्ध लाल चंदन का टुकड़ा लें.

– अपने घर की उत्तर दिशा में स्थिर लग्न में लाल आसन पर बैठे.

– गाय के घी का एक दिया भगवान गणेश और लक्ष्मी के सामने जलायें  उन्हें लाल गुलाब के फूल अर्पण करें.

-ॐ श्रीं श्रियै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें देवी लक्ष्मी से अपने घर में हमेशा के लिए रहने की प्रार्थना करें.

– अपने मन की कामना देवी लक्ष्मी से और यह समस्त सामग्री पीले रुमाल में रखकर कलावे की सहायता से बांधे और घर की तिजोरी में रख दें.

व्यापार-नौकरी में तरक्की के लिए करें ये महाउपाय

– अपने घर की उत्तर या पूर्व दिशा में स्थिर लग्न में या महानिशा काल में देवी लक्ष्मी के सामने गाय के घी का दिया जलाएं और लाल आसन पर बैठकर गणेश जी का ध्यान करें और भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप करें

– शुद्ध चांदी के बर्तन या किसी भी पात्र में साबूदाने की खीर या सफेद मिष्ठान्न रखें और उन्हें लाल गुलाब के फूल और कमल के पुष्प अर्पण करें

– आसन पर बैठे-बैठे ही श्री सूक्त का उच्च स्वर में जाप करें जाप के बाद माता लक्ष्मी को खीर या मिष्ठान का भोग लगाएं और छोटी कन्या और सुहागन स्त्री को दें

पूजा का समय

व्यापारी वर्ग पूजा का समय दोपहर 2:17 से 3:41 तक

शाम की पूजा का समय 6:45 से 8:36 तक

महानिशाकाल रात 1:14 से 3:27 तक

 

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.