गल्ली बॉय से IAS तक का दिलचस्प सफर.. एवरेज स्टूडेंट..दो बार की UPSC नाकामी.. लेकिन दिल कहता रहा – “अपना टाईम आएगा”…

जोधपुर 18 सितंबर 2019।जोधपुर की गलियों में क्रिकेट खेलने वाला एक लड़का जो पढ़ाई में एकदम एवरेज था. जब भी कोई कहता कि बड़े होकर क्या बनोगे, वो बस यही कहता कि मुझे बड़ा ही नहीं होना. ये लड़का है दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, जो दो UPSC के दो अटेंप्ट में नाकाम हुआ तो लोगों ने कहा कि तुमसे न हो पाएगा, लेकिन दिलीप ने कहा कि अपना टाइम आएगा. इस तरह तीसरे प्रयास में यूपीएससी 2018 में 77वीं रैंक पाई, जानें किस तरह तैयारी करके दिलीप ने सफलता पाई.
दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने एक इंटरव्यू में कहा कि हां, मैं
गली ब्वॉय से आईएएस बना. बड़े होने के सवाल पर मैं कहता था कि मुझे बचपन में ही मजा आ रहा है. मुझे बड़े होने की चिंताएं देखनी ही नहीं है. लेकिन 12वीं क्लास के बाद मेरे सामने चिंता आई कि क्या करूं. फिर एक इंजीनियरिंग कॉलेज NIT राउरकेला में केमिकल इजीनियरिंग करने चला गया. एक समय आया कि लगा कि घर वापस चला जाऊं.
वहां से वापस न लौटकर फाइनल इयर में कैंपस प्लेसमेंट से नौकरी ले ली. लेकिन यहां सीनियर से ये सुना कि आईएएस ऐसा क्षेत्र है जहां आप समाज सेवा के साथ एक नोबल जॉब कर सकते हैं. लेकिन, अपना बैक ग्राउंड देखकर कभी महसूस नहीं होता था कि मैं ये कर पाऊंगा. उस पर मैं एकेडिमकली भी अच्छा नहीं था. कॉलेज में कई सब्जेक्टस में फेल हुआ था. ऐसे में सबसे जरूरी था कि घरवालों की मंजूरी होनी चाहिए.
ये मेरे लिए अद्भुत अनुभव था. यहां आकर मैं डिप्रेशन में चला गया कि कैसे अच्छे अच्छे घरों से लागे आए हैं. कितना पढ़े हैं, जब ये नहीं कर पा रहे तो मैं कैसे करूंगा. फिर सोचा कि अब वापस गया तो आईने में खुद को नहीं देख पाऊंगा. हमेशा यही सोचूंगा कि मैं कुछ नहीं कर पाया. आया हूं तो एक अटेंप्ट देकर जाऊं.

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