हुक्का बार पर कानून बनाने से गृह विभाग ने पल्ला झाड़ा, मंत्री बोले, कार्रवाई कर रहे…मगर नीति बनाना हमारा काम नहीं, वहीं अंबिकापुर ननि ने हुक्का बार किया प्रतिबंधित

याज्ञवल्क्य मिश्रा

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रायपुर,12 नवंबर 2019। हुक्का बार के मसले पर बीते विधानसभा सत्र में सत्तापक्ष के बिलासपुर विधायक शैलेष पांडेय ने सवाल किया था
“हुक्का बार और लॉंज खुल गए हैं..इसके लिए अनुमति कौन दे रहा है.. इसके लिए क्या नियम शर्तें हैं..ये हुक्का बार में युवा पीढ़ी खुद को नशे में झोंक रही है..सरकार इस पर नियम बनाए मेरा आग्रह है..और कार्यवाही हो”
इस मसले पर सदन में क़रीब बीस मिनट तक चर्चा हुई थी, और फिर सूबे के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने तब कहा –
“हम इस मसले को लेकर गंभीर हैं, इस पर समिति बनाई जाएगी, जो हुक्का बार को लेकर नीति नियम तय करेगी..रह गई कार्यवाही की बात तो जब जब शिकायत मिलेगी पुलिस कार्यवाही करेगी”

अब जबकि नया सत्र शुरु होने वाला है, यह सवाल फिर सामने आ गया है। सवाल है
“हुक्का बार को लेकर क्या नीति बनी है और कितनी कार्यवाही हुई है”
अब इस सवाल का दूसरे हिस्से का तो जवाब मौजुद है लेकिन पहले प्रश्न का जवाब नदारद है। दरअसल हुक्का बार को लेकर नीति नियम कौन सा विभाग बनाएगा इसे लेकर ही सवाल अब तक अनसुलझा है।

सूबे के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने NPG से कहा
“देखिये हमारे पास शिकायतें आईं और हमने कार्यवाही की है, रह गया इसके लिए नियम नीति बनाने का मसला.. तो वह हमारे विभाग का मसला नहीं है”
अब इस मसले पर क़ानून कौन बनाएगा, इसे लेकर सवाल मुँह बाएँ है। फ़िलहाल पुलिस जो कार्यवाही प्रदेश भर के हुक्का बार पर कर रही है, वो धारा है कोटपा एक्ट। कोटपा एक्ट में निम्नलिखित धाराओं पर कार्यवाही का प्रावधान है-
“धारा-4 में किसी भी सार्वजनिक स्थल में बीड़ी, सिगरेट, हुक्का तथा सिगार पीने पर प्रतिबंध तथा उल्लंघना करने पर जुर्माना, धारा-5 में किसी भी तंबाकू उत्पाद का विज्ञापन दुकान, टीवी, अखबार, रेडियों तथा इंटरनेट और तंबाकू उत्पादों का प्रचार करने पर जुर्माने व कैद का प्रावधान, धारा-6ए के मुताबिक नाबालिग को तंबाकू उत्पाद बेचने या उससे बिकवाने पर प्रतिबंध व दुकानों पर चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य उल्लंघना करने पर जुर्माना, धारा-6बी में किसी भी शिक्षण संस्थान की बाहरी सीमा के 100 वर्ग गज के दायरे के भीतर तंबाकू उत्पाद बेचने पर प्रतिबंध उल्लंघना करने पर जुर्माना, धारा-7 में किसी भी तंबाकू उत्पाद को उसके दोनों मुख्य भागों के 85 प्रतिशत हिस्से में बिना चेतावनी खुली सिगरेट बेचने पर प्रतिबंध उल्लंघना करने पर जुर्माने व कैद “
इस धारा के तहत कार्यवाही किए जाने पर दो सौ रुपए के आसपास का जुर्माना होता है, और हुक्का बार फिर खुल जाते हैं या कि यूँ कहिए वे चलते ही रहते हैं।

इस मसले को लेकर परेशानी है ना केवल सामाजिक बल्कि क़ानूनी भी। रायपुर SSP आरिफ़ शेख़ ने NPG से कहा –
“यह हुक्का बार के लिए कठोर नियम की जरुरत है, आज जो हमारे पास प्रावधान हैं उन्हें उतना प्रभावी कतई नहीं माना जा सकता,हमने पत्र भी लिखा था कि सीधे बंद किया जाए”
इधर प्रदेश स्तर पर हुक्का बार को लेकर हालाँकि कोई नीति नियम तय नहीं हो पाई है। लेकिन अंबिकापुर नगर निगम ने निगम क्षेत्र में किसी भी हुक्का बार के खुलने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

अंबिकापुर निगम के मेयर डॉ अजय तिर्की ने NPG से कहा –
“निगम की MIC और फिर सामान्य सभा ने यह निर्णय लिया कि, निगम क्षेत्रों हुक्का बार या कि हुक्का लॉंज नहीं खुलेंगे, इसके लिए गुण दोष पर चर्चा हुई और इसके लिए कोटपा एक्ट अधिकारिता देता है कि प्रतिबंध लगाया जा सके, हमने लगा दिया, शहर के बच्चे बड़े शहरों में पढ़ने जाते हैं और यह हुक्का संस्कृति खतरनाक है क्योंकि प्रतिबंधित मादक नशीले तत्वों का उपयोग अमूमन होता है, इसलिए हमने सर्वसम्मति से रोक लगा दिया”
मसला अपनी जगह खड़ा है कि नीति नियम क्या हो, लेकिन इसके लिए अंबिकापुर नगर निगम नायाब उदाहरण बन कर सामने हैं जहां मौजुदा नियमों के आधार पर ही निगम क्षेत्र में हुक्का बार बैन कर दिए गए हैं।

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