मिड डे मिल सहित सरकारी विद्यालय के शिक्षक गैर शैक्षणिक कार्यो से होंगे मुक्त….. मानव संसाधन विभाग ने तैयार किया है प्रस्ताव… मोदी सरकार जल्द करने जा रही है ऐलान

नयी दिल्ली 6 नवंबर 2019। स्कूली शिक्षकों के लिए मोदी सरकार एक बड़ा फैसला लेने जा रही है। मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय ने हाल ही में नई शिक्षा नीति के लिए तैयार किए गए अपने अंतिम मसौदे में स्कूली शिक्षकों को पूरी तरह से अशैक्षणिक गतिविधियों से अलग कर देने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही मंत्रालय द्वारा यह उम्मीद भी जताई गई है कि इस कदम से स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में बड़े पैमाने पर सुधार होगा।

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वर्तमान समय में स्कूली शिक्षकों का सबसे ज्यादा फोकस बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार कराने और बच्चों को मील खिलाने पर रहता है। इसी के साथ सरकार द्वारा स्कूलों में पढ़ाने वाले इन शिक्षकों को चुनाव के दौरान वोटर लिस्ट तैयार करने और जनगणना करने जैसे कई कामों का भार भी सौंप दिए जाते हैं। इसका सीधा प्रभाव बच्चों की शिक्षा में देखने को मिलता है। ऐसे में यदि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के शिक्षकों को गैर शैक्षणिक गतिविधियों से दूर रखने का सुझाव को केंद्र द्वारा हरी झंडी मिल जाती है, तो शिक्षकों को इन सभी गैर शैक्षणिक कार्यों से राहत मिलेगी। साथ ही उनका सारा फोकस केवल बच्चों को पढ़ाने पर ही रहेगा। यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पहले से ही स्कूलों में शिक्षकों का आंकड़ा कम है।

बता दें कि  नीति आयोग ने भी  गैर शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त करने का सुझाव दिया था।  दिल्ली जैसे कुछ राज्यों ने इस पर गंभीरता दिखाई और शिक्षकों को बीएलओ जैसी जिम्मेदारी से अलग किया है बावजूद इसके ज्यादातर राज्यों में अभी भी शिक्षकों को चुनाव कार्यों से जोड़ रखा गया है। साथ ही उम्मीद जताई है कि इससे स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार भी दिखेगा। प्रस्तावित नई शिक्षा नीति तैयार करने वाली कमेटी ने अपनी प्रारंभिक मसौदे में शिक्षकों को मिड-डे-मील की जिम्मेदारी से अलग रखने का सुझाव दिया था। हालांकि मंत्रालय ने अब और सख्त होते हुए मिड डे मील के साथ ही सभी   गैर शैक्षणिक कार्यों से अलग रखने का सुझाव दिया है।

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