संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित दीपक तिवारी के लोक कलाकार पुत्र सूरज का निधन लोकगायिका माँ पूनम तिवारी ने गीत गाकर दी विदाई “चोला माटी के हे राम.. एकर का भरोसा चोला माटी के हे राम”

राजनांदगाँव,2 नवंबर 2019। संगीन नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित पिता और हबीब तनवीर के नाट्य संस्था में काम करने वाली लोकगायिका माँ का लोक कलाकार बेटा मरा तो बेटे की इच्छानुसार माँ ने उसकी गीत मंडली को बुलाया और जिस गीत पर प्रशंसा हासिल होती थी, वह गीत लोकगायिका माँ ने अपने बेटे को समर्पित कर दिया।यह गीत था –

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“चोला माटी के हे राम.. एकर का भरोसा.. चोला माटी के हे राम”

जीवन की क्षणभंगुरता को सटीक दर्शाने वाले इस गीत को हबीब तनवीर अपने नाटक में शामिल करते थे और इसे गाती थीं लोकगायिका और रंगकर्मी श्रीमती पूनम तिवारी। श्रीमती पूनम तिवारी के पति मशहूर रंगकर्मी दीपक तिवारी हैं। दीपक तिवारी हबीब तनवीर की कालजयी नाट्य कृति “चरणदास चोर” में मुख्य भुमिका निभाते थे। दीपक लंबे अरसे से पैरालाईज्ड हैं।

दीपक और पूनम तिवारी के बेटे थे सूरज तिवारी, लोकगीत नाटक की विरासत जो पिता और माँ के पास थी, उसे सूरज ने सम्हाला और राजनांदगाँव में रंग छत्तीसी के नाम से वह सांस्कृतिक संस्था चलाता था। यह संस्था लोकगीत और नाटकों का मंचन करती थी।हालिया दिनों में “चरणदास चोर” का सूरज ने फिर मंचन किया और पिता की जगह खुद मुख्य भुमिका निबाही।

तीस बरस के सूरज में लोकगीत और नाट्य परंपरा को लेकर गहरी आस्था थी और वह उसे भरपूर जी रहा था, बल्कि यह लिखना बेहतर होगा कि वह अपने माँ और पिता की परंपरा को ज़िंदा रखे हुए था। कुछ दिन पहले सूरज को हार्टअटैक आया था और उसका उपचार चल रहा था, उपचार के दौरान शनिवार सुबह क़रीब चार बजे उसने दम तोड़ दिया। लेकिन जाने के पहले उसने साथियों से और अपनी माँ से कहा था

“मोला कुछ होए जाही तो मोर विदाई गाजा बाजा अउ गीत गा के करबे.. “

जब कलाकार दंपत्ति के इकलौते बेटे का शव घर पहुँचा और अंतिम विदाई के लिए उसे तैयार किया जाने लगा तो प्रख्यात लोक कलाकार माँ ने वही गीत गाया जिस गीत को गाते हुए वे तालियों से देश विदेश के सभागारों को गुंजा देती थीं।

इकलौते बेटे का शव लकवाग्रस्त पिता सजा रहा था.. और बग़ल में माँ गा रही थी –

“चोला माटी के हे राम.. एकर का भरोसा..चोला माटी के हे राम”

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