5 IAS व पूर्व डीजीपी के खिलाफ FIR दर्ज… एयरबेस जांच मामले में पूर्व कलेक्टरों पर कसा शिकंजा…4 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी मामले में बड़ा एक्शन

भोपाल 1 दिसंबर 2019।उज्जैन के यश एयरवेज मामले में कई IAS मुश्किलों में घिर गये हैं। एयरबेस घोटाला मामले में 5 पूर्व कलेक्टर व एक पूर्व डीजीपी सहित आधा दर्जन से ज्यादा लोगों पर FIR दर्ज किया गया है। उज्जैन के यश एयरवेज मामले में लोकायुक्त के पूर्व डीजीपी अरुण गुर्टू सहित उज्जैन पूर्व कलेक्टर बी एम शर्मा सहित 5 कलेक्टरों के खिलाफ लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर दर्ज की गई है । आरोप है कि साल 2006 में नियमों को ताक पर रख तत्कालीन मुख्य सचिव राकेश साहनी की मदद से कैप्टन भरत टोंग्या एवं यशराज टोंग्या ने उज्जैन हवाई पट्टी हथिया ली थी। साल 2006 में नियमो को तक पर रख तत्कालीन मुख्य सचिव राकेश साहनी की मदद से कैप्टन भरत टोंग्या एवं यशराज टोंग्या ने उज्जैन हवाई पट्टी हथिया ली थी।यश एयरवेज की लीज की शर्तों में ATC का निर्माण,बाउंडरी वाल का निर्माण, हर वर्ष लीज रेंट तथा विमानों को रोज रात रुकने का किराया वसूलना ये उज्जैन कलेक्टर की जवाबदारी थी जो कि किसी ने भी पूरी नहीं की थी.

वाट्सएप पर अपडेट पाने के लिए कृपया क्लीक करे

बाद में पूर्व लोकायुक्त डीजीपी अरुण गुर्टू को चैयरमेन बनाकर उनके प्रभाव का उपयोग कर उज्जैन कलेक्टर बीएम शर्मा एवं पी डब्लू डी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पटेल एवं भोपाल में बैठे एविएशन के प्रमुख सचिव एवं पी डब्लू डी के प्रमुख सचिव से सांठगांठ कर 4 करोड़ रुपये हवाई पट्टी पर रख रखाव के नाम पर खर्च कर लिए जबकि इसकी जिम्मेदारी यश एयरवेज की थी। यश एयरवेज की लीज की शर्तों में ATC का निर्माण,बाउंडरी  वाल का निर्माण ,हर वर्ष लीज रेंट तथा विमानो को रोज रात रुकने का किराया वसूलना ये उज्जैन  कलेक्टर की जवाबदारी थी जो कि किसी ने भी पूरी नही की थी।

लोकायुक्त संगठन द्वारा लंबी जांच के बाद 2006 से 2019 के बीच कलेक्टर रहे  कलेक्टरों ,अरुण गुर्टू ,यश एअरवेज के सभी पदाधिकारियों ,PWD के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार एवं पद के दुरुपयोग मामले में एफ आई आर दर्ज कर ली है।उल्लेखनीय है कि जिस समय यह घोटाला हुआ उस समय पूर्व मुख्यमंत्री के पास एविएशन मंत्रालय था।कांग्रेस के हाथ अब एक और बीजेपी की दुखती रग हाथ आ गई है। आने वाले दिनों में यह कांड रंग लाएगा।

ये है पूरा मामला

मामला यह है कि 2006 में यश एयरवेज उज्जैन को सात साल के लिए उज्जैन एयरपट्टी लीज पर दी गई थी। एक लाख रुपए साल की लीज पर दी गई एयर पट्टी की लीज 2013 में समाप्त हो गई थी। बावजूद इसके आज 2019 तक यह कंपनी कब्जा जमाए बैठी है। बीच में इस कंपनी ने नाम बदलकर दूसरी कंपनी को लीज ट्रांसफर भी करवा दी, जबकि यश एयरवेज की लीज और लाइसेंस दोनों निरस्त हो गई थी।
दुर्घटना में फंसे थे यशपाल
2012 में हाईटेंशन लाइन में घुस जाने से एक प्लेन क्रैश हो गया था, जिसमें दो जानें भी चली गईं थीं। इस मामले की जांच में यशपाल टोंग्या दोषी पाए गए थे। यशपाल चीफ फ्लाइंग इंस्पेक्टर थे, उनकी अनुपस्थिति में यह दुर्घटना हुई थी। वे उस समय दिल्ली में थे। चीफ फ्लाइंग इंस्पेक्टर के नाते यशपाल टोंग्या की अनुपस्थिति एक बड़ा अपराध है। नियम यह है कि चीफ फ्लाइंग इंस्पेक्टर की अनुपस्थिति में कोई फ्लाइट की उड़ान नहीं हो सकती। जांच में डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन ने यश एयरवेज का लाइसेंस निरस्त कर दिया था।
पिक्चर में दूसरी कंपनी कैसे आई
दूसरी ओर सरकार की शह पर यश एयरवेज ने सेंटार एविएशन नामक दूसरी कंपनी को लीज ट्रांसफर कर दी। सरकार में बैठे आकाओं ने भी लीज परिवर्तन करने में कोई संकोच नहीं किया। जबकि लाइसेंस निरस्त करने के बाद ऐसा किया जाना गैरकानूनी था। यह कंपनी अरुण गुर्टू जो कि लोकायुक्त के पूर्व डीजीपी थे, के नाम पर है। 2014-15 से एयरपट्टी का रखरखाव बंद कर दिया गया। हवाई पट्टी पूरी तरह खराब हो गई। कंपनी से दुरुस्त करवाने के बजाय शिवराज सरकार ने तीन करोड़ रुपए लगाकर हवाई पट्टी दुरुस्त की। शिवराज सरकार ने हवाई पट्टी कब्जे में नहीं ली उल्टे गैरकानूनी तरीके से काबिज कंपनी को हवाई पट्टी का संचालन करने दिया गया। 2014 में शिकायत होने पर लोकायुक्त ने प्राथमिकी दर्ज की जिसमें अरुण गुर्टू, एसआर शिवरमन, बीएस शर्मा घेरे में आए। शिवराज सिंह, इकबाल सिंह बैस भी आरोपी बनाए जाने थे। बड़ों-बड़ों के नाम आने पर शिवराज सरकार के दौरान मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान लगा कि सरकार सत्ता में लौटने वाली नहीं है तो उज्जैन लोकायुक्त एसपी गर्ग ने मामले को खात्मे में भेज दिया। इस बात की जानकारी जब लोकायुक्त को मिली तो पुन: मामला खोला गया, जांच शुरू की गई। अब जब प्रवीण कक्कड़ के यहां आयकर छापा पड़ा तो ताबड़तोड़ जांच में तेजी लाई गई है, सूत्रों की माने तो कुछ ही दिनों में इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
कब्जा क्यों नहीं लिया
राज्य सरकार के विमानन मंत्री के नाते शिवराज सिंह, विमानन सचिव इकबाल सिंह बैस को तुरंत हवाई पट्टी का कब्जा लेना चाहिए था, मगर ऐसा नहीं किया गया। यही नहीं उसकी लीज एवं लाइसेंस जारी रखा गया। यश एयरवेज ने अनुबंध एवं शर्तों को धता बताकर हवाई पट्टी की न तो बाउंड्रीवाल बनाई, न ही हवाई पट्टी का बराबर रखरखाव किया। शर्त के अनुसार न ही एयर ट्राफिक कंट्रोल (एटीसी) का सिस्टम विकसित किया। इस वजह से वर्षों से चल रही एयर पट्टी को एयरपोर्ट में बदलने, विकसित करने का काम भी नहीं हो सका। यह अब भी अधूरा है।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.