DSP समेत सात पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज, तीन सस्पेंड, पुलिस हिरासत में हत्या का मामला

चंचल यादव
हापुड़, 19 अक्टूबर 2019। हिरासत में सिक्यूरिटी गार्ड की मौत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की नोटिस के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने एक डीएसपी समेत सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज कर लिया है। वहीं तीन पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
अधिकारियों ने NPG को बताया कि गुरुवार रात को मृतक प्रदीप तोमर के भाई कुलदीप तोमर की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई। करीब डेढ़ महीने पहले 35 वर्षीय प्रदीप को एक महिला की हत्या के मामले में पूछताछ के लिए हापुड़ के पिलखुवा इलाके में छिजारसी पुलिस थाने में हिरासत में लिया गया था। जिसकी रविवार रात कस्टडी में मौत हो गई. आरोप है कि पुलिस ने उसका थर्ड डिग्री टॉर्चर किया. इसके बाद ग्रामीणों ने गांव से लेकर मेरठ तक हंगामा किया।

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प्रदीप का 10 साल के बेटा भी पिता के साथ पुलिस चौकी बताया था जिसने दावा किया कि उसके पिता को पूछताछ के दौरान बुरी तरह टॉर्चर किया गया था। बच्चे ने बताया, ‘कम से कम 8 से 10 पुलिसवाले मेरे पिता को लगातार पीट रहे थे। वे उन्हें पेचकस से गोद रहे थे। इस दौरान पुलिसवाले शराब भी पी रहे थे और दर्द से कराहते मेरे पिता को पानी देने से इनकार कर रहे थे।’ प्रदीप की हालत बिगड़ने पर पुलिसकर्मी उन्हें हापुड़ के लोकल अस्पताल में ले गए और इसके बाद मेरठ के अस्पताल में रिफर किया जहां यातनाओं के चलते उन्होंने दम तोड़ दिया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में टॉर्चर की पुष्टि

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी थर्ड डिग्री टॉर्चर की पुष्टि हुई है। हापुड़ के एसपी यशवीर सिंह का कहना है, ‘रिपोर्ट में हत्या की वजह स्पष्ट नहीं है। आगे की जांच के लिए विसरा सैंपल ले लिया गया है। मृतक के कूल्हे और बांहे काली पड़ गई थीं जबकि पूरे शरीर में नीले निशान थे।’

मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य के पुलिस प्रमुख और मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया और मामले पर उनकी रिपोर्ट मांगी। 16 अक्टूबर को बयान जारी कर आयोग ने कहा, “ मीडिया रिपोर्टों की सामग्री के आधार पर आयोग ने देखा है कि यह पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति के मानवाधिकारों के उल्लंघन का शानदार उदाहरण है, जिसके लिए राज्य की पुलिस बल पर जवाबदेही निहित है।“
एनएचआरसी ने डीजीपी ओपी सिंह को राज्य पुलिस द्वारा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए की गई कार्रवाई और भविष्य में इस तरह की घटना को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करने का निर्देश दिया।
आयोग ने यूपी सरकार के मुख्य सचिव को भी नोटिस जारी किया है और कहा है कि पीड़ित परिवार को उचित सुरक्षा मुहैया कराई जाए. मृतक का एक 11 साल का लड़का है जो इस घटना से आहत है, उसका भी ख्याल रखने की बात कही गई है.

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