CM हाउस में धूम-धाम से मनाया गया पोरा-तीजा तिहार, मुख्यमंत्री सपरिवार भगवान शिव और नंदी-बैल की पूजा की…

रायपुर 30 अगस्त 2019। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज अपने निवास में आयोजित पोरा-तीजा तिहार में धर्मपत्नी मुक्तेश्वरी बघेल के साथ भगवान शिव और नदीश्वर की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख और सृमद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खेती-किसानी और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रतीक पोला तिहार की प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ धन-धान्य से भरपूर रहे और हमारे पशुधन हमारी तरक्की में सहाय बने रहें।

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हरेली के बाद छत्तीसगढ़ के पारम्परिक त्यौहारों ‘पोरा-तीजा‘ को व्यापक स्तर पर मनाने के लिए मुख्यमंत्री के रायपुर स्थित निवास में विशेष इंतजाम किए गए। छत्तीसगढ़ की परम्परा और रीति-रिवाज के अनुसार साज-सज्जा की गई। कर्मा, सुआ, राउत नाचा और पंथी के नर्तक दलों की मनोरम प्रस्तुति ने तिहार में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा बिखेर दी। झमाझम बारिश के बीच नर्तक दलों ने मोहक प्रस्तुतियां दी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने सभी का उत्साहवर्धन करते हुए पोरा-तीजा की शुभकामनाएं दी। बैल का मुखौटा लगाए बच्चे इस अवसर पर विशेष आकर्षण का केन्द्र रहे।

अनुसूचित जाति एवं आदिमजाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह, खाद्य एवं संस्कृृति मंत्री अमरजीत भगत, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया, राज्यसभा सांसद छाया वर्मा, विधायक कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय, संगीता सिन्हा, पूर्व महापौर डॉ. किरणमयी नायक सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थी।

पोरा-तीजा तिहार में रंग-बिरंगे परिधानों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में महिलाएं यहां पहंुची थी। मुख्यमंत्री निवास में तीज मनाने आयी महिलाओं के लिए श्रृंगार की व्यवस्था भी गई थी। महिलाओं के लिए मेंहदी, आलता लगाने के साथ ही रंग-बिरंगी चूड़ियों की व्यवस्था भी थी। महिलाओं ने इस अवसर पर आयोजित जलेबी दौड़, मटकी डांस, कबड्डी सहित अनेक खेलों में बड़े ही उत्साह से हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका ममता चन्द्राकर ने साज-श्रृंगार के साथ अरपा-पैरी की धार के साथ ही अनेक लोक गीतों की सुमधुर प्रस्तुति दी। राज्यसभा सांसद छाया वर्मा, विधायक संगीता सिन्हा, पूर्व महापौर डॉ. किरणमयी नायक सहित उपस्थित महिलाओं ने भी नृत्य में भाग लिया। पोरा-तीजा तिहार के अवसर पर भगवान शिव और नंदी-बैल की पूजा की गई। तीजा महोत्सव के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों से बहनों को यहां आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर बहनों द्वारा करूभात खाने की रस्म पूरी की गई।

 

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