600 गाड़ियों के काफिले, 20 हजार कार्यकर्ताओं के जत्थे के साथ सड़क मार्ग से भूपेश सरकार 13 को दिल्ली कूच करेगी, दिल्ली में भारत सरकार के खिलाफ किसी राज्य सरकार का सबसे बड़ा प्रदर्शन होगा

रायपुर, 5 नवंबर 2019। धान के समर्थन मूल्य पर भारत सरकार के इंकार के बाद छत्तीसगढ़ सरकार 15 नवंबर को दिल्ली में मार्च करने जा रही है। इसके लिए युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है। मार्च में हिस्सा लेने 600 गाड़ियों में 20 हजार कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता 13 नवंबर को दिल्ली रवाना होंगे। भारत सरकार के खिलाफ दिल्ली में किसी राज्य सरकार का अब तक यह सबसे बड़ा प्रदर्शन होगा। एक बार अजीत जोगी सरकार ने भी धान के समर्थन मूल्य को लेकर दिल्ली में गिरफ्तारी दी थी। लेकिन, उसमें सिर्फ सीएम अजीत जोगी और उनके मंत्री एवं कुछ विधायक शामिल थे।

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ज्ञातव्य है, धान के उपार्जन में केंद्र सरकार की सीधी “ना” के जवाब में कांग्रेस ने “चलो दिल्ली” का नारा दिया है। सीएम भूपेश बघेल इस आंदोलन को लीड करेंगे। कांग्रेस इस दिल्ली मार्च को सफल नहीं बल्कि सफलतम बनाने की पुरज़ोर क़वायद में जुट गई है।

जो ठान लिया फिर वो करना है वाली तासीर के सीएम भूपेश बघेल ने दरअसल दिल्ली मार्च का फ़ैसला यूँ ही नहीं लिया है। यदि केंद्र सरकार नहीं मानेगी, और सेंट्रल पुल में सूबे का धान शामिल नहीं किया तो प्रदेश में धान का स्टॉक सवाल ही नहीं मसला बन जाएगा। तीस हज़ार मीट्रिक टन धान का आखिर किया क्या जाएगा। और इसलिए दिल्ली मार्च का फ़ैसला लिया गया।
प्रस्तावित दिल्ली मार्च का कार्यक्रम तेरह नवंबर का है, याने तेरह नवंबर को क़ाफ़िला दिल्ली के लिए कूच करेगा। इस क़ाफ़िले की कमान सम्हालेंगें कांग्रेस से संगठन प्रभारी पी एल पुनिया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम और खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल।

इस यात्रा में शामिल होने के लिए कांग्रेस ने जो संसाधन की व्यवस्था की है वो दिलचस्प है। घोषित तौर पर जो व्यवस्था है वह यह है कि जिन्हें चलना है वे अपने साधन खुद तय करें याने वाहन भी डीज़ल भी। कांग्रेस संगठन टेंट पंडाल और राशन लेकर चलेगा। 13 नवंबर से शुरु हुआ सफर 15 नवंबर को दिल्ली में ख़त्म होगा, और इस बीच खाने पीने की व्यवस्था तंबू गाड़ कर की जाएगी। आप कह सकते हैं कि तीन दिन के इस सफ़र में नदी किनारों पर कई पंडाल लगेंगे जहां भोजन पानी और क्षणिक आराम की व्यवस्था होगी।

रायपुर से दिल्ली की दूरी सड़क से तय करेगा लेकिन रास्ता कौन सा होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। यह रास्ता महाराष्ट्र या मध्यप्रदेश से होकर तय किया जा सकता है।

इस पूरे आयोजन के लिए जो सबसे अहम क़वायद है वो है पीएम मोदी के नाम पत्रों का संकलन। प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी शैलेष नितिन त्रिवेदी बताते हैं –
“हमने कंट्रोल रुम बनाया है, यह कंट्रोल रुम ज़िला प्रभारियों, ज़िला अध्यक्षों से लेकर ब्लॉक अध्यक्षों और महामंत्रियो से निरंतर संपर्क में है, और उनसे रोज़ाना अपडेट लिए जा रहे हैं, संगठन के साथ साथ कांग्रेस के सभी विधायक भी किसानों तक पहुँच कर विषय की गंभीरता बताते हुए किसानों से पत्र लिखवा रहे हैं”

यह दिलचस्प संयोग है कि प्रदेश बनने के बाद पहली बार बनी कांग्रेस सरकार जिसका नेतृत्व अजित जोगी कर रहे थे, वह धान मुद्दे पर दिल्ली में धरने पर बैठ गई थी, और जैसा कि मीडिया रिकॉर्ड में है..
“छत्तीसगढ़ की सरकार दिल्ली पुलिस की हिरासत में थी”
एक बार फिर जबकि कांग्रेस की प्रदेश सरकार में वापसी हुई है, धान के मसले पर कांग्रेस ने “दिल्ली मार्च” की क़वायद की है। हालाँकि अबकि बार क़वायद प्रदेश व्यापी है।

प्रदेश कांग्रेस महामंत्री गिरीश देवांगन कार्यक्रम की क़वायद को लेकर कहते हैं –
“कम से कम प्रति विधानसभा दस हज़ार पत्रों का लक्ष्य है, कुछ घटे भी तो यह मामला छ लाख पत्रो से कम का नहीं होगा, इस मार्च में किसानों की सीधी सहभागिता होगी,प्रति विधानसभा एक वाहन यह न्यूनतम आँकड़ा है, हमारे पास रोज़ फ़ोन आ रहे हैं और लोग जाने को स्वस्फुर्त तैयार हैं.. कम से कम 600 वाहन और क़रीब बीस हज़ार लोग इस मार्च में शामिल रहेंगे ही”

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