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मौत से पहिले हथनी ने लिखी मानव के नाम मार्मिक पत्र, पढ़कर आप भी हिल जाएंगे

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रायपुर, 16 जून 2019। सारंगढ़ में कल एक मादा हाथी ने दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान पता चला कि भीख मंगवाने के लिए महावत ने हथनी की आंखें फोड़ दी थी। इस घटना से दुखित रायपुर के पर्यावरण एवं वन्यजीव प्रेमी नीतिन सिंघवी ने मानव के नाम हथनी का मार्मिक पत्र लिखा है। इसे हू-ब-हू प्रकाशित किया जा रहा है।

हे मानव,
अंतिम समय पर और अंतिम सांसे लेते हुए यह चिट्ठी लिख रहा हूं और मरने पर मुझे खुशी भी हो रही है.

मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं और बचपन से ही बंधक रहने के बाद भी मुझे मानव के साथ रहने में अच्छा लगता था परंतु एक दिन मैंने देखा कि मेरे ही मालिक मेरी आंख फोड़ रहे हैं. सोचा समझा तो पाया की मेरी ताकत और नाराजगी कभी मानव को खतरा ना पहुंच दे, मुझे दिखे नहीं इसलिए मेरी आंख फोड़ दी गई.

उसके बाद अंधा होने के बाद भी अत्याचार सहन करता रहा और मानव की सेवा करता रहा.

अलग अलग समय पर मुझे अलग-अलग जगह शादियों में, त्योहारों में ले जाता रहा. मेरा मालिक मुझे अलग अलग महावत को किराए पर देता रहा. अंधा होने के कारण मैं गिनती नहीं कर सकता पर मेरे मालिक के पास मेरे जैसे 8 भाइयों के होने का अनुमान है, जिनमें से तीन की आंखें तो पक्का फोड़ दी गई है.

हाल ही में एक माह पहले उत्तर प्रदेश से मुझे छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ में लाया गया. मेरे महावत ने कई जगह शादियों में मुझे खड़ा करने के लिए हजारों रुपए एडवांस लिए परंतु मेरी सेहत का ध्यान नहीं रखा. मुझे प्रताड़ित करने के लिए भूखा रखा जाता रहा पानी नहीं पिलाया जाता था. मेरा इलाज भी नहीं करवाया गया, इसका असर यह हुआ कि मेरी दोनों किडनी खराब हो गई, मेरे पांव में बहुत बड़ा घाव हो गया, दर्द से तड़पते हुए अंततः एक दिन सारंगढ़ की सड़क पर मैं गिर गया. सारंगढ़ की जनता मुझे बहुत ही संवेदनशील लगी सभी लोगों ने मुझको पानी दिया.

छत्तीसगढ़ की राजधानी के एक गिरीश नाम के पत्रकार जो सारंगढ़ क्षेत्र के ही रहने वाले हैं उन्हें भी पता लगा कुछ वन्यजीव प्रेमियों को भी पता लगा और उन्होंने तत्काल मेरे इलाज की व्यवस्था की. छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने भी मेरा ध्यान रखा और एक जड़िया नाम के डॉक्टर को मेरे इलाज के लिए भी भेजा. डॉक्टर ने मुझे ठीक करने का बहुत प्रयास किया. मुझे क्रेन से उठाया गया और अस्पताल में रखा गया परंतु मेरी दोनों किडनी खराब हो गई थी. पहली बार मुझे 72 घंटे बाद पेशाब हुई उसके बाद 62 घंटे बाद. मेरी बीमारी के दौरान मेरा ही महावत वन विभाग पर दबाव देता रहा कि मुझे छोड़ दें क्योंकि मुझे शादियों में खड़ा रहना है परंतु वन विभाग में उसकी नहीं मानी.

अब मैं खुशी खुशी मर रहा हूं. खुशी इसलिए है कि अब मानव मुझे और प्रताड़ित नहीं कर पाएगा.

वैसे मैं आपको बता दूं कि भारत सरकार ने हम जैसे बंधक हाथियों के लिए नियम बना रखे हैं कि बिना अनुमति के और बिना स्वास्थ्य जांच के हमें दूसरे प्रदेश में नहीं ले जाया जा सकता परंतु मुझ जैसे कई हाथियों को दिवाली के समय दूसरे प्रदेशों में अपने घरों के सामने खड़ा करने के लिए, पैसा कमाने के लिए लाया जाता है.

आपके कुछ भाई लोग मेरे कुछ भाइयों को दिवाली पर रायपुर भी बुलाते है जहां बहुत पैसा है. मेरे भाइयों के महावतओं को हजारों रुपए रात भर दिवाली के दिन धनी लोगों के घर के सामने खड़ा रखने के लिए इनाम मिलता है. समय पर रायपुर पहुंचने के लिए मेरे भाइयों को 60 से 80 किलोमीटर तक दिन में चलाया जाता है प्रताड़ना के डर से मेरे भाई लोग चलते भी है.

मानव आप दावा करते हैं कि आप को सर्वश्रेष्ठ बुद्धि प्राप्त है. परंतु मैं आपको बता दूं की मेरे उत्तर प्रदेश के भाई उतने भाग्यशाली नहीं है जितने केरल के. वहां पर भी मेरे भाइयों के साथ बहुत अत्याचार होता है परंतु कई बार धूप में घंटों खड़े रखने के कारण, भूखा रखे जाने के कारण, प्यासा रखे जाने के कारण मेरे भाई नाराज हो जाते हैं और उनसे उनकी ताकत की वजह से, अनजाने में महावत और अन्य लोगों की मौत हो जाती है. इसलिए सावधानी बतौर उत्तर प्रदेश मे बहुत सारे मेरे भाइयों की आंखें इसलिए फोड़ दी गई है कि हम लोग मानव के नियंत्रण में रहे.
आप और आपका परिवार सुखी रहे.