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बड़ी खबर : बैलाडीला की भड़की आग नगरनार पहुंची….. लोहा खरीदने आए कोरिया की टीम को आंदोलनकारियों ने घेरा, दिल्ली से लेकर रायपुर तक हड़कंप

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आंदोलन में माओवादियों का हाथ तो नहीं, सरकार द्वारा सारी मांगे मान लिए जाने के बाद भी आंदोलन का कर दिया विस्तार, बचेली माइंस भी किया ठप

जगदलपुर/रायपुर, 2019। बैलाडीला के डिपोजिट 13 में भड़की आग अब नगरनार पहुंची गई है। आंदोलनकारियों ने कल कोरिया से नगरनार स्टील प्लांट का लोहा का सौदा करने आए मल्टीनेशनल कंपनी पास्को के अफसरों को घेर लिया। बताते हैं, कोरिया की छह सदस्यीय टीम को घेरने की खबर जैसे ही मिली दिल्ली, हैदराबाद से रायपुर तक हड़कंप मच गई। जगदलपुर कलेक्टर अय्याज तंबोली तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद कोरियन टीम को बचा कर ले गई।
कोरिया का पास्को लोहा क्षेत्र का जाना माना ग्रुप है। इंडिया में महाराष्ट्र में उसका प्लांट है। उसके लिए पास्को को दीगर देशों से लोहा आयात करना पड़ता है। एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट निर्माण का काम लगभग पूरे होने वाले हैं। पास्को कंपनी ने नगरनार के प्रोडक्शन के लिए एमओयू करने से पहिले प्लांट को देखने के लिए अपने छह सीनियर एक्जीक्यूटिव को नगरनार भेजा था। कोरियन टीम जैसे ही नगरनार पहुंची ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया। बताते हैं, कोरियन टीम ने इस घटना की जानकारी दिल्ली स्थित कोरियन एंबेसी को भी दे दी है। उधर, जगदलपुर कलेक्टर अय्याज तंबोली को जैसे ही इसकी खबर मिली, मामले की संवेदनशीलता को समझते वे तुरंत मौके पर पहुंच गए। उन्होंने लोकल विधायक समेत ग्रामीणों को समझा-बूझा कर वापिस भेजा।
उधर, बैलाडीला के आंदोलनकारियों ने किरंदुल के बाद कल से एनएमडीसी के बचेली माइंस को भी माइनिंग ठप कर दिया। जबकि, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को सुनने के बाद उनकी सारी मांगें मान ली थी। सीएम ने पेड़ कटाई रोकने के साथ ही ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव की जांच का आदेश दिया था। सीएम का निर्देश मिलते ही दंतेवाड़ा कलेक्टर टीपी वर्मा ने 10 मिनट के भीतर दंतेवाड़ा एसडीएम के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर दी। लेकिन, बस्तर सांसद जब सरकार के फैसले की जानकारी देकर आंदोलन खतम कराने किरंदुल पहुंचे तो आंदोलनकारियों ने लिखित में सरकार का आदेश मांगकर रोडा लगा दिया। यहीं नहीं, एसडीएम से तीन दिन के भीतर ग्राम सभा के प्रस्ताव की जांच कराने की मांग कर रहे। जब तक जांच नहीं होगी, वे किरंदुल और बचेली गेट से नही हटने का ऐलान कर दिया।
किरंदुल के बाद बचेली माइंस को भी ठप कर देने से एनएमडीसी के प्रोडक्शन का ग्राफ एकदम नीचे आ गया है। जाहिर है, एनएमडीसी के पूरे प्रोडक्शन का 70 प्रतिशत से अधिक उत्पादन दंतेवा़ड़ा से होता है। दोनों माइंस से एनएमडीसी और रेलवे को प्रतिदिन 60 करोड़ रुपए की आमदनी होती है। एस्सार को भी हर रोज तीन करोड़ का नुकसान हो रहा। राज्य सरकार को भी एनएमडीसी से साल में करीब 12 सौ करोड़ की रायल्टी मिलती है। सीएसआर मद में एनएमडीसी बस्तर क्षेत्र के विकास पर करीब ढाई सौ करोड़ खर्च करता है सो अलग है।
बस्तर में तैनात रहे पुलिस अधिकारी बताते हैं, डिपोजिट 13 जिस जगह पर है, वह बेहद संवेदनशील एरिया है। उसके पूर्व में दंतेवाड़ा, पश्चिम में बीजापुर और दक्षिण में सुकमा है। याने देश के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित इन तीनों जिलों का जंक्शन है डिपोजिट 13। वहां खनन प्रारंभ हो जाने से जाहिर है, नक्सलियों का मूवमेंट प्रभावित होगा। यही नहीं, उनकी कनेक्टिविटी भी खतम हो जाएगी। अभी एक जिले में अपराध करके वे दूसरे जिले में शिफ्थ हो जाते है। डिपोजिट 13 नक्सलियों के लिए दिक्कत का सबब बन सकता है। बस्तर के कुछ जानकार इस पर भी सवाल उठा रहे हैं कि आंदोलन करने पहुंचे लोगों में अधिकांश नक्सल प्रभावित इलाके के लोग क्यों हैं। क्या नंदीराज को मानने वाले सिर्फ नक्सल प्रभावित इलाके के लोग हैं….बड़ा प्रश्न है।
ज्ञातव्य है, एनएमडीसी और राज्य सरकार की स्टेट माईनिंग डेवलपमेंट कारपोरेशन का ज्वाइंट वेंचर एनसीएल ने बैलाडीला के डिपोजिट 13 में खुदाई का कार्य अदानी ग्रुप को दिया था। जिसका वहां के आदिवाससी विरोध कर रहे हैं। हालांकि, दंतेवाड़ा और चित्रकोट में विधानसभा के उपचुनाव को देखते इसमें राजनीतिक रोटियां भी सेंकने की कोशिशें भी हो रही हैं। हालांकि, ये आग से खेलने वाला काम है। वैसे भी बस्तर को कुछ अलगाववादी लोग आदिवास अस्मिता के नाम पर बस्तर के फीजा में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। जशपुर में पत्थलगढ़ी और बस्तर में अलगावादी आंदोलन एक साथ शुरू हुए थे। बस्तर में तो अलगाववादी नेताओं ने सरकारी आदेश को मानने से साफ तौर पर इंकार करने का प्रस्ताव पारित कर दिया था। प्रस्ताव में साफ तौर पर कहा गया था कि जब तक ग्राम सभा अनुमति न दें, तब तक सरकारी आदेश को प्रभावशील न होने दे। बस्तर के बारे में जानने वालों को इसकी जानकारी है कि वहां क्या चल रहा है।
बैलाडीला आंदोलन में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। वहां के सांसद दीपक बैज अपने साथ तीन विधायकों को लेकर रायपुर आए। यहां सीएम के सामने प्रेजेंटेशन देकर आंदोलनकारियों का पूरा प़क्ष रखा। मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी मांगों को मान भी लिया, उसके बाद अब आंदोलनकारी अब समझने के लिए तैयार नहीं है।
कुल मिलाकर इससे छत्तीसगढ़ की छबि खराब होगी। राज्य के उद्योग मंत्री कवासी लकमा अफसरों की टीम लेकर इंवेस्टमेंट की तलाश में कनाडा गए हैं। और, अदानी की बात को अलग है, यहां सरकारी क्षेत्र की कंपनी एनएमडीसी को प्रोडक्शन लोगों ने एक हफ्ते से रोक दिया है।