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पौल्यूशन बोर्ड ने प्लास्टिक पूर्णतः बंद बताकर NGT को किया गुमराह, CS से दिलवा दिया गलत जवाब?

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रायपुर, 17 मई 2019। सरकारी अधिकारी जो करें वो कम है। अबकी बार जो किया है वह पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने किया है, जिसके कारण मुख्य सचिव परेशानी में आ सकते है। वो भी तक जब NGT बार-बार चेतावनी दे रहा है कि वो राज्यों पर पर्यावरण क्षति की पेनाल्टी लगा सकती है। हाल ही में देश की 323 नदियों के 351 प्रदूषित भागों के सुधार के लिये समय पर प्लान प्रस्तुत नहीं करने के कारण असम, मणीपुर, उत्तरप्रदेश, दिल्ली इत्यादि राज्यों पर 20 करोड़ से अधिक की पेनाल्टी NGT ने लगाई है और राज्यों से कहा गया है कि वो चाहें तो दोषी अधिकारियों से राशि वसूल कर सकते है।

दरअसल देश मंे सालिड़ वेस्ट मैनेजमंेट, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमंेट बायो वेस्ट मैनेजमंेट के नियमों पर क्रियान्वयन की स्थिति जानने के लिए NGT प्रिसिंपल बेंच, दिल्ली पूरे देश के मुख्य सचिवांे को एक एक कर बुला रही है। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव सुनील कुमार कुजूर को 30 अप्रैल को सुना गया उनके साथ विशेष सचिव, आवास सुश्री संगीता पी., पर्यावरण तथा पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव आर.पी.तिवारी और सुडा के ए.सी.ई.ओ.  सौमिल रंजन चैबे भी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने NGT को बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने 27 सितम्बर 2017 से प्लास्टिक कैरी बैग, अल्प आयु PVC और क्लोरोनेटेड प्लास्टिक से बनी विज्ञापन सामग्री, बैनर, प्लैक्स, होर्डिंग, फोम्स इत्यादि और प्लास्टिक से बने कैटरिंग मेटरियल जैसे कप, प्लेट, चम्मच, बाउल के निर्माण, बिक्री, आयात, परिवहन, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है।

जबकि छत्तीसगढ़ में ही पर्यावरण संरक्षण मंडल ने प्लास्टिक से बने कैटरिंग मटेरियल की रायपुर मंे 3 तथा दुर्ग में 2 युटिनों को निर्माण की अनुमति दे रखी है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में 20 से 25 युनिट को 50 माइक्रोन के कैरीबैग निर्माण के अनुमति दी गई है। अनुमानतः रायपुर में ही प्रतिमाह 250 टन, 50 माइक्रोन वाले प्लास्टिक कैरीबेग का निर्माण होता है। गुजरात के हलोल से 4-5 माइक्रोन वाले 500 टन प्लास्टिक कैरी बैग का अवैध आयात प्रतिमाह होता है। छत्तीसगढ़ में समभवः दूसरे प्रदेशों से 2000 टन 50 से कम माइक्रोन वाले प्लास्टिक कैरीबेग का आयात प्रतिमाह होता है।

रायपुर के पर्यावरण प्रेमी नीतिन सिंघवी ने एनजीटी द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए गठित स्टेट लेवल कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस धीरेंद्र मिश्रा को भी प्लास्टिक निर्मित कैटरिंग मटेरियल के निर्माण पर प्रतिबंध के बाद भी निर्माण किए जाने पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

उधर, एनपीजी ने कई प्लास्टिक कैरिबेग निर्माताओं के साथ ही प्लास्टिक निर्माता एसोसियेशन के पदाधिकारियों से बात की। सभी ने स्वीकार किया प्लास्टिक के प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि NGT को मुख्य सचिव के माध्यम से अपूर्ण जानकारी दी गई, जानकारी यह दी जाना चाहिये थी कि छत्तीसगढ़ मंे प्लास्टिक कैरी बैग और कैटरिंग मटेरियल पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद इसका निर्माण, भंडारण, आयात, परिवहन और उपयोग टनों में हो रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में प्लास्टिक कैरी बैग के मामले में रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा दायर की गई जनहित याचिका में छत्तीसगढ़ शासन के सचिव, आवास एवं पर्यावरण, प्रदेश के सभी कलेक्टर और पर्यावरण संरक्षण मंडल के 5 क्षेत्रीय अधिकारियों की तरफ से छत्तीसगढ हाईकोर्ट के दौरान बताया गया कि छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक कैरी बैग और अल्प आयु PVC और क्लोरोनेटेड प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध है। तब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आदेशित किया था कि यह सुनिश्चित किया जावे कि प्रतिबंध का पूर्ण पालन किया जावे। कोर्ट ने आदेशित किया था कि प्रतिबंध की अधिसूचना का उल्लंघन होने पर अनिवार्यः कानून के अनुसार कार्यवाही की जावे।

प्लास्टिक निर्मित कैटरिंग मटेरियल और कैरी बैग पर प्रतिबंध के लिये संघर्षरत नितिन सिंघवी ने न्यू पावर गेम से बातचीत में बताया कि NGT के एक आदेश उपरांत छत्तीसगढ़ में प्रतिबंध की अधिसूचना जारी करना अनिवार्य हो गया था, इसलिये सितम्बर 2017 में प्लास्टिक कैरी बैग, प्लास्टिक निर्मित कैटरिंग मटेरियल, अल्प आयु PVC से बने विज्ञापन मटेरियल जैसे प्लैक्स, होर्डिंग, बैनर पर प्रतिबंध लगाया गया। इसके बावजूद भी प्रतिबंध का पालन नहीं किया जाना माननीय उच्च न्यायालय तथा NGT के आदेशों की अवमानना है। उन्होने बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में विज्ञापन के बैनर, प्लैक्स पिं्रट किये जाते है जो कि अल्प आयु PVC क्लोरेनेटेड प्लास्टिक से बने होते है इसकी जांच करने के लिये सिविल सोसायटी के सदस्यों के समक्ष सेंपल लेकर C-PET से जांच करवाई जा सकती है।

सिंघवी ने न्यू पावर गेम को बताया कि प्रतिबंध पर क्रियान्वयन हेतु वे 2017 से सभी अधिकारियों को पत्र लिख रहे है, हाल ही में उन्होंने मुख्य सचिव और विशेष सचिव, आवास एवं पर्यावरण को पत्र लिखकर बताया है कि विगत 2 वर्षों में प्लास्टिक कैरीबैग और प्लास्टिक से बने कैटरिंग मटेरियल पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद उन्के निर्माण की अनुमति देने के कारण छत्त्तीसगढ़ में हुये पर्यावरण, नदियों इत्यादि को हुई क्षति के लिये छत्तीसगढ़ राज्य पर करोड़ों की पेनाल्टी लगा सकती है।