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“राफेल” से सिर्फ मोदी नहीं छत्तीसगढ़ के इस गांव के लोग भी परेशान……जब पहली बार सुर्खियों में आई राफेल डील तो सहम गए थे इस गांव के लोग, जानिये वजह

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नई दिल्ली 15 अप्रैल 2019। राफेल पर घमासान अब भी जारी है। राफेल लड़ाकू विमान को लेकर कांग्रेस लगातार पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी सरकार पर हमलावर है। राफेल लड़ाकू विमान सौदा  केवल केंद्र सरकार के लिए ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़  के एक गांव के लिए भी परेशानी का सबब बन गया है। इस सौदे के विवादों में घिरे होने के कारण छत्तीसगढ़ को मजाक बनना पड़ रहा है। दरअसल छत्तीसगढ़ के महासमुंद निर्वाचन छेत्र में एक छोटा सा गांव है, जिसका नाम ‘राफेल’ है। महासमुंद से करीब 135 किलोमीटर दूर  है ये ‘राफेल’ गांव है। इन दिनों इस गांव का राफेल नाम ही लोगों के लिए समस्या बन गया है।

चुनाव प्रचार खत्म हो रहा है लेकिन कमाल की बात ये है कि दूर-दराज बसे होने के कारण इस गांव की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है. लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में राफेल गांव से भी वोट डाले जाएंगे, लेकिन गांव वालों का कहना है कि अब तक ना तो कांग्रेस और ना ही बीजेपी से कोई यहां चुनाव प्रचार के लिए नहीं आया है।

गांव में रहने वाले 83 वर्षीय धर्म सिंह ने ‘पीटीआई भाषा’ को फोन पर कहा, ‘‘अन्य गांवों के लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं। वे कहते हैं कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो हमारी जांच होगी। हम गांव का नाम बदलने का अनुरोध लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय भी गए थे लेकिन हम उनसे मिल नहीं सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘राफेल विवाद के कारण यह नाम केवल नकारात्मक ध्यान आकर्षित करता है, लेकिन हमारे गांव की कोई परवाह नहीं करता। राज्य के बाहर तो अधिकतर लोगों को गांव के बारे में पता भी नहीं है।’

’ सिंह ने बताया कि गांव में पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी जरूरतें भी नहीं हैं। खेती बारिश पर आधारित है क्योंकि यहां सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है। सिंह को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि गांव का नाम राफेल क्यों रखा गया और इसका क्या अर्थ है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता, लेकिन गांव का दशकों से यह नाम है। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन से भी पहले यह नाम है। मुझे इस नाम के पीछे का तर्क नहीं पता।’’