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ब्रिगेडियर प्रदीप का PM मोदी पर बड़ा हमला, बोले- सेना के कंधो पर बंदूक रखकर चला रहें हैं राजनीति की गोली, क्या PM मोदी अपनी तुलना मसूद अजहर से करना चाह रहे है?

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रायपुर 15 अप्रैल 2019। कांग्रेस के स्टार प्रचारक ब्रिगेडियर प्रदीप यदु चुनाव प्रचार के लिए राजधानी रायपुर पहुंचे हुए थे। यहां पर इन्होंने कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में पत्रकार वार्ता को संबोधित भी किया। ब्रिगेडियर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी सेना को आगे रखकर सेना के कंधो से बंदूक चलाते है।

प्रधानमंत्री मोदी अपनी सभाओं में बार बार कहते हैं कि मैनें दुश्मनों को उनके घर के अंदर घुस के मारा है आपको अच्छा लगा कि नहीं लगा? ये प्रश्न मोदी बार बार जनताओं से पूछते है। यहीं प्रश्न अब पाकिस्तान में मसूद अजहर पूछ रहा हैं कि मैंने पुलवामा में भारत के 40 सैनिकों को मारा आपकों अच्छा लगा कि नहीं लगा? मैं पूछना चाहूंगा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी अपनी तुलना मसूद अजहर से करना चाह रहे है? जब 8 फरवरी को सीआरपीएफ ने वार्निंग जारी की थी कि सुरक्षा बलों के उपर आईडी से हमला हो सकता हैं तो इसे केंद्र सरकार ने नजर अंदाज क्यों किया?

ब्रिगेडियर ने राजनांथ सिंह और अमित शाह पर भी हमला करते हुये कहा कि…राजनांथ सिंह और अमित शाह छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से पूछ रहे है कि भीमा मंडावी के मौत की जांच सीएम भूपेश ने करवाई। मुख्यमंत्री ने भीमा मंडावी मामले में फौरन जांच करवाई है।

ब्रिगेडियर प्रदीप यदु ने फिर से पुलवामा का जिक्र करते हुये कहा कि हम पुलवामा से बालाकोट में स्ट्र्ाइक करवाई है। भारतीय सेना ने विषम परिस्थितियों में काम किया जो गर्व की बात है। मोदी जी पुलवामा के शहीदों के खून पर वोट की राजनीति कर रहे है। किसानों की समस्या, रोजगार, महिलाओं को लेकर रेप जैसी घटनाओ पर रोक नहीं लगायी जा रही है। घटनाएं दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है।

प्रदीप यदु ने कहा कि पुलवामा हमले को लेकर सवाल पूछने पर अगर देशद्रोही हैं तो प्रधानमंत्री सबसे बड़े देश द्रोही है। जो पाकिस्तान के बिना बुलावें के मेहमान नवाजी की। अब तो पाकिस्तान भी चाहने लगा हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जी फिर से सत्ता में आये। इन्होंने कहा कि बीजेपी के शासनकाल हजारों सीआरपीएफ के जवान शहीद हुये है। जितने जवान अभी मारे गये है वो पहले नहीं मारे जाते थे।

नोटबंदी से नक्सलवाद खत्म होगा कहा था, लेकिन नोटबंदी से अबतक के न तो नक्सलवाद खत्म हुआ और न तो आतंकवाद। लोकतंत्र का अंतिम हथियार देश की सेना होती है। अभी देश की स्थिती बहुत नाजुक है और ऐसा ही चला तो 15 सालों में समस्या और बढ़ जाएगी।