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क्रमोन्नति की मांगी गई जानकारी को लेकर शुरू हुआ श्रेय लेने का खेल …. इधर आदेश जारी करने वाले DEO ही नहीं बता पा रहे कि शिक्षाकर्मियों को कैसे मिलेगा इसका लाभ… क्या जवाब मिला DEO से आप भी पढ़िये

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रायपुर 25 मार्च 2019। शिक्षा विभाग अजब है और उनके कारनामे गजब है । यूं तो शिक्षा विभाग अपने कई प्रकार के आदेशों के लिए पहले ही सवालों के कटघरे में खड़ा हो चुका है और एक बार फिर ऐसा ही कुछ हो रहा है । देर शाम शिक्षाकर्मियों के व्हाट्सएप ग्रुप में एक आदेश वायरल होता है और उस आदेश के वायरल होते ही शिक्षाकर्मियों के बीच में खुशी और संगठनों में श्रेय लेने का खेल शुरू हो जाता है । छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय शिक्षक संघ जहां इसे अपने कल के कार्यक्रम की जीत बताने में जुट गया है वहीं अन्य संघ भी इसे अपनी सफलता बताने में लगे हुए हैं और श्रेय लेने की हड़बड़ी इतनी अधिक है कि कोई भी संगठन इस बात को भी नहीं जानना चाहते कि वास्तव में इसका लाभ मिलेगा भी कि नहीं ।

यह सवाल हम इसलिए खड़े कर रहे हैं क्योंकि इस आदेश को लेकर जब न्यूपावरगेम ने आदेश जारी करने वाले सूरजपुर के जिला शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश से सीधे बात की तो उनका जवाब आश्चर्यचकित कर देने वाला था उन्हें खुद यह नहीं पता है कि प्रदेश के शिक्षाकर्मियों को इसका लाभ मिलेगा भी कि नहीं, जी हां, उनका स्वयं कहना है कि हमने भले ही आदेश जारी कर दिया है लेकिन शिक्षाकर्मियों को इसका लाभ मिलेगा या नहीं यह हम नहीं बता सकते जब आदेश जारी करने वाले जिला शिक्षा अधिकारी को इस विषय में नहीं पता है तो फिर आप सोच सकते हैं कि कितनी गंभीरता के साथ यह आदेश जारी किया गया है और इसका क्या दूरगामी लाभ होगा ।

*आखिर क्यों खड़े हो रहे हैं क्रमोन्नति मिलने के मसले को लेकर सवाल*

दरअसल प्रदेश में शिक्षाकर्मी 1998 से कार्यरत हैं और क्रमोन्नति उन्हीं शिक्षकों को दी जाती है जिन्हें पदोन्नति न दिया गया हो…. प्रदेश में शिक्षाकर्मियों को समय पर पदोन्नति नहीं मिल पाई है इसलिए क्रमोन्नति के हकदार शिक्षाकर्मियों की संख्या काफी है खास तौर पर क्रमोन्नति का लाभ प्रदेश के शिक्षाकर्मी वर्ग 1 को मुख्य तौर पर मिलनी है क्योंकि उन्हें प्राचार्य पद पर नियुक्ति मिली ही नहीं है साथ ही 1998-99 में नियुक्ति पाने वाले वर्ग 1 के शिक्षाकर्मियों को तो दो-दो क्रमोन्नति मिली है यही कारण है कि वह शिक्षाकर्मी नेता जो 1998 से नियुक्त है अन्य मुद्दों को छोड़कर क्रमोन्नति अभियान के पीछे लगे हुए हैं और उनका विशेष जोर क्रमोन्नति हासिल करने में लगा हुआ है साथ ही 2009 तक नियुक्त हुए शिक्षाकर्मियों को भी एक क्रमोन्नति हासिल हो जाएगी लेकिन यह सब तभी होगा जब शासन शिक्षाकर्मियों के पूर्व की सेवा अवधि को गणना कर लाभ देने को तैयार हो जाए और सबसे बड़ा पेच भी यही है क्योंकि यदि शासन शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नति का लाभ देती है तो वह स्वाभाविक रूप से पुरानी पेंशन, पुरानी सेवा की ग्रेजुएटी और अर्जित अवकाश नकदीकरण के लिए भी दावा कर सकते हैं और सरकार को हर हाल में उन्हें यह देना ही होगा…… सरकार की शिक्षा विभाग में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को यह बात भलीभांति पता है और यही कारण है कि अभी तक इस संबंध में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है इधर गोल गोल जारी हो रहे आदेश से शिक्षाकर्मियों में उम्मीदें तो जग रही है लेकिन अधिकारियों से बात करने पर अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि वास्तव में शिक्षाकर्मियों की पुरानी सेवा की गणना होकर क्या यह लाभ शिक्षाकर्मियों को मिलना भी है कि नहीं और यही वजह है कि जहां अनेक संघ श्रेय लेने की होड़ में लगे हुए हैं वहीं आम शिक्षाकर्मी इस बात को लेकर टकटकी लगाए हुए हैं कि क्या उन्हें लाभ मिलेगा भी या नहीं या फिर से एक बार यह पुराने क्रमोन्नति वेतनमान लाभ की तरह ही एक छलावा साबित होगा ।

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सवाल – सर, आज एक आदेश आया है, क्रमोन्नति-समयमान को लेकर, कुछ बता पायेंगे क्या उसके बारे….

जवाब – क्या जानना चाहते हैं उसके बारे में 

सवाल – ये आदेश किन-किन शिक्षकों पर लागू, मतबल क्या इसमें पूर्व की सेवा गणना भी होगी…

जवाब – आप शिक्षाकर्मियों के बारे में पूछ रहे हैं क्या…जो एलबी शिक्षक बने हैं….देखिये ऐसा है, अभी हम इस मामले में थोड़ा डिपली जानकारी नहीं ले पाये हैं…जानकारी लेकर ही बता पायेंगे…

सवाल – सर लेकिन आदेश जारी हो गया है….आदेश वायरल हो रहे हैं.,..तो इसका मतलब क्या निकालें… आपका वर्जन क्या ले सकते हैं इसमें हम 

जवाब – देखिये, अभी हम कुछ नहीं बता पायेंगे, थोड़ा जानकारी लेकर ही बता पायेंगे .. थोड़ा हम देख लें कि क्या है इसमें फिर बताते हैं