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नई शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन कल होगा जारी….संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मी ठोकेंगे नई भर्ती के खिलाफ ताल …….सरकार से न्याय न मिलने पर न्यायालय की लेंगे शरण

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रायपुर 24 मार्च 2019। सरकार से संविलियन की आस लगाए बैठे शिक्षाकर्मियों को दोहरा झटका लगा है एक तो संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मियों का प्रदेश की सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन का सपना पूरा नहीं किया वहीं दूसरी तरफ सरकार अब 15,000 नियमित शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है और इसके लिए शासन स्तर पर पूरी तैयारी हो चुकी है । इस भर्ती के संपन्न होते ही प्रदेश के शिक्षाकर्मी जो लंबे समय से शासन को अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं और 8 वर्ष के बंधन के चलते जिनका स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन नहीं हो पाया है वह सभी इन नई भर्ती वाले शिक्षकों के जूनियर हो जाएंगे क्योंकि राजपत्र के अनुसार नवनियुक्त शिक्षक, शिक्षक (एलबी) की वरिष्ठता सूची के नीचे स्थान ग्रहण करेंगे यानी संविलियन से वंचित शिक्षकों से पहले स्कूल शिक्षा विभाग में इनका प्रवेश हो जाएगा और यह कई वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षाकर्मियों से सीनियर हो जाएंगे साथ ही जहां प्रदेश के शिक्षा कर्मियों को 12 से 16 हजार रुपये के बीच वेतन मिलता है वही नवनियुक्त शिक्षकों को 30 हजार से 38000 रुपये के बीच का वेतन प्राप्त होगा जबकि उनके पास भी वह तमाम अहर्ताए हैं जो नई भर्तियों के लिए अनिवार्य किए गए हैं । संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मी राज्य सरकार से इस विषय में कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन सरकार ने पैसे की कमी बताकर उनके संविलियन से पल्ला झाड़ लिया और अब सरकार नई भर्ती करने जा रही है हालांकि इस बात पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह है कि यदि शिक्षाकर्मियों के संविलियन के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है तो फिर इन नवनियुक्त होने वाले शिक्षकों को वेतन कहां और किस मद से दिया जाएगा और क्या यह पूर्व से सेवा दे रहे शिक्षाकर्मियों के साथ अन्याय नहीं है जिन्हें सरकार ने अपने घोषणा पत्र में संविलियन का सपना दिखाया था । इधर शिक्षाकर्मी भी अपने स्तर पर लगातार प्रयास में लगे हुए हैं , नेताओं से कई दौर की मुलाकात के बाद अब शिक्षाकर्मी नई भर्ती के खिलाफ न्यायालय जाने की तैयारी में है और इसके लिए वह व्यापमं की वेबसाइट पर नोटिफिकेशन आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि इसे आधार बनाकर वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकें और नई भर्ती पर स्टे लगवा सकें ।

संविलियन की मांग को लेकर सबसे अधिक मुखर रहने वाले शिक्षाकर्मी नेता विवेक दुबे का कहना है कि

“प्रदेश के वे तमाम शिक्षाकर्मी जो संविलियन से वंचित रह गए हैं वह एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं प्रदेश के जिन शिक्षाकर्मियों का संविलियन हो चुका है उन्हें जहां नियमित वेतनमान के साथ अन्य सुविधाएं मिल रही है वहीं पंचायत में रह गए शिक्षाकर्मियों को कई महीनों तक वेतन नहीं मिल पाता है और उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है , होली जैसे बड़े त्यौहार में भी कई जिलों में संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मियों को वेतन नहीं मिल पाया इससे दुर्भाग्यजनक स्थिति कुछ और नहीं हो सकता कि शिक्षाकर्मियों को कई महीनों से बिना वेतन के गुजारा करना पड़ रहा है इधर नई भर्ती होते ही शिक्षाकर्मियों की और क्या दुर्दशा होगी इसको आसानी से समझा जा सकता है . हमें उम्मीद थी कि सरकार हम सबका संविलियन करेगी और इसके लिए हमने अपने स्तर पर पुरजोर प्रयास भी किया लेकिन वर्तमान में कोई भी सार्थक परिणाम सामने आता नहीं दिखाई दे रहा है वहीं अब प्रदेश में नई शिक्षकों की भर्ती भी होने जा रही है . हमारा स्पष्ट मानना है कि प्रदेश में पूर्व से सेवा दे रहे शिक्षाकर्मियों का पहले स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन होना चाहिए और उसके बाद ही नई भर्ती होना चाहिए । हम नई भर्ती के कहीं से भी खिलाफ नहीं है लेकिन अपने हितों के साथ समझौता किसी भी प्रकार से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके लिए नोटिफिकेशन जारी होते ही न्यायालय का भी शरण लिया जाएगा । हमारी शासन से अभी भी गुहार है कि शिक्षाकर्मियों के अधिकारों का अतिक्रमण न हो इसकी व्यवस्था करते हुए पहले उनका संविलियन किया जाए और उसके बाद ही नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए