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“भगत सिंह का भारत” संवाद में शामिल हुए उर्मिलेश और आलोचक सियाराम शर्मा….उर्मिलेश बोले- जिस उम्र में युवा करियर बनाने की फिक्र करते हैं, उस उम्र में भगत सिंह के पास युवा भारत की परिकल्पना थी…. सियाराम शर्मा ने कहा….

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रायपुर 23 मार्च 2019।….”हमें अगर भगत सिंह से मोहब्बत करनी है तो….उनकी फोटो व मूर्ति से नहीं भगत सिंह के लिखे एक-एक शब्द से करनी चाहिये”…ये बातें वरीष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने कही। उर्मिलेश आज राजधानी के प्रेस क्लब में “भगत सिंह का भारत” विषय पर संवाद में शामिल होने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में आलोचक सियाराम शर्मा सहित कई गणमान्य वक्ता मौजूद थे। अपने संबोधन में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने भगत सिंह की जीवटता, सोच और परिकल्पना को सामने रखा। इस दौरान उन्होंने भगत सिंह के नाम पर राजनीति करने वाले दलों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जो धर्म के नाम पर राजनीति कर रहे है, ऐसा नहीं होना चाहिए। धर्म और राजनीति दोनों अलग अलग है। भगत सिंह 21 साल की उम्र में ही भारत को युवाओं का भारत बनाने की सोच रखते थे… जिस उम्र में युवा अपने करियर के बारे में सोचते हैं उस उम्र में भगत सिंह ने नये भारत की कल्पना की सोची थी। भगत सिंह ने बहुत ही कम उम्र में ही कई सारी किताबे पढ़ी…लेख भी लिखे।  उनकी एक-एक लेख पर पीएचडी भी की जा सकती है।

इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर मैं जवाहरलाल नेहरू की प्रसंसा भी करता हूँ तो इनकी आलोचना भी करता हूँ। उर्मिलेश ने कहा कि जो लोग आज जवाहरलाल नेहरू के अच्छे कार्यों के आलोचक है वो या तो इतिहास नहीं जानते, या तो वो इतिहास से अछूते है।  इस दौरान वरिष्ठ पत्र उर्मिलेश ने मौजूद लोगों के सवालों का जवाब भी दिया।

वहीं प्रसिद्ध आलोचक सियाराम शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भगत सिंह ने नए भारत की कल्पना की लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि  भगत सिंह ने अपने वक्तव्यों में कहा था कि एक श्रमिक श्रम करके जो पारिश्रमिक कमाता है उसे लूट लिया जाता है, एक किसान जो अन्न उगता है उसको उसका प्रतिफल नहीं मिल पाता है….भगत सिंह उस समय नए भारत की कल्पना में लड़ाई लड़ी, जब देश गुलाम था। लेकिन आज पिछले 30 वर्षों में लाखों किसानों ने आत्महत्या की !… कहाँ गया भगत सिंह के सपनो का भारत? आज इतना विकास का डंका पीटा जाता हैं तो फिर क्यों मजदूरों को और किसानों को एक हक नहीं मिलता।

उन्होंने सरकार की नीति पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि किसानों को आज किसने इस परिस्थिति में डाला है। आज भी मैं जब भगत सिंह के विचारों को पढ़ता हूँ तो मुझे लगता है कि मैं कैसे ऐसा व्यक्तित्व वाला बनूंगा। उस दौर में एक 23 साल के नौजवान के पास आजादी का पूरा खाका तैयार था। इन्होंने आजादी का शब्द स्पष्ट कर दिया था….उनका ये कतई इरादा नहीं था कि ठगोरो को भगाकर, कालों का साम्राज्य” स्थापित कर दिया जाये। बल्कि किसान, श्रमिकों को उनका हक दिलाना था। भगत सिंह ने गांधी जी की भी आलोचना की थी और कांग्रेस की भी।