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होली में तो वेतन दे दीजिये साहब!…..3 महीने से वेतन नहीं मिला शिक्षाकर्मियों को….त्योहार के इस मौसम में मातम मना रहे हैं ये गुरुजी….विवेक दुबे बोले- इन समस्याओं का संविलियन ही है एकमात्र उपाय

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रायपुर 19 मार्च 2019। आश्वासनों से घर का राशन नहीं आता साहब …और ना ही घर का चुल्हा जलता है ! पेट में भूख की आग सुलगी हो तो उसे शांत करने के लिए रोटी की दरकार होती है !….पर, ना जाने शिक्षाकर्मियों का ये दर्द सरकार को कब समझ आयेगा। सत्ता बदलकर कांग्रेस की किस्मत तो संवर गयी….लेकिन सूबे के हजारों शिक्षाकर्मियों की किस्मत जस की तस है। उसी जगह जहां सालों पहले खड़ी थी…..तब भी वेतन के लिए मोहताज थे और आज भी संविलियन के लिए इंतजार ही कर रहे हैं। नयी बानगी मगरलोड ब्लॉक नगर पंचायत की है। जहां के सैंकड़ों गुरुजी को 3 महीने से पगार नहीं मिला। अधिकारियों की दलील साफ है- “सरकार ने अलॉटमेंट नहीं भेजा है”….ऐसे में परसो मनाये जाने वाले होली त्यौहार की खुशियों में जब पूरे प्रदेश के कर्मचारी और संविलियन प्राप्त शिक्षा कर्मी डूबे हुए हैं …इस इलाके के शिक्षाकर्मी उधार के जुगाड़ में भटक रहे है।

धमतरी जिले के नगर पंचायत मगरलोड में कार्यरत शिक्षाकर्मियों को विगत 3 माह से वेतन नहीं मिला है जिन शिक्षकों को 3 माह से वेतन नहीं दिया गया है उनकी आर्थिक और मानसिक स्थिति क्या होगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है । आलम यह है कि अधिकांश शिक्षक मानसिक अवसाद से घिरते जा रहे हैं । जब वे अपने वेतन के लिए नगर पंचायत मगरलोड के अधिकारियों से मिलते हैं तो अधिकारी इन्हें आबंटन न होने की बात कहकर लौटा देते हैं यही नहीं साथ ही उन्हें डांट डपट भी लगा देते हैं कि क्या बार-बार वेतन के लिए पूछने आ जाते हो यानी स्थिति यह है शिक्षक यदि अपने वेतन की भी बात कर रहा है तो वह भी अधिकारियों को नागवार गुजर रही है ।

जिन शिक्षाकर्मियों का संविलियन हो गया है उन्हें तो माह खत्म होने से पहले ही वेतन मिल जाता है लेकिन प्रदेश के वह शिक्षाकर्मी जो संविलियन से वंचित रह गए उन की दुर्दशा पहले से भी और ज्यादा हो गई है क्योंकि अब उनका सुध लेने वाला और कोई नहीं है । संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मी सरकार से अपने संविलियन की आस लगाए बैठे थे लेकिन जब बजट सदन में प्रस्तुत हुआ तो उनके लिए कोई घोषणा नहीं हुई तो शिक्षाकर्मियों में गहरी नाराजगी के साथ साथ निराशा इस कदर छा गई मानो उनका विश्वास ही सरकार पर से उठ गया हो और ऐसा उनके सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के पेज पर किए गए कमेंट से भी पता चलता है ।

दरअसल शिक्षाकर्मियों का वर्ष बंधन एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सरकार से तत्कालिक निर्णय की उम्मीद थी क्योंकि यदि यह सरकार इस पर कोई निर्णय नहीं लेती है तो भी शिक्षाकर्मी पूर्व सरकार के निर्णय के चलते 8 वर्ष की सेवा पूर्ण करते ही संविलियन की सौगात पाते जाएंगे ऐसे में उन्होंने सरकार पर जो भरोसा दिखाया था उसका उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा है और उन्हें इसी बात को लेकर नाराजगी है उनका कहना है कि इसी वर्ष बंधन के चलते हमने पिछली सरकार से नाराज होकर उसे उखाड़ फेंका था और यदि यह बंधन यथावत रहता है तो फिर इसका मतलब ही क्या है 8 साल की सेवा पूर्ण होने पर तो ऐसे भी सभी शिक्षाकर्मियों का संविलियन होना ही है।

संविलियन ही है समस्या का एकमात्र निदान- विवेक दुबे

शिक्षाकर्मी संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी विवेक दुबे का कहना है कि संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मियों की ओर विभाग का ध्यान ही नहीं है यही वजह है कि नगर पंचायत मगरलोड के शिक्षक बीते 3 माह से वेतन की राह देखते हुए तिल तिल मरने को मजबूर है । जिन शिक्षकों को 3 माह से वेतन नहीं मिला होगा उनके और उनके परिवार की क्या स्थिति होगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है । जब तक शिक्षाकर्मियों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन नहीं होगा तब तक इस समस्या से शिक्षाकर्मियों को निजात नहीं मिल सकता यही वजह है कि हम बार-बार सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि वह अपने वादे को पूरा करते हुए शिक्षाकर्मियों के संविलियन की घोषणा करें। जिस विधानसभा सदन को मंदिर माना जाता है उसी में पूर्व मुख्यमंत्री जी ने 2 साल पहले घोषणा की थी कि शिक्षाकर्मियों को माह की 5 तारीख तक वेतन का भुगतान हो जाएगा जिसका पालन आज 2 साल बाद भी नहीं हो पाया है इससे समझा जा सकता है की आबंटन व्यवस्था कि प्रदेश में क्या स्थिति है । हमारी राज्य सरकार से अपील है कि इस मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल प्रभाव से आवंटन जारी करवाएं साथ ही प्रदेश के शिक्षाकर्मियों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन का नीतिगत निर्णय तत्काल लेकर इस समस्या से मुक्ति दिलाए तभी प्रदेश के शिक्षाकर्मियों के साथ न्याय हो सकेगा