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.तो क्या दिलीप कौशिक महासमुंद से कांग्रेस के प्रत्याशी हो सकते हैं ?… राहुल गांधी के सामने कांग्रेस में शामिल होते ही लगने लगी है अटकलें….कभी भूपेश बघेल के खिलाफ लड़ा था चुनाव

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रायपुर 15 मार्च 2019।।….तो क्या दिलीप कौशिक महासमुंद से कांग्रेस के प्रत्याशी हो सकते हैं ?…राहुल गांधी से दिलीप कौशिक की मुलाकात के बाद ये सवाल गरमा गया है। आज रायपुर एयरपोर्ट पर दिलीप कौशिक की राहुल गांधी से मुलाकात हुई। वैसे तो इस बात की अटकलें काफी दिनों से लग रही थी कि दिलीप कौशिक कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। लेकिन आज उन अटकलों पर विराम लग गया। दिलीप कौशिक लंबे राजनीतिक ब्रेक के बाद पिछले कुछ सालों से राजनीति में काफी सक्रिय हुए थे। दिलीप कौशिक 1993 में भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।

दिलीप कौशिक के अलावे और भी कई नेताओं ने आज राहुल गांधी के साथ मुलाकात कर कांग्रेस में प्रवेश किया। दिलीप कौशिक पूर्व केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम लाल कौशिक के बेटे हैं।  ढ़ाई दशक के बाद वो राजनीति में फिर से आये हैं…लिहाजा उनके कांग्रेस में शामिल होने को लेकर कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। पुरुषोत्तमलाल कौशिक का महासमुंद में व्यापक जनाधार रहा है, पिछले साल ही वो दिवंगत हुए थे, जिसके बाद दिलीप कौशिक ने फिर से राजनीति में कदम बढ़ाया है।

कौन थे पुरुषोत्तम लाल कौशिक

पुरुषोत्तमलाल कौशिक ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन में भी उनका अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था। कौशिक आपातकाल के दिनों में मीसा बंदी के रूप में जेल में रहे। कौशिक ने तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय मोरारजी भाई देसाई के मंत्रिमंडल में मार्च 1977 से जुलाई 1979 तक केन्द्रीय पर्यटन और नागरिक विमानन मंत्री और स्वर्गीय चौधरी चरणसिंह के मंत्रिमंडल में जुलाई 1979 से जनवरी 1980 तक केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में देश के विकास में सराहनीय योगदान दिया।कौशिक का जन्म 24 सितम्बर 1930 को महासमुंद में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1947 में रायपुर के सालेम स्कूल से मेट्रिक की परीक्षा पास की और वर्ष 1951 में सागर विश्वविद्यालय से बी.ए. तथा 1954 में नागपुर विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. की उपाधि प्राप्त करने के बाद वकालत शुरू की।वे 1972 से 1977 तक तत्कालीन मध्यप्रदेश विधानसभा में महासमुंद क्षेत्र से विधायक रहे। इसके बाद वर्ष 1977 में देश की छठवीं लोकसभा के लिए रायपुर से सांसद निर्वाचित हुए। वे वर्ष 1984-85 में नवमी लोकसभा के लिए दुर्ग से भी सांसद चुने गए थे। वह वर्ष 1984 और 1990 में रेल्वे कन्वेंशन कमेटी के अध्यक्ष, वर्ष 1984-85 में भारतीय रेल्वे मेंस यूनियन के अध्यक्ष और वर्ष 1990 में केन्द्रीय इस्पात और खान मंत्रालय की सलाहकार समिति के सदस्य रहे।