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NPG Breaking-हाईकोर्ट ने लगाई सहायक वन संरक्षक परीक्षा के अन्तिम निर्णय पर रोक

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बिलासपुर, 22 मार्च 2018। हाईकोर्ट ने पीएससी के सहायक वन संरक्षक और वन क्षेत्रपाल चयन एवं परीक्षा के अंतिम परिणाम पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब परीक्षा तो होगी मगर उसके नतीजे घोषित नहीं हो सकेंगे।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने छत्तीसगढ़ वन सेवा (संयुक्त) भर्ती परीक्षा 2014 के तहत् सहायक वन संरक्षक एवं वन क्षेत्रपाल के 59 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ता सुन्दर बड्डे एवं तुमेष कुमार कोषले सम्पूर्ण अर्हता रखते हुए ऑनलाईन आवेदन-पत्र भरने एवं जमा करने का प्रयास किया गया, परन्तु क्योंकि उन्होंने अपना 12वीं/ हायर सेकण्डरी स्कूल परीक्षा या समकक्ष परीक्षा, भौतिकी, रसायनषास्त्र एवं जीवविज्ञान में से किन्हीं एक विषय में न होकर कृषि विषय में होने से आवेदन-पत्र भरने में असमर्थ रहे। याचिकाकर्ता की शिकायत यह थी कि यद्यपि उन्होने भौतिकी, रसायनषास्त्र या जीवविज्ञान एक सम्पूर्ण विषेष विषय में नहीं पढ़ा है, परन्तु कृषि विषय में ही उन्होंने कृषि विज्ञान के तत्वों में भौतिकी, रसायन एवं जीवविज्ञान का अध्ययन किया है और कृषि विषय का अध्ययन स्पेशलाइजेशन/ प्राथमिक विषेष/ मुख्य विषय के रूप में किया गया है, इस तरह की भिन्नता और गलत अयोग्यता की षिकायत सचिव, वन विभाग एवं सचिव,छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में भी की, परन्तु कोई सुनवाई नहीं की गई।

इससे क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता सुन्दर बड्डे एवं तुमेश कुमार कोषले ने उच्च न्यायालय के समक्ष अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेन्द्र मेहेर के माध्यम से एक याचिका दायर की, जिसमें याचिकाकर्ता द्वारा छत्तीसगढ़ वन सेवा (संयुक्त) भर्ती परीक्षा 2017 के विज्ञापन की वैधानिक संगति एवं अधिकारिता को चुनौती देते हुए भर्ती नियम में विसंगति दूर करने या संशोधन करने का आग्रह किया था। उच्च न्यायालय ने को याचिकाकर्ता की याचिका की सुनवाई करते हुए शासन को आदेश दिया कि वे यह शपथपत्र प्रस्तुत करें कि क्या विज्ञान के तत्वों का अध्ययन, भौतिकी, रसायन एवं जीव विज्ञान के विषयों के अध्ययन के समतुल्य है कि नहीं। हाईकोर्ट के डबल बेंच ने छत्तीसगढ़ पीएससी को निर्देशित किया कि वे याचिकाकर्ती की मैनुअल आवेदन को स्वीकार कर उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल करें। साथ ही शासन को उचित निर्णय लेने एवं शपथपत्र प्रस्तुत करने कहा था। राज्य शासन द्वारा हाईकोर्ट के नोटिस के परिपालन में अपना जवाब प्रस्तुत करते हुए छ.ग. वन (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2015 के साथ-साथ 2014 के उपरोक्त परीक्षा नियम में संषोधन हेतु गठित समिति की बैठक एक फरवरी 2018 के अनुसार दो अनुशंसाएँ की गईं, एक तो यह, कि अनुसूची-3 के कॉलम-5 में विहित शैक्षिक अर्हता के बिन्दु (1) को विलोपित किया जाना चाहिए। और दूसरा यह, कि परिषिष्ट-2 पाठ्यक्रम के अन्तर्गत प्रष्नपत्र-दो में भाग-1 विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण के अन्तर्गत (1) रसायन विज्ञान (2) भौतिक विज्ञान (3) जीव विज्ञान (4) प्रौद्योगिकी (5) पर्यावरण के अतिरिक्त (6) कृषि विज्ञान (7) वानिकी विज्ञान भी सम्मिलित किया जाना चाहिए।

अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने हाईकेर्ट के समक्ष बताया कि कमेटी ने कक्षा 12वीं की अर्हता को विलोपित कर दिया है और वानिकी और कृषि विज्ञान को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने का निर्णय लिया है। इसलिए वानिकी और कृषि विज्ञान के पाठ्यक्रम को सम्मिलित किए बिना लोक सेवा आयोग द्वारा 25 मार्च को आयोजित होने जा रही परीक्षा पर रोक लगानी चाहिए एवं समिति के निर्णय के परिपालन पश्चात् ही परीक्षा आयोजित किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई जस्टिस मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव एवं जस्टिस शरद गुप्ता की युगलपीठ के समक्ष आज हुई, जिसमें यह न्यायनिर्णयन किया गया कि उत्तरवादीगण द्वारा 25 मार्च को आयोजित की जाने वाली सहायक वन संरक्षक एवं वन क्षेत्रपाल चयन एवं परीक्षा के परिणाम संबंघ में किसी प्रकार का अन्तिम निर्णय लेने पर रोक लगा दी।

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