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माफी मांगते रहे CBI के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव…… तब भी SC ने सुनाई सजा, कोर्ट के कोने में बिठाया….CJI बोले- दोषी हैं और हम 30 दिन तक जेल भी भेज सकते हैं

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नईदिल्ली 12 फरवरी 2019। सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी पाते हुए सजा सुनाई है। कोर्ट राव के माफीनामे से संतुष्ट नहीं हुआ और उन्हें सजा सुनाई। चीफ जस्टिस ने नागेश्वर राव पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया, इसके अलावा जब तक कोर्ट की कार्यवाही चलेगी तब तक नागेश्वर राव और दूसरे अधिकारी को कॉर्नर में बैठना होगा.कोर्ट ने अवमानना का आरोप लगाते हुए कहा कि कोर्ट उठने तक एक कोने में बैठे रहिए. इसके साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. इस मामले नागेश्वर राव को कानूनी सलाह देने वाले अधिकारी वासुरन को भी यही सज़ा मिली है.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम की जांच टीम में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा. अरुण शर्मा ही इस जांच टीम की अगुवाई करेंगे. नागेश्वर राव के अलावा एस. भसूरण पर भी एक लाख का जुर्माना लगाया गया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की सख्त टिप्पणियों के बाद अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि अगर आप नागेश्वर राव को कोई सजा सुनाते हैं, तो उनका करियर खराब हो सकता है. वह पिछले 32 साल से काम कर रहे हैं. सीजेआई ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप दोषी हैं और हम 30 दिन तक जेल भी भेज सकते हैं. लेकिन एटॉर्नी जनरल के बार बार आग्रह माफी देने का आग्रह किया, 30 साल का बेदाग और सम्मानित करियर रहा है. इसके बाद भी सीजेआई ने यह सजा सुनवाई.

CJI ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आप ऐसा कैसे सोच सकते हैं कि लीगल एडवाइस अप्रूवल के बाद मिला. DoPT ने इस ऑर्डर को दिया जो कि नागेश्वर राव के साइन के बाद ही तय हुआ था. चीफ जस्टिस ने कहा कि लीगल एडवाइस यही थी कि सुप्रीम कोर्ट को मामले की जानकारी दी जाए.सीजेआई ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप दोषी हैं और हम 30 दिन तक जेल भी भेज सकते हैं. लेकिन एटॉर्नी जनरल के बार बार आग्रह माफी देने का आग्रह किया, 30 साल का बेदाग और सम्मानित करियर रहा है. इसके बाद भी सीजेआई ने यह सजा सुनवाई.

चीफ जस्टिस ने कहा कि नागेश्वर राव ने कोर्ट की अवमानना की है. इस फैसले से नागेश्वर राव के करियर पर सीधे तौर पर असर पड़ेगा. अगर हम उनकी माफी को कबूल भी करते हैं और उन्हें सजा नहीं देते हैं, फिर भी उन्हें ये मानना ही होगा. CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि राव ने हमें सूचित करना भी सही नहीं समझा.

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हमें ट्रांसफर की सूचना कोर्ट को देने में दो हफ्ते की देरी हुई है, ये सभी गड़बड़ी लीगल एडवाइस की वजह से हुई थी. उन्होंने कहा कि हमारी नजर में लीगल एडवाइस का मतलब यही था कि जो करना है, वो करो. उन्होंने कहा कि हालांकि नागेश्वर राव ने एजेंसी को ट्रांसफर और रिलीव की पूरी जानकारी दी थी.

बता दें कि न्यायालय ने इसके पहले आदेश का उल्लंघन करने पर गत सात फरवरी को सीबीआई को फटकार लगाई थी और राव को 12 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष उपस्थित होने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले दो आदेशों का उल्लंघन किए जाने को गंभीरता से लिया और शर्मा का कोर्ट की पूर्व अनुमति के बगैर 17 जनवरी को सीआरपीएफ में तबादला किए जाने पर राव के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था.