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DU की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर को हत्या के केस में पुलिस क्लीन चीट देने की तैयारी में, लेकिन फैसला अदालत के हाथ में

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0 सरकार बदलते ही बदली बस्तर पुलिस, पहले मुकदमा दर्ज किया अब नाम हटाने के फेर में

याज्ञवल्क्य मिश्रा@newpowergame.com

सुकमा, रायपुर, 12 फ़रवरी 2019। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर और उनके सहयोगियों के विरुद्ध जिस बस्तर की पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया था, सरकार बदलते ही वह अब क्लीन चीट देने में जुट गई है। हालांकि, सुकमा पुलिस ने अभी नंदिनी सुंदर का नाम हटाने कोर्ट में प्रतिवेदन नहीं दिया है। लेकिन, सूत्र बताते हैं कि पुलिस ने नंदिनी का नाम हटाने के लिए होम वर्क कर लिया है। हालांकि, यह भी सही है कि नलिनी सुंदर को मुकदमे से बाहर करना सुकमा पुलिस के हाथ में नहीं है। यह अदालत तय करेगी। और, समाचार लिखे जाने तक सुकमा पुलिस ने अभी तक कोई प्रतिवेदन विशेष न्यायालय में नही दिया है, जिससे यह संकेत मिले कि पुलिस को नंदिनी सुंदर और उनके सहयोगियों के विरुद्ध घटना में संलिप्तता को प्रमाणित करने वाले साक्ष्य नही मिले हैं।
एसआइटी चीफ शलभ सिनहा ने भी इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोई क्लीन चीट नहीं दिया गया है। आपका प्रश्न अप्रासंगिक है। मामले की अभी विवेचना चल रही है।

नक्सल मसले पर सुलगते बस्तर में प्रोफेसर नंदिनी सुंदर की उपस्थिति और उनके हस्तक्षेप खासे चर्चित रहे हैं। नक्सलियो को आतंकी मानने वाला पक्ष नलिनी सुंदर और उनके सहयोगियों को नक्सलियो के प्रति संवेदनशील होने का आरोप लगाता रहा है, जबकि नंदिनी सुंदर और उनके सहयोगी ऐसे किसी आरोप को सिरे से ख़ारिज करते रहे हैं। नंदिनी सुंदर और उनके सहयोगी मीडिया के एक हिस्से में मानवाधिकार कार्यकर्ता और अध्ययन दल के रुप में प्रकाशित होते हैं। नंदिनी सुंदर और उनके सहयोगियों की बस्तर के अंदरूनी इलाक़ों में उपस्थिति होते रही है जिसे लेकर कतिपय मीडिया रिपोर्ट दावा करती है कि यह अध्ययन दल के रुप में उन इलाक़ों में पहुँचते रही हैं ।
दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नंदिनी सुंदर और उनके सहयोगियों के खिलाफ सुकमा जिले के तोंगपाल थाने में अपराध क्रमांक 5/16 दर्ज है जिसमें यह उल्लेखित है कि 4-5 नवंबर 2016 को ग्राम सौंतनार के आश्रित टोले नामा निवासी श्यामनाथ बघेल की सशस्त्र नक्सलियो ने हत्या कर दी। श्यामनाथ बघेल स्थानीय स्तर पर नक्सलियो के खिलाफ आत्मरक्षा दल बनाया था।घटना के दौरान नक्सलियो ने यह कहा कि दिल्ली से आए लोगो ने समझाया था कि यह सब दल मत बनाओ पर नही माने इसलिए हत्या की गई है ।
तोंगपाल पुलिस ने मामले में नक्सलियो के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया, और इसके साथ साथ नंदिनी सुंदर और उनके सहयोगियों को भी सह आरोपी के रुप में प्रकरण में उल्लेखित किया गया ।
पुलिस की विवेचना जिसमें गवाहों के बयान शामिल हैं उससे यह तथ्य आया कि नलिनी सुंदर अपने सहयोगियों के साथ उक्त गाँव में 12 से 17 मई के बीच गई थीं, और उन्होने कथित तौर पर ग्रामीणों को यह सलाह दी कि, वे पुलिस के पास ना जाया करें ।
पुलिस अभिलेख में नलिनी सुंदर और उनके सहयोगियों को पुलिस ने धारा 120 B के तहत इस प्रकरण में आरोपी बनाया है।
प्रकरण जैसे ही दर्ज हुआ, इस मसले पर तूफ़ान खड़ा हो गया कि, नंदिनी सुंदर समेत सहयोगियों पर अपराध दर्ज कर लिया गया। नंदिनी मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई और उन्हे तत्काल गिरफ़्तारी से राहत मिल गई, राज्य पुलिस को यह निर्देश मिले कि वो कार्यवाही के एक माह पूर्व नोटिस दे।
दिल्ली में मौजूद मानवाधिकार समूहऔर प्रदेश की राजधानी में सक्रिय मीडिया के एक वर्ग के निशाने पर एसआरपी कल्लूरी आ गए जो कि उस वक़्त बस्तर आईजी थे। मानवाधिकार समुहों ने एफआईआर को गलत और सीधे सीधे कल्लूरी के इशारे पर प्रायोजित बता दिया ।तत्कालीन राज्य सरकार के उस वक्त तक बेहद प्रिय रहे कल्लूरी के भी बयान इस मसले पर पूरी आक्रामकता से आए ।
बहरहाल विवादों के स्तर को देख मामला सीआईडी को सौंप दिया गया,15 नवंबर 2016 को केस सीआईडी को सौंपा गया और दो वर्ष तक यह मामला सीआईडी के पास विवेचनाधीन रहा ।
दिसंबर के पहले पखवाड़े इस मामले की जाँच के लिए SIT का गठन हुआ और गठन के सप्ताह भर से भी कम समय के भीतर डायरी सुकमा जिले में मौजुद SIT के पास आ गई।दो वर्षों में CID ने कुछ पूरक बयान लिए थे ।
SIT की टीम प्रभारी शलभ सिन्हा जो कि सुकमा एडिशनल एसपी है उनसे पूछा गया कि क्या नंदिनी सुंदर का बयान लिया गया है, उनकी ओर से जवाब में आए शब्द ध्यान खींचते हैं, शलभ सिन्हा ने कहा
“सुप्रीम कोर्ट के आदेश का परिपालन करते हुए टीम नंदिनी सुंदर के पास पहुँची थी और उनसे इस प्रकरण में उनका पक्ष लिया गया”
शलभ सिन्हा से हमने पूछा कि क्या नंदिनी सुंदर या उनके सहयोगियों के विरुद्ध पुलिस ने साक्ष्य नही पाया है और नाम हटा दिया है, एसआईटी चीफ शलभ ने कहा
“नही.. हमने अभी ऐसा कुछ नही किया है, आपका प्रश्न अप्रासंगिक है.. विवेचना जारी है”
बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर स्थित विशेष न्यायालय जो कि विधि विरुद्ध क्रियाकलापों के तहत पंजीबद्ध मामलों की सुनवाई करती है वहाँ पंक्तियो के लिखे जाने तक प्रकरण क्रमांक 05/16 में गठित विशेष अनुसंधान दल ने ऐसा कोई आवेदन नही दिया है जिसमें यह उल्लेखित हो कि प्रकरण में नंदिनी सुंदर एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कोई साक्ष्य नही मिला है जो कि अपराध में दर्शित धारा 120B का समर्थन कर दे ।
हालाँकि सूत्र कहते हैं कि पुलिस ऐसा आवेदन पेश करने जा रही है, लेकिन यहाँ यह जानकारी रखना जरुरी है कि, केवल पुलिस के लिख कर देने से न्यायालय संतुष्ट हो जाए ऐसा कतई जरुरी नही है। यह जरुरी है कि पुलिस के अन्वेषण से न्यायालय सहमत हो और मान ले कि पुलिस का आवेदन सभी बिंदुओं के समेकित समग्र जाँच के बाद ही इस तथ्य पर आया है कि प्रकरण में उल्लेखित धारा के तहत आरोपी बने व्यक्तियों के विरुद्ध प्रमाण नही मिल रहा है ।
बहरहाल पंक्तियों के लिखे जाने तक ऐसा कोई आवेदन पुलिस ने पेश नही किया है कि जिसके आधार पर अदालत ने कोई यह फ़ैसला दिया है कि, यह माना जाए कि सुकमा पुलिस ने कल्लूरी के आईजी रहते नंदिनी सुंदर और उनके सहयोगियों के विरुद्ध,एफआईआर में जिन धाराओं के तहत आरोपी बनाया था, उसमें प्रमाण ना होने की वजह से नाम वापसी हो गई है ।
इस प्रकरण में जिन्हे नाम वापसी का इंतजार है, उन्हे अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा ।