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UPSC में असफल रहे उम्मीदवारों को अन्य मंत्रालयों में नौकरी मिलने की जागी उम्मीद….ये है नई योजना

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नईदिल्ली 10 फरवरी 2019। UPSC की परीक्षा सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक मानी जाती है. दिन-रात की मेहनत और खूब पढ़ाई करने के बाद छात्र प्री और मेंस परीक्षा तो पास तो कर लेते हैं, वहीं जब बारी आती है इंटरव्यू की तो उसमें दो तिहाई फेल हो जाते हैं. ऐसे ही उम्मीदवारों को ध्यान में रखते हुए UPSC नया नियम लाने की योजना बना रहा है. जहां इंटरव्यू में फेल हुए उम्मीदवारों को दूसरी सरकारी नौकरी दी जाएगी. आइए विस्तार से जानते हैं.

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी)  के चेयरमैन अरविंद सक्सेना ने सरकार और उनके मंत्रालयों से सिफारिश की है कि सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू के अंतिम लिस्ट में जगह न बना पाने वाले स्टूडेंट्स के लिए सरकारी सेवाओं में भर्ती सुनिश्चित की जाए।  रिपोर्ट्स की मानें तो यूपीएससी अध्यक्ष अरविंद सक्सेना ने न केवल सिविल सेवाओं के अंतिम लिस्ट तक पहुंचने वाले स्टूडेंट्स बल्कि अन्य परीक्षाओं के साक्षात्कार तक तो पहुंचने वाले भी स्टूडेंट्स के लिए भर्ती की मांग की है।

ओडिशा में हो रहे राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों के तेईसवें राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर यूपीएससी के चेयरमैन अरविंद सक्सेना ने कहा कि हर साल लगभग 11 लाख उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। इनमें से आधे उम्मीदवार ही प्री एग्जाम में बैठते हैं। परीक्षा चरणों के माध्यम से उनकी संख्या कम हो जाती है और अंत में केवल 600 उम्मीदवार ही बचे रह जाते हैं।

सम्मेलन में उन्होंने कहा कि सरकार को इन मुश्किल चयन प्रक्रियाओं से गुजरने वाले स्टूडेंट्स की लिस्ट से दूसरे मंत्रालयों में भर्ती पर विचार करना चाहिए। ताकि ऐसे स्टूडेंट्स का तनाव और दुख कम हो सके। उन्होंने हालांकि इस बात का भी जिक्र किया कि पहली बार 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी ने ऐसे उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए विज्ञापन जारी किया है जो इंटरव्यू में असफल हो जाते हैं। सिविल सर्विस के 2018 का इंटरव्यू फिलहाल जारी है और कुछ ही दिनों में परिणाम आने की संभावना है।

यूपीएससी परीक्षा प्रक्रिया के चयन प्रक्रिया के बारे में भी उन्होंने बताया कि परीक्षा को स्टूडेंट्स के अनुकूल बनाने के लिए काफी बदलाव व प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत अब ऑनलाइन आवेदन करने के बाद उम्मीदवारों को एक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा जिसके जरिए बाद में अगर वे चाहेंगे तो अपना आवेदन वापस ले सकेंगे।

दरअसल यूपीएससी का कहना है कि आधे उम्मीदवार फॉर्म तो भर देते हैं, लेकिन प्री एग्जाम देने ही नहीं आते हैं। ऐसे में यूपीएससी को परीक्षा केंद्र
और पेपर पर अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं। सक्सेना ने कहा कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य उम्मीदवारों को जागरूक करना है कि यदि वे अच्छी तरह से तैयार नहीं हैं, तो उन्हें परीक्षा नहीं देनी चाहिए और अगले साल इसके लिए कोशिश करनी चाहिए। परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए UPSC कई अन्य उपाय भी कर रहा है, जिनमें ऑनलाइन कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट आयोजित कराने पर विचार किया जा रहा है।