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बजट में संविलियन का जिक्र तक नहीं हुआ, तो छलक उठा शिक्षाकर्मियों का दर्द….. मुख्यमंत्री के फ़ेसबुक वाल पर किया अपनी निराशा को बयां….लिखा- “जब करना ही नहीं था पूरा, तो फिर क्यों किया था वादा”…कमेंट्स की हुई बौछार… पढ़िए

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रायपुर 8 फरवरी 2019। बजट में संविलियन और शिक्षाकर्मियों के लिए प्रावधान नहीं होने से शिक्षकों का एक बड़ा तबका सरकार से निराश दिख रहा है। लगातार प्रतिक्रियाओं और सोशल मीडिया के जरिये शिक्षक और शिक्षाकर्मी अपनी निराशा और दर्द को सरकार के सामने बयां कर रहे है।

मुख्यमंत्री के फेसबुक पेज पर भी लगातार शिक्षाकर्मी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ इसे सरकार की वादाखिलाफी बता रहे हैं, तो कुछ को ठगा हुआ मां रहे है।

मुख्यमंत्री ने बजट को लेकर जो तस्वीर फेसबुक पेज पर डाली है, उसमें सैंकड़ों की संख्या में शिक्षाकर्मियों ने अपनी नाराजगी जतायी है।शिव लिखते हैं-शिक्षाकर्मियों को सपना दिखाकर ठग लिए महोदय।

लिंगराज छत्तीसगढ़ी में लिखते हैं- हम कइसन ए बजट ला अच्छा कहबो।

विजय कश्यप लिखते है कुछ वादों और अश्वासनों का गला घोंटा गया है। कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश व्याप्त है। अमर ध्रुव लिखते हैं कि 8 फरवरी को शिक्षाकर्मियों ने कौन सा गुनाह किया था, जो संविलियन नहीं किया, अगर संविलियन नहीं करना था तो फिर जन घोषणा पत्र में इसका क्यों जिक्र किया।

सुरेंद्र दीवान लिखते है कि आप पर बहुत भरोसा किये थे, लेकिन आपने निराश कर दिया मुखिया जी।

मीना बंजारे लिखती हैं कि आप अपना पुराना वीडियो देखिये सर जी आपने कहा था, की हमारा शासन आया तो सबसे पहले संविलियन करेंगे। आज जो हुआ उसकी उम्मीद नहीं थी।

आरती लिखतीं है कि -हमारा संविलियन नहीं करके हमारी भावनाओं को आहत किया है सर जी।

 

शिक्षाकर्मियो के इस कमेंट से साफ है कि आज का बजट उनके लिए अप्रत्याशित था, उन्होंने शायद ये कभी नहीं सोचा होगा कि बजट में उनके संविलियन या शिक्षाकर्मियों के किसी मुद्दे तक का जिक्र नहीं होगा। इधर खबर है कि अब आंदोलन की भी सुगबुगाहट शुरू हो गयी है।

सोशल मीडिया में शिक्षाकर्मियों द्वारा किए जा रहे कमेंटों पर जब हमने शिक्षाकर्मी संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी विवेक दुबे से बात की तो उनका कहना है कि

20 साल के शिक्षाकर्मी जीवन के इतिहास में शिक्षाकर्मियों को जितनी अधिक उम्मीदें इस बजट से थी उतनी कभी नहीं रही । चाहे मंत्रियों के द्वारा मिले आश्वासन हो या फिर मीडिया के जरिए आई खबरें सभी से शिक्षाकर्मियों को सकारात्मक आश्वासन ही मिला था ऐसे में बजट में शिक्षाकर्मी शब्द तक का जिक्र न होना शिक्षाकर्मियों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है । हमें उम्मीद थी कि जिस प्रकार सरकार ने चुनाव से पहले शिक्षाकर्मी संवर्ग को गंभीरता से लेते हुए उनके मुद्दों को जन घोषणा पत्र में शामिल किया था उसी गंभीरता से उसके पहल की दिशा में कार्रवाई की जाएगी कम से कम पूर्ववर्ती सरकार ने जो खाई 8 वर्ष का बंधन लागू कर शिक्षाकर्मियों के बीच तैयार किया था उसे पाटने का काम यह सरकार करेगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । संविलियन, अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति, क्रमोन्नति, वेतन विसंगति में से किसी भी मुद्दे को सरकार ने छूना तक उचित नहीं समझा ऐसे में शिक्षाकर्मियों का दिल टूटना स्वाभाविक है क्योंकि इस सरकार से जितनी उम्मीदें थी उतनी उम्मीदें कभी किसी सरकार से नहीं रही और यही कारण है कि सोशल मीडिया में शिक्षाकर्मी अपनी भावनाओं को अपने प्रदेश के मुखिया माननीय भूपेश बघेल जी से बता रहे हैं जो कि उनकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया है और इसे उसी प्रकार से लेना चाहिए ।