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संविलियन ना होने पर शिक्षाकर्मी भड़के – बोले- जब नहीं करना था संविलियन तो क्यों कर रहे थे बड़ी-बड़ी बातें…. व्हाट्सएप में कुछ इस तरह कर रहे हैं गुस्से का इजहार…..देखिये आग उगलते शिक्षाकर्मियों के कमेंट्स

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रायपुर 9 जनवरी 2019। प्रदेश के 48 हजार शिक्षाकर्मियों को नयी सरकार से ऐसा गम मिला है…जिसने नये साल पूरा जायका ही बिगाड़ दिया है। कैबिनेट की बैठक में अनुपूरक बजट में शिक्षाकर्मियों के प्रावधान के बाद शिक्षाकर्मियों को इस बात का पक्का यकीन हो चला था कि उन्हें संविलियन की सौगात तो मिलेगी ही, लेकिन अनुपूरक बजट के पिटारे से शिक्षाकर्मियों के लिए निकले कोरे आश्वासन ने शिक्षाकर्मियों को ना सिर्फ निराश कर दिया है…बल्कि उन्हें आक्रोशित भी कर दिया।

अनुपूरक बजट में संविलियन की घोषणा ना किये जाने से नाराज शिक्षाकर्मी लगातार अपने आक्रोश का इजहार कर रहे हैं। शिक्षाकर्मियों के व्हाट्सएप भी सरकार की वादाखिलाफी पर तीखा आक्रोश जताया जा रहा है। अलग-अलग ग्रुपों में अलग अलग तरीके नाराजगी जतायी जा रही है।दरअसल शिक्षाकर्मियों की उम्मीदें इस बात को लेकर ज्यादा प्रबल थी, क्योंकि सरकार की तरफ से लगातार शिक्षाकर्मियों को संविलियन के संकेत दिये जा रहे हैं। खुद शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने अपने विधानसभा क्षेत्र में शिक्षाकर्मियों को संविलियन के लिए 8 साल तक इंतजार नहीं करने की बात कही थी।

शिक्षाकर्मियों ने अपनी नाराजगी जताये हुए व्हाट्सएप ग्रुपों में इसे कश्मीर समस्या का नाम दिया है, तो किसी ने इसे झुनझुना पकड़ाने वाली सरकार कहा है। सरकार के फैसले पर कई जगह शिक्षाकर्मी चुटीले अंदाज में सरकार पर निशाना भी साध रहे हैं।

एक शिक्षाकर्मी ने लिखा है- कांग्रेस ने कहा था सबका संविलियन…इसका मतलब था परवीक्षा अवधि के बाद संविलियन, हम बेकार में 2 साल में संविलियन समझ रहे थे।

वहीं एक शिक्षाकर्मी ने लिखा है – शिक्षाकर्मियों का मामला तो राम मंदिर टाइप हो गया है, झुनझुना पकड़ो और खुश हो जाओ..

एक शिक्षाकर्मी ने लिखा है – 8 वर्षों से कम वालों का संविलियन कश्मीर की समस्या टाइप हो गया है।

वहीं एक शिक्षाकर्मी ने लिखा है – लोकसभा चुनाव में इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा, ना सरकार ने वादा पूरा किया और ना ही वक्त बताया है।

एक कमेंट में शिक्षाकर्मी ने लिखा – नेता बनने के पहले हाथ जोड़ते हैं और फिर नेता बनते ही सब भूल जाते हैं

वहीं एक शिक्षाकर्मी ने लिखा है – हमने तो संविलियन के लिए इस सरकार को चुना था… वरना रमन भी बुरे नहीं थे

एक शिक्षाकर्मी ने लिखा है – अब लगता है कांग्रेस को वोट देना ही भूल थी… जब भाजपा का ही फैसला लागू किया गया, तो बदलने की क्या जरूरत थी

एक कमेंट में लिखा है – एक नया शिगुफा बताऊं,

दरअसल जिस प्रकार अपने क्षेत्र में स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह ने सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने बयान दिया कि अब शिक्षाकर्मियों को संविलियन के लिए 8 वर्ष का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और 2 वर्ष में ही उनका संविलियन हो जाएगा उसके बाद शिक्षाकर्मियों की उम्मीदें जाग गई । कैबिनेट बैठक के बाद भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते समय कैबिनेट मिनिस्टर रविंद्र चौबे जी ने जानकारी दी किस शिक्षाकर्मियों के लिए प्रावधान किया गया है तो कोई यह सपने में भी नहीं सोच सकता था की पुरानी सरकार में सविलियन हुए शिक्षकों के वेतन के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की है इसलिए हर शिक्षाकर्मी को यही लगा कि अब उन्हें वर्ष बंधन समाप्त कर सौगात दी जा रही है और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल में भी स्कूल शिक्षा मंत्री ने वर्ष बंधन के बारे में सवाल पूछने पर कहा की संविलियन का प्रावधान किया जा रहा है जिसके बाद शिक्षाकर्मियों को य लगने लगा था की अनुपूरक बजट में उनके विषय में प्रावधान किया गया है लेकिन जब बजट सामने आया तो मीडिया और शिक्षाकर्मी दोनों के होश उड़ गए क्योंकि यह तो पहले से ही संविलियन पा चुके शिक्षाकर्मियों के लिए वेतन का प्रावधान था जिसे कहीं से भी सौगात कहा ही नहीं जा सकता ।

8 वर्ष से कम सेवा अवधि वाले शिक्षाकर्मियों ने अपनी तरफ से वर्ष बंधन समाप्ति के लिए अथक प्रयास किया था और बिना किसी संगठन के वह लगातार नेताओं से संपर्क करते रहे और उनसे गुजारिश करते रहे और उन्हें वहां से आश्वासन भी मिला लेकिन जब शिक्षाकर्मियों के संविलियन में वर्ष बंधन समाप्ति की कोई घोषणा नहीं हुई तो वह भी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।