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डांसर से IAS बनीं कविता रामू ने लिखी सफलता की नई दास्तां…..पापा का सपना पूरा करने IAS बनी ये वर्ल्ड क्लास भरतनाट्यम डांसर

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नई दिल्ली 6 नवंबर 2018। IAS तो वो पापा का सपना पूरा करने के लिए बन गयी!….वरना ख्वाहिश तो इनकी एक भरतनाट्यम डांसर बनने की ही थी। बेहद सुलझी, ईमानदार और जुझारू ये महिला IAS अफसर जब पैरों में घुंघरू बांध…भरतनाट्यम कॉस्टयूम में स्टेज पर थिरकरती है, तो लोग दंग रह जाते हैं। जितनी कमाल की अफसर…उससे भी कहीं ज्यादा कमाल की कलाकार !…नाम है कविता रामू…ये लेडी महिला IAS के नाम पर तो देश में ही मशहूर है, तो भरतनाट्यम नर्तकी के नाम पर पूरी दुनिया में इन्हें शोहरत मिली हुई है। पेशे से तमिलनाडु काडर की आईएएस कविता रामू भरतनाट्यम की इतनी मशहूर कलाकार हैं कि दूरदर्शन ने ए ग्रेड आर्टिस्ट का तमगा दे रखा है। कविता रामू के नाम अब तक देश-विदेश में 600 से ज्यादा स्टेज परफार्मेंस का रिकॉर्ड है।

तमिलनाडु काडर की 2002 बैच की आईएएस कविता रामू की आज महज प्रशासनिक अफसर नहीं बल्कि देश की मशहूर भरतनाट्यम नृत्यांगना के तौर पर पहचान बन चुकी है। देश-विदेश में अब तक छह सौ से अधिक स्टेज परफार्मेंस कर चुकीं इस महिला आईएएस को कई अवार्ड मिल चुके हैं।

 

कविता के लिए आईएएस बनने का सफर काफी रोचक रहा. भरतनाट्यम डांसर से वह आईएएस बन गईं। एक डांसर से कैसे बनीं अफसर, जानिए उनका सफर।
कविता रामू महज चार साल की थीं, जब उनकी मां ने उन्हें भरतनाट्यम सिखाना शुरू किया।  मां मनिमेगली  शादी से पहले अर्थशास्त्र की प्रोफेसर रह चुकीं थीं। फिर प्रख्यात डांसर नीला कृष्णमूर्ति को गुरु बनाकर डांस की बारीकियां सीखनी शुरू कीं। बात 1981 की है, जब कविता महज आठ वर्ष की थीं, तब तमिलनाडु के चिदंबरम शहर में विश्व तमिल कांफ्रेंस का आयोजन हो रहा था। उस अंतर्राष्ट्रीय स्तर के समारोह में इस आठ साल की बच्ची ने दमदार परफारमेंस से समां बांध दी तो लोग हैरान रह गए।

 

इतने बड़े आयोजन में सफल प्रस्तुति देने पर बच्ची का काफी आत्मविश्वास बढ़ा। फिर स्टेज परफार्मेंस का सिलसिला शुरू हो गया. इसी दौरान कविता की मुलाकात प्रख्यात डांसर केजे सरसा से हुई तो उनके अंडर में भरतनाट्यम की ट्रेनिंग लेनी शुरू कीं. देखते ही देखते ही कविता रामू मशहूर होतीं गईं।

पापा का सपना पूरा करने बनी IAS अफसर

भरतनाट्यम कविता का पैशन रहा, मगर वह अपने आईएएस पिता एम रामू से काफी प्रभावित रहीं और उनके पदचिन्हों पर चलना चाहतीं थीं। परिवार भी बेटी को आईएएस बनते देखना चाहते थे। ऐसे में एक तरफ का रास्ता भरतनाट्यम में करियर की तरफ जाता था दूसरा रास्ता उन्हें प्रशासनिक सेवा की तैयारी की तरफ ले जाता था। आखिर कविता रामू ने दोनों में संतुलन साधने की कोशिश कीं और सफल भी रहीं। जिस वक्त वह बड़ी प्रतियोगिताओं में भाग लेने की तैयारी कर रहीं थीं, उसी वक्त 2002 में उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशखबरी मिली. यह खुशखबरी थी देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा यानी संघ लोकसेवा आयोग की सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफलता की। आखिरकार कविता आईएएस बनने में सफल रहीं. कविता पढ़ने में काफी मेधावी रहीं।  इससे पहले 1999 में उनका चयन तमिलनाडु स्टेट सिविल सर्विसेज में हो चुका था. कविता ने अर्थशास्त्र से ग्रेजुएशन किया तो पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (लोक-प्रशासन) में मास्टर्स की डिग्री ली.