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एक परिवार तीन पार्टियां : जोगी फैमिली ने सियासत में लिखी नयी इबारत

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रायपुर 21 अक्टूबर 2018। चार लोगों का परिवार और तीन अलग-अलग पार्टियां !!… जोगी परिवार ने राजनीति के इतिहास में विविधित में एकता की एक अनूठी मिसाल ही बना दी है। देश के इतिहास में एक परिवार में दो पार्टियों होने की बानगी तो मिलती रही है, लेकिन पहली दफा ऐसा हुआ है, जब चार लोगों के परिवार में तीन अलग-अलग पार्टियां बनी हो और तीनों के तीनों चुनाव लड़ने की तैयारी में हो। अजीत जोगी के परिवार के 4 सदस्यों में उनकी पत्नी रेणु जोगी, बेटे अमित जोगी और बहू ऋचा जोगी, अपनी पार्टी के अलावा दूसरी पार्टियों की तरफ से भी किस्मत आजमाने को तैयार हैं।

गुरुवार को अजीत जोगी की बहू ऋचा के बसपा में शामिल होने के बाद, जोगी परिवार के नाम नया रिकार्ड बना। अजीत जोगी खुद छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी रेणु कांग्रेस मे हैं और अभी मौजूदा वक्त में कोटा से विधायक हैं, वहीं अब ऋचा जोगी बहुजन समाज पार्टी में हैं।  ऋचा जोगी को बसपा ने अकलतरा से प्रत्याशी बनाया है।पार्टी सूत्रों के अनुसार ऋचा जोगी अब अपनी सीट अकलतरा में अपने प्रचार में जुटेंगी। जोगी के विधायक पुत्र अमित जोगी के बारे में भी तक साफ नहीं है कि वह चुनाव मैदान में उतरेंगे या नहीं। हालांकि उनके नजदीकी लोग जोगी परिवार की परम्परागत सीट मरवाही से सटे मनेन्द्रगढ़ सीट पर डेरा डाले हुए है।

जोगी की पत्नी डॉक्टर रेणु जोगी ने भी इस बार भी उन्होंने कांग्रेस के टिकट के लिए आवेदन कर रखा है। जोगी उनसे सार्वजनिक रूप से कई बार कांग्रेस छोड़कर जनता कांग्रेस में शामिल होने की अपील कर चुके है, और यह भी कह चुके है कि वह पत्नी को मनाने में सफल नहीं हो पा रहे है। रेणु जोगी कांग्रेस में बनी रहना चाहती हैं और इसके पीछे वह गांधी परिवार खासकर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के जुड़ाव को कारण बताती रही है।

प्रदेश कांग्रेस का एक बड़ा खेमा चाहता है कि रेणु जोगी को टिकट नहीं दिया जाय। उनका आवेदन भी ब्लॉक कांग्रेस ने तकनीकी आधार बताते हुए स्वीकार नहीं किया था, लेकिन विधायक होने के नाते उनका नाम पैनल में है। उन्हें टिकट मिलेगा या नहीं यह कहना तो मुश्किल है पर इस समय तो उनके परिवार की स्थिति यह है कि चार लोगो के संयुक्त परिवार में तीन लोग अलग-अलग दलों में है।

ये देखना वाकई दिलचस्प होगा कि तीन अलग-अलग पार्टी में रहने वाले परिवार के 4 सदस्य किस तरह अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हैं और चुनावी प्रबंधन किस अंदाज में करते हैं। एक ही परिवार में रहते हुए एक दूसरे की पार्टी पर कैसे आरोप-प्रत्यरोप करते हैं। हालांकि ऐसे कई परिवार हैं जिनके सदस्यों ने अलग-अलग पार्टियों से चुनाव में किस्मत आजमाया है।