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कमाल के सीईओ-1

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तरकश, 16 सितंबर
भारत सरकार की टीम किसी स्टेट में जाती है तो उसे हाथों हाथ लिया जाता है। लेकिन, छत्तीसगढ़ के पंचायत मंत्री के जिले में केंद्रीय पंचायत विभाग के अफसरों के साथ ऐसा सलूक किया जाएगा, किसी ने सोचा भी नहीं होगा। धमतरी जिला पंचायत के आईएएस सीईओ रीतेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री आवास की जांच करने आई ऑडिट जनरल टीम से मिलने से साफ इंकार कर दिया बल्कि उनके लिए सर्किट हाउस में कमरे का इंतजाम भी नहीं कराया। मजबूरी में उन्हें होटल में रुकना पड़ा। यह शिकायत खुद केंद्रीय पंचायत सचिव ने की है। एसीएस पंचायत आरपी मंडल जब मीटिंग में दिल्ली गए तो भारत सरकार के सचिव इस घटना से बडे क्षुब्ध थे। भारत सरकार का सचिव राज्य के चीफ सिकरेट्री के समकक्ष होता है। बल्कि, उससे उपर ही। क्योंकि, सीएस तो सीनियरिटी के कारण कोई भी बन जाता है, यूनियन सिकरेट्री बनना बेहद कठिन है। उनकी नाराजगी से छत्तीसगढ़ को क्या नुकसान होता, मंडल भली-भांति जानते थे। उन्होंने अपने सीईओ के साहसिक कृत्य के लिए क्षमा मांगी। तब जाकर मामला ठंडा हुआ। हालांकि, इस घटना से आरपी मंडल इतने नाराज और व्यथित हुए कि पंचायत विभाग का पुरस्कार लेने दिल्ली जाने वाली सूची से रीतेश का नाम कटवा दिए। धमतरी को तीसरा पुरस्कार मिला था। रीतेश की टिकिट भी हो गई थी। लेकिन, मंडल ने आंख तरेरते हुए नो कर दिया।

कमाल के सीईओ-2

कांकेर जिपं की आईएएस सीईओ का कारनामा सामने आया है। 2008 में छत्तीसगढ़ को हिला देने वाले मनरेगा कांड के दसों आरोपियों को उन्होंने बाईज्जत बरी कर दिया है। इस घोटाले की गूंज न केवल विधानसभा में बल्कि लोकसभा तक में हुई थी। तब के केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद को जांच रिपोर्ट पटल पर रखना पड़ा था। लोकसभा में उन्होंने कहा था कि आईएएस सीईओ समेत इस मामले में दर्जन भर अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है….इससे बड़ी कार्रवाई आखिर क्या हो सकती है। याद होगा, जिपं सीईओ केपी देवांगन इसी मामले में नौकरी से बर्खास्त किए गए थे। इस कांड पर कांग्रेस ने इतना बवाल किया था कि सरकार ने पंचायत सिकरेट्री पीसी मिश्रा को कांकेर भेजा था और तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सम्मीट करने की ताकीद की थी। इस चक्कर में मिश्रा 15 दिन तक घर नहीं गए। ग्रामीण संस्थान निमोरा में दिन-रात काम कर उन्होंने 600 पेज की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंप दी थी। ऐसे कांड के आरोपियों को ससम्मान बख्श दिया जाएगा तो चौंकना स्वाभाविक है। वो भी उनके खुद के बयान पर। अफसरों ने फाइल में लिखा है….आरोपी अफसर और कर्मचारियों ने कहा कि वे इस घोटाले में शामिल नहीं थे, इसलिए उन्हें बरी किया जाता है। सचमुच करोड़ों के घोटालेबाजों को बचाने की ये पराकाष्ठा है।

त्रिकोणीय मुकाबला

पीसीसीएफ आरके सिंह इस महीने रिटायर हो जाएंगे। वन विभाग के इस शीर्ष पोस्ट पर बैठने के लिए लघु वनोपज संघ के एमडी मुदित कुमार और पीएमजीएसवाय के सीईओ राकेश चतुर्वेदी के बीच तगड़ा टक्कर है। मुदित पीसीसीएफ हो गए हैं, राकेश हाल ही में एडिशनल पीसीसीएफ हुए हैं। राकेश को उपर ले जाने के लिए सरकार को डीपीसी करनी होगी। हालांकि, सीनियरिटी में शिरीष अग्रवाल सबसे उपर हैं। वे अभी राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्रमुख हैं। मुदित दूसरे नम्बर पर हैं। जब आरके सिंह पीसीसीएफ बनाए गए थे, तब शिरीष और मुदित भी प्रमुख दावेदार थे। जाहिर तौर पर शिरीष भी जोर लगाएंगे ही। उनका तो दावा भी बनता है। ऐसे में, लास्ट में मुकाबला अगर त्रिकोणीय हो जाए, तो आश्चर्य नहीं।

कलेक्टर की अंग्रेजी

आदिवासी संभाग के एक जिले के लोग कलेक्टर साब की अंग्रेजी से बड़ा परेशान हैं। कलेक्टर दौरे में भी अंग्रेजी में शुरू हो जाते हैं। आफिस में मिलने जाओ, तो वहां भी वही…। अंग्रेजी प्रेम के चक्कर में वे ग्रामर की कचूमर निकाल दे रहे हैं….पास्ट, प्रेजेंट, फ्यूचर और ही एवं शी में कोई फर्क नहीं। आलम यह है कि हिंदी दिवस का भाषण भी उनका अंग्रेजी के बिना पूरा नहीं हुआ।

जीएडी की चूक

महिलाओं को आपत्जिनक व्हाट्सएप करने के आरोप में सरकार ने कोंडागांव जिला पंचायत सीईओ संजय कन्नौजे की छुट्टी कर दी। कन्नौजे एक रोज पहले ही दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर का दूसरा पुरस्कार प्राप्त किए थे। ट्रांसफर के दो घंटे पहले ही मुख्यमंत्री से उन्हें मिलवाया गया था। साथ ही सीएम के साथ फोटो सेशन भी हुआ। जीएडी अगर सतर्क रहता तो सरकार को इस अप्रिय स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। सीईओ के खिलाफ महिला ने दो दिन पहले ही रिपोर्ट कर दी थी। उसके बाद भी जीएडी ने इसे संज्ञान में नहीं लिया। जबकि, किसी अफसर को अगर दिल्ली में राष्ट्रीय लेवल का कोई पुरस्कार मिलता है तो जीएडी का दायित्व है कि उस अफसर के बारे में पहले पूरा पता लगा लें। फिर, उसे भेजा जाए। पहले ऐसा होता भी था। लेकिन, जीएडी की इस चूक ने छत्तीसगढ़ की भद पिटवा दी।

एसोसियेशन का बुरा हाल

एन बैजेंद्र कुमार के हैदराबाद जाने के बाद आईएएस एसोसियेशन का हाल बड़ा बुरा हो गया है। 11 सितंबर को एसोसियेशन ने छत्तीसगढ़ के विकास की चिंता में दुबले होते जा रहे आईएएस के लिए हेल्थ पर टिप्स देने अरुण ऋषि को बुलवाया था। लेकिन, न्यू सर्किट हाउस के कार्यक्रम में पहुंचे सिर्फ सात आईएएस। आलम यह था कि एसोसियेशन के पदाधिकारी तक नदारत थे। बताते हैं, चीफ सिकरेट्री जांजगीर के दौरे से लौटे तो उन्हें एक आईएएस ने फोन कर बता दिया, यहां हालत बड़ी नाजुक है, न आना ही बेहतर होगा आपके लिए। लिहाजा, वे भी नहीं आए। शुरू के घंटे में तीन ही आईएएस रहे। सीके खेतान, गौरव द्विवेदी और कार्तिकेय गोयल। आईपीएस आरके विज और दो-तीन आईएफएस ने आकर संख्या 11 पहुंचा दी। वरना, और भद पिटती।

वयोवृद्ध उम्मीदवार

पत्थलगांव से छह बार विधायक रहे रामपुकार सिंह को अगर इस विधानसभा चुनाव मे कांग्रेस की टिकिट मिल गई तो वे सबसे वयोवृद्ध प्रत्याशी होंगे। वे 82 साल के हो गए हैं। हालांकि, बेलतरा विधायक बद्रीधर दीवान उनसे अधिक सीनियर हैं। वे 91 बरस के हैं। लेकिन, दीवानजी इस बार दावेदारी नहीं कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि उन्हें चिरंजीव को मौका मिल जाए। लेकिन, रामपुकार सिंह टिकिट की दौड़ में पीछे नहीं हैं। बल्कि मजबूती से डटे हुए हैं। जोगी सरकार में जनसंपर्क मंत्री रहे रामपुकार पिछला चुनाव दिलीप सिंह जूदेव के श्रद्धांजलि लहर में हार गए थे।

अंत में दो सवाल आपसे

1. आरपीएस त्यागी को बीजेपी में इंट्री न मिलने की असली वजह क्या रही?
2. सीबीआई की तलवार लटकी होने की स्थिति में क्या मायावती कांग्रेस से समझौता कर पाएगी?