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ईज आफ डूईंग की मौजूदा रैंकिंग पर कांग्रेस ने उठाये सवाल… पूछा- 2017 में अगर छठा स्थान है, तो 2015 व 2016 में क्या थी रैंकिंग ?….ये बताये सरकार

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रायपुर 11 जुलाई 2018। इज आफ डूईंग बिजनेस में छत्तीसगढ़ की मौजूदा रैंकिंग पर कांग्रेस नेे सवाल उठाये हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने पूछा है कि 2017 में छठवां स्थान मिलना अलग उपलब्धि है तो सरकार बताएं कि 2015 और 2016 में इज ऑफ डूइंग बिजनेस में छत्तीसगढ़ का कौन सा स्थान था? कांग्रेस के मुताबिक 2016 में छत्तीसगढ़ का चौथा स्थान था, लिहाजा उस आंकड़े के मुताबिक 2017 में छत्तीसगढ़ दो स्थान फिसली है। 2015 में भी छत्तीसगढ़ शीर्ष 5 राज्यों में था और अब छत्तीसगढ़ 2017 में शीर्ष 5 राज्यों में नहीं रही।
उन्होंने कहा है कि औंधेमुंह गिरना भी क्या छत्तीसगढ़ सरकार के लिए उपलब्धि हो गई है?  झूठ के सहारे जनता को गुमराह करने का एक और जीता जागता सबूत है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने पूछा है कि यदि कारोबार के लिए सकारात्मक माहौल के मामले में छत्तीसगढ़ का स्थान है तो छत्तीसगढ़ में विगत पांच वर्षों में कौन सा बड़ा उद्योग लगा या लगाने की घोषणा हुई है? उल्टे यह हुआ है कि बस्तर में ज़मीन अधिग्रहण के बाद टाटा जैसी कंपनी ने छत्तीसगढ़ छोड़ने का निर्णय लिया और वीडियोकॉन ने अपना बिजलीघर न लगाने का फ़ैसला किया। उन्होंने कहा है कि रमन सिंह को बताना चाहिए कि इज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस के इस थोथे तमगे के बाद उनकी विदेश यात्राओं का क्या फल मिला। DIPP के आंकड़ो के अनुसार जनवरी 2016 से जनवरी 2018 के मध्य देश के कुल निवेश प्रस्तावों मे से छत्तीसगढ़ मे मात्र 2 प्रतिशत प्रस्ताव ही प्राप्त हुए है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में राज्य का प्रदर्शन अत्यंत दयनीय है।
कारोबार के लिए सकारात्मक माहौल का सूचकांक निर्माण की अनुमति श्रम नियमों का पालन पर्यावरण की स्वीकृति, सूचनाओं तक पहुंच, भूमि की उपलब्धता और एकल खिड़की प्रणाली को लागू करने आदि पर निर्भर करती है और यह मानना पड़ेगा कि भाजपा की सरकार ने अपने कारोबारी दोस्तों के लिए जनहित को ताक पर रखकर बहुत रियायतें दी हैं। इसमें भू-अधिग्रहण से लेकर पर्यावरण की मंज़ूरी तक सब शामिल है।
उन्होंने कहा है कि श्रम नियमों को ताक पर रखकर अगर, किसानों की ज़मीन हड़पकर बिना मुआवज़ा दिए और पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना उद्योग लगाना अगर शर्तें हैं तो छत्तीसगढ़ सरकार को छठें स्थान पर नहीं बल्कि पहले स्थान पर रखना चाहिए। अपने बयान में उन्होंने कहा है कि रमन सरकार ने दरअसल किसानों का पानी उद्योंगों को देकर और अपने अमीर दोस्तों के लिए जंगल काटकर खनन करने के लिए बहुत सकारात्मक माहौल बनाया है लेकिन इससे छत्तीसगढ़ को अपूरणीय क्षति हुई है. उनका कहना था कि यदि जनता को हाशिए पर रखकर विकास इज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस है तो छत्तीसगढ़ को ऐसा तमगा नहीं चाहिए।