Home ब्यूरोक्रेट्स अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का हो सकता है LIVE प्रसारण…..

अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का हो सकता है LIVE प्रसारण…..

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नईदिल्ली 9 जुलाई 2018. लोकसभा और राज्‍यसभा की कार्यवाही के सीधे प्रसारण की तर्ज पर अब संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सुप्रीम कोर्ट में चलने वाली न्यायिक कार्यवाही का भी सीधा प्रसारण हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने आज इस पर सहमती जताते हुए कहा कि देशभर में अदालतों की कार्यवाही की लाइव- स्ट्रीमिंग संबंधी समग्र दिशा- निर्देश बनाने के लिए वे एजी को सुझाव दें।

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर केंद्र लाइव प्रसारण पर राजी है तो सुप्रीम कोर्ट को इससे कोई दिक्कत नहीं है।उन्होंने कहा कि कोर्ट नंबर एक से लाइव प्रसारण की शुरुआत की जा सकती है। दरअसल वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर शीर्ष अदालत में न्यायिक कार्यवाही के सीधे प्रसारण की मांग की थी।

पीठ ने सीधे प्रसारण पर सैद्धांतिक तौर पर जताई सहमति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कोर्ट के फैसलों के सीधे प्रसारण पर सैद्धांतिक तौर पर अपनी सहमति जता दी है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुझाव दिया कि सर्वोच्च कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अदालत से इसकी शुरू कर सकती है और फिर इसे दूसरी अदालतों के बाकी हिस्सों में बढ़ाया जा सकता है। पीठ ने एजी केकेवेणुगोपाल से इस मामले में समग्र दिशानिर्देश प्रस्तुत करने को कहा है जिसे कोर्ट अडॉप्ट कर सकती है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता इंदिरा जयसिंह की ओर से एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। इसमें उन्होंने कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाता तो उसके फैसलों की गलत रिपोर्टिंग रोकने में मदद मिलेगी। इस मामले में 19 जनवरी, 2018 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के सीधे प्रसारण से लोग कोर्ट में हो रहे फैसलों को अपने सामने देख सकेंगे। इससे कोर्ट पर लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।

इस दौरान प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा था कि मामले पर उचित समय पर सुनवाई होगी। बता दें कि शीर्ष अदालत ने पारदर्शिता लाने के प्रयास में हर राज्य में निचली अदालतों और न्यायाधिकरणों की आडियो के साथ सीसीटीवी वीडियो रिकार्डिंग की अनुमति दी थी।