“यहां सब डरे हुए, हर जगह भय का माहौल…..देश में असहमति का कोई स्थान नहीं बचा”….सीएम भूपेश बोले- क्या ऐसे ही भारत की कल्पना की थी गांधीजी ने ?

रायपुर 11 सितंबर 2019। “देश में असहमति का कोई स्थान बचा नहीं है, यहां लोग भी डरे हुए हैं, पत्रकार भी डरे हैं, नेता भी डरे हुए हैं..भय का माहौल हर जगह दिख रहा है”… मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज मौदी सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया।  गांधी और आधुनिक भारत विषय पर आयोजित सेमिनार में भूपेश बघेल ने कहा कि आज के वक्त में ये सोचने की बहुत जरूरत है कि जिस भारत की कल्पना गांधी जी ने की थी, क्या वैसा भारत हमें मिला ?…। गांधी जी अहिंसा के हिमायती थे, उन्होंने सत्य पर चलने का विचार सामने रखा, लेकिन आज देश में ऐसी स्थिति क्यों नहीं बन पा रही । प्रधानमंत्री के खिलाफ कुछ कहने की हिम्मत नहीं है, अगर कह दिया तो देशद्रोही करार दिये जायेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी के विचार और आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं, कल भी थे और आने वाले समय में भी प्रासंगिक रहेंगे। गांधी जी सदैव असहमति का सम्मान करते थे। लोगों के विचारों में परिवर्तन पर विश्वास रखते थे। लोगों को अपने विचारों से प्रभावित करने की कला उनमें थी। इस राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्व विद्यालय और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के व्यक्तित्व और कृतित्व तथा उनके छत्तीसगढ़ दौरे पर केंद्रित छाया चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ भी किया।

भूपेश बघेल ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। आर्टिकल 370 हटाने को लेकर सीएम बघेल ने कहा कि यह भाजपा के एजेंडे में था तो उन्होंने हटा दिया। लेकिन कश्मीर में राज्य का दर्जा ही समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि आज कश्मीर की बेटियों को लेकर जो बातें कही जा रही है, उस पर सवाल नहीं उठाया जा रहा है। आखिर महिलाओं के अपमान का प्रतिकार क्यों नहीं हो रहा है। नक्सलवाद को लेकर सीएम ने कहा कि नक्सलवाद जैसी समस्या को खत्म करने के लिए आदिवासियों का विश्वास जीतने की आवश्यकता है। इसके लिए उनको उनका अधिकार देने की आवश्यकता है।    मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी के बताए मार्ग पर चलते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने आदिवासी को जमीन लौटायी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार दिलाने की दिशा में कार्य शुरू किया है।

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उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वनवासियों को वन अधिकार कानूनों के जरिए वर्षों से काबिज परिवारों को उनके अधिकार दिलाने के लिए काम कर रही है।  उन्होंने कहा कि गांधी जी के ग्राम स्वराज के सिद्धांतों के अनुरूप ही राज्य में सुराजी गांव योजना शुरू की गई है। नरवा, गरवा, घुरवा, बारी के संरक्षण और संवर्धन का कार्य हाथ में लिया गया है। इस कार्यक्रम से पशुधन के संरक्षण से लेकर नदी नालों के रिचार्ज और पुनर्जीवन के लिए काम किए जा रहे है। इसके अलावा रोजगार और खेती किसानी की लागत कम करने के लिए जैविक खाद को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना से छत्तीसगढ़ के गांव स्वावलंबी बनेंगें।

 

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