रहने को घर नहीं

25 अगस्त 2019
डीजीपी के रूप में पौने पांच साल की पारी खेलने वाले अमरनाथ उपध्याय नाम के अनुरुप पूरे भोले बाबा ही निकले। इस महीने 31 को वे रिटायर हो जाएंगे। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि इस युग में उपध्याय जैसे अफसर भी हैं, जिन्होंने 33 बरस की आईपीएस जैसी नौकरी में अपने लिए एक छत का इंतजाम नहीं कर पाया। रिटायरमेंट के बाद सरकारी मकान में दो महीने रहने की पात्रता रहती है। दो महीने अतिरिक्त टाईम देने के लिए उन्होंने एसीएस होम सीके खेतान के यहां अर्जी लगाई है। उनके करीबी बताते हैं, हाउसिंग बोर्ड जब नौकरशाहों के लिए राजधानी के धर्मपुरा में लाखों का प्लाट कौड़ियों में दे रहा था तो उनका एंटिना काम नहीं किया। हाउसिंग बोर्ड ने कंडिशन रख दिया था कि तीन बरस में मकान बनाना होगा। तीन साल में वे मकान नहीं बनवा पाएंगे, इस डर से प्लॉट नहीं लिया। नया रायपुर में उन्होंने 2015 में एक प्लाट बुक किया था। उसमें भी एनआरडीए ने दगा दे दिया….एनआरडीए का कहना है, ब्याज समेत अपना बुकिंग एमाउंट ले लीजिए। तनखा पर गुजारा करने वाले उपध्याय तीनों बच्चों की पढ़ाई में लगे रहे। साल भर से उनके पिताजी बीमार रहे। 22 लाख प्रायवेट अस्पताल वाले ने ले लिया। दूसरा कोई आईपीएस होता तो एक तो अस्पताल वाला इतना बिल नहीं देता और देता तो वो पेमेंट करने के लिए किसी और को टिका देता। उपध्याय मध्यप्रदेश के समय तीन जिलों के एसपी रहे हैं। नक्सल प्रभावित बस्तर और सरगुजा के आईजी भी। पौने पांच साल डीजीपी रहने के दौरान प्रति वर्ष नौ करोड़ रुपए उनके पास सिक्रेट सर्विस मनी रहा, जिसका कोई आडिट नहीं होता। डीजी जिसको चाहे, बांट दें या अंदर कर ले। कई डीजीपी ने दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक एसएस मनी से आलीशाल मकान खरीद डाले, लेकिन, अमरनाथ तो अमरनाथ ठहरे।

डीएम बनेंगे चेयरमैन

अमरनाथ उपध्याय के रिटायर होने के बाद 31 अगस्त की शाम से डीजीपी डीएम अवस्थी सूबे के सबसे सीनियर आईपीएस बन जाएंगे। डीएम पिछले साल दिसंबर में पुलिस के मुखिया अवश्य बन गए थे लेकिन उनकी रैंकिंग तीसरी थी। गिरधारी नायक और उपध्याय के बाद। नायक जून में रिटायर हो गए और अब उपध्याय विदा हो रहे हैं। उपध्याय अभी पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर थे। हालांकि, नार्म के अनुसार डीजीपी कारपोरेशन का पदेन चेयरमैन होता है। लेकिन, उपध्याय चूकि डीएम से सीनियर थे। इसलिए, चेयरमैन और एमडी दोनों थे। विश्वरंजन के समय भी हालांकि ऐसा ही हुआ था। विश्वरंजन भी डीजीपी अनिल नवानी से सीनियर थे। बहरहाल, डीएम को चेयरमैन का हक मिल जाएगा। वे अब जब तक डीजीपी रहेंगे, कारपोरेशन के चेयरमैन बने रहेंगे। एमडी के रूप में सरकार किसी एडीजी या डीजी को एडिशनल चार्ज दे सकती है। एडिशनल इसलिए कि इस रैंक में अफसरों का टोटा है।

सुब्रमणियम को बुलावा

चीफ सिकरेट्री सुनील कुजूर के रिटायर होने से पहिले राज्य सरकार जम्मू-कश्मीर के चीफ सिकरेट्री बीवीआर सुब्रमणियम को बुलाने के लिए भारत सरकार को लेटर लिख सकती है। सुब्रमणियम 87 बैच के छत्तीसगढ़ सरकार के आईएएस हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के अफसर मानते हैं, प्रमुख सचिव, अपर मुख्य सचिव स्तर पर अफसरों की काफी कमी है। सुब्रमणियम को बुलाने में अफसरों की कमी का ही हवाला दिया जाएगा। भारत सरकार अगर सुब्रमणियम को कश्मीर के इस हालात में लौटाने के लिए राजी नहीं हुई तो सीएस सुनील कुजूर को छह महीने का एक्सटेंशन तो दे ही सकती है। बस हो गया काम। कुजूर के एक्सटेंशन के लिए सरकार ने केंद्र को पत्र भेजा हुआ है। इस पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। ज्यादतर लोग मानते हैं कि एक्सटेंशन बेहद कठिन होगा। लेकिन, सुब्रमणियम को बुलाने पर केंद्र शायद कुजूर के एक्सटेंशन पर अगर-मगर न कर पाए।

सुबोध को हरी झंडी?

डेपुटेशन पर भारत सरकार जाने के लिए प्रयासरत आईएएस सुबोध सिंह का रास्ता जल्द ही क्लियर हो सकता है। सरकार के करीबी अफसरों ने इसके संकेत दिए हैं। सुबोध भारत सरकार में पिछले साल ही ज्वाइंट सिकरेट्री इम्पेनल हो गए थे। लेकिन, पिछली सरकार ने उन्हें नहीं जाने दिया। और इस सरकार ने भी पहली बार में मना कर दिया था। उनके आवेदन पर भी सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की। लेकिन, अब सुनते हैं, सरकार पसीजी है। अटकलें हैं, सुबोध पीयूष गोयल के रेल मंत्रालय में जाएं। रेल कारिडोर की मीटिंग के दौरान सुबोध के पारफारमेंस से पीयूष काफी प्रभावित हुए थे। ठीक भी है, सुबोध अगर रेलवे में गए तो छत्तीसगढ़ को निश्चित रूप से इसका लाभ ही मिलेगा। मगर महत्वपूर्ण यह है कि पहले पोस्टिंग का आर्डर तो निकले।

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अमर का नुकसान

अरुण जेटली से देहावसान से छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल का बड़ा नुकसान हुआ। सूबे के भाजपा नेताओं में अमर जेटली के बेहद करीब हो गए थे। वित्त मंत्री होने के नाते जेटली जीएसटी कौंसिल के चेयरमैन थे और अमर उसके मेम्बर। जीएसटी के मामले में अमर के नॉलेज से जेटली काफी प्रभावित थे। धीरे-धीरे उनके पारिवारिक रिश्ते बन गए। वे तब के सीएम डा0 रमन सिंह को कई दफा कह चुके थे, आपके अमर में गजब की काबिलियत है। रमन ने कई मौकों पर यहां इसका जिक्र भी किया था। जेटली जब एम्स में भरती हुए तो अमर पिछले हफ्ते उनके परिवार के लोगों से मिलने भी गए थे।

प्रमोटी का दबदबा

राज्य बनने के बाद पहली बार सूबे में प्रमोटी आईपीएस का दबदबा बढ़ता दिख रहा है। अभी 27 में से 14 जिले के एसपी प्रमोटी हो गए हैं। सिर्फ 13 जिले में ही रेगुलर रिक्रूट्ड पुलिस अधीक्षक हैं। दुर्ग रेंज में तो सारे प्रमोटी एसपी हैं तो सरगुजा रेंज में भी सिर्फ सरगुजा में आरआर हैं। बाकी जिलो में प्रमोटी। आरआर वाले सबसे अधिक बस्तर में हैं। बस्तर रेंज के सात में से पांच जिलों में आरआर हैं। सिर्फ कांकेर और कोंडागांव में प्रमोटी एसपी हैं। हालांकि, सरकार ने ये जरूर किया है कि दुर्ग को छोड़कर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा जैसे बड़े जिले में आरआर बिठा रखा है। दुर्ग के प्रखर पाण्डेय का भी इंवेस्टिगेशन के मामले में अपना नाम है। रायपुर के स्टेट बैंक आफ इंदौर में दिनदहाड़ हुई 60 लाख की बैंक डकैती के आरोपियों को प्रखर ही पटना से पकड़कर लाए थे। बहरहाल, संख्या बल में तो प्रमोटी आरआर को पीछे छोड़ ही दिए हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एक्स सीएम डा0 रमन सिंह को अपने किस पूर्व मंत्री से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा होगा?
2. सीएम भूपेश बघेल के दिल्ली अधिवेशन में राहुल गांधी के बगल में बैठने से छत्तीसगढ़ के किन-किन मंत्रियों को उस दिन रात में नींद नहींं आई होगी?

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