संकट में Ex सीएस?

18 अगस्त 2019
छत्तीसगढ़ में तीन साल तक चीफ सिकरेट्री रहे पी जॉय उम्मेन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। वे जब प्रिंसिपल सिकरेट्री पीडब्लूडी थे, तब आईएलएफएस कांड हुआ था। उन्होंने 25 सौ किमी सड़क बनाने के लिए आईएलएफएस कंपनी से 9600 करोड़ में एग्रीमेंट किया। बाद में निगोशियेशन में उसे बढ़ाकर 14 हजार करोड़ कर दिया गया। वो भी बिना प्रशासकीय स्वीकृति के। इसको लेकर 2007 में जमकर बवाल मचा था। कांग्रेस नेता राजेश बिस्सा ने इस मामले का खुलासा किया था। और इसके बाद विधानसभा में कांग्रेस ने इतना हंगामा किया कि दो दिनों तक सदन की कार्रवाई ठप रही। मोहम्मद अकबर ने इस पर आधे घंटे का ऐसा प्रभावी भाषण दिया था कि लोग आज भी भूले नहीं हैं। कड़े विरोध के कारण ही रमन सरकार ने आईएलएफएस के एग्रीमेंट को केंसिल कर दिया था। लेकिन, तब तक इसके डीपीआर से लेकर तमाम कामों पर पीडब्लूडी ने लगभग 10 करोड़ रुपए खर्च कर डाले थे। मंत्रालय में इसकी फाइल अब ढूढ़ी जा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता बिस्सा कहते हैं, हमारे पास दस्तावेजी प्रमाण हैं….इसकी फिर से जांच होनी चाहिए….क्योंकि पिछली सरकार ने इस पर लीपापोती कर दी थी। ऐसा अगर कुछ हुआ तो जाहिर है, उम्मेन की मुश्किलें बढ़ सकती है।

आईएएस की बारी?

आठ महीने के कार्यकाल में राज्य सरकार ने आईपीएस से मुकेश गुप्ता और रजनीश को सस्पेंड कर चुकी है। इस हफ्ते आईएफएस से एसएस बजाज का नम्बर लग गया। नया रायपुर में सोनिया गांधी द्वारा किए गए शिलान्यास वाली जगह को आईआईएम को अलॉट करने के मामले में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। दीगर मामले में सरकार एक और सीनियर आईएफएस पर कार्रवाई कर सकती है। हो सकता है, इसके बाद किसी आईएएस का नम्बर आ जाए। हालांकि, आईएएस के खिलाफ कार्रवाई करना जरा कठिन होता है। आईपीएस, आईएफएस के आगे-पीछे कोई होता नहीं….वे खुद ही एक-दूसरे को निबटाते रहते हैं। किन्तु आईएएस का एसोसियेशन नेशनल लेवल पर बड़ा स्ट्रांग है। तभी तो राज्य बनने के बाद सिर्फ तीन आईएएस अभी तक निलंबित हुए हैं। अजयपाल सिंह, राधाकृष्णन और बीएल अग्रवाल। तीनों को रमन सिंह ने निलंबित किया था। अब तो भूपेश बघेल जैसे दमदार नेतृत्व वाली सरकार है, उसमें कुछ भी संभव है।

पनिशमेंट पोस्टिंग

आईएएस हिमशिखर गुप्ता को जिस तरह कमिश्नर हायर एजुकेशन से हटाया गया, ब्यूरोक्रेसी में वह चर्चा का विषय है। हिमशिखर को उस प्रशासन अकादमी में डायरेक्टर बनाकर भेजा गया है, जहां आमतौर से किसी ब्यूरोक्रे्टस को शंट करने के लिए भेजा जाता है। नई सरकार ने राजेश राणा और आलोक अवस्थी को वहां डायरेक्टर बनाया था, तब भी एक एडिशनल चार्ज उनके पास और था। हिमशिखर के पास सिर्फ प्रशासन अकादमी का चार्ज रहेगा। वैसे, पिछली सरकार में भी नौकरशाहों को निबटाने के लिए प्रशासन अकादमी भेजा जाता था। लेकिन, अंतर यह था कि सीनियर लेवल के वे अफसर होते थे। डीएस मिश्रा, सीके खेतान, गौरव द्विवेदी सभी इस दौर से गुजर चुके हैं। लेकिन, हिमशिखर तो यंग अफसर हैं। उन्होंने आखिर कौन-सी खता कर दी है….इस सवाल का जवाब जानने ब्यूरोक्रेसी में बड़ी बेचैनी है।

नो टेंशन

गणेश शंकर मिश्रा को सहकारी निर्वाचन आयुक्त से हटाने के बाद एसीएस केडीपी राव की पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग का टेंशन दूर हो गया होगा। क्योंकि, अब पीएस, एसीएस रैंक का एक पद खाली हो गया है। हालांकि, इस साल कई नौकरशाह रिटायर हुए हैं या होने वाले हैं। लेकिन, जिन्हें रिटायरमेंट के बाद पोस्टिंग मिल सकती है, उनमेें सीएस सुनील कुजूर को अलग कर दें तो केडीपी राव ही सबसे वजनी दिखाई पड़ रहे हैं। लंबे समय तक हांसिये पर रहे केडीपी कांग्रेस सरकार में प्रतिष्ठापूर्ण विभाग पाए, लेकिन तब तक चला-चली की बेला आ गई। 31 अक्टूबर को वे रिटायर हो जाएंगे। ब्यूरोक्रेसी में यह मानने वालों की कमी नहीं है कि सहकारी निर्वाचन आयुक्त की खाली कुर्सी पर केडीपी विराजमान होंगे।

बेचारे नायक!

मुकेश गुप्ता के खिलाफ जांच करके रिटायर डीजी गिरधारी नायक एक तरह से कहें तो कुछ दिनों के लिए अपनी पोस्टिंग का रास्ता ब्लॉक कर लिए हैं। 30 जून को रिटायर होने के बाद उन्हें आपदा प्रबंधन की कमान सौंपी जाने की पूरी संभावना थी। पांच साल की यह पोस्टिंग है। मगर अब मुकेश गुप्ता की जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद डीजीपी डीएम अवस्थी ने उस पर तुरंत आईजी की जांच बिठा दी है। अब अगर सरकार नायक को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग देगी तो नायक की जांच का असर कम हो जाएगा। कानूनी तौर पर मुकेश का पलड़ा भारी हो जाएगा। ऐसे में, नायक कितनी भी उम्मीद पाल लें, सरकार कोई चूक नहीं करने वाली। वैसे भी, नायक और मुकेश के संबंध कैसे रहे हैं, यह पब्लिक डोमेन में है और सरकारी दस्तावेजों में भी। दोनों में दो मौकों पर एक-दूसरे के खिलाफ लिखा-पढ़ी की ऐसी जंग छिड़ी थी कि पूछिए मत! एक बार तो तत्कालीन चीफ सिकरेट्री सुनील कुमार को हस्तक्षेप करना पड़ा था। लिहाजा, नायक को पोस्टिंग के लिए कुछ दिन वेट करना होगा।

Ads

Ads

पहली महिला एमडी

2007 बैच की आईएएस शम्मी आबिदी को सरकार ने हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर से शिफ्थ करके मार्केटिंग फेडरेशन यानी मार्कफेड का एमडी बनाया है। मार्कफेड की एमडी बनने वाली शम्मी पहली महिला आईएएस होंगी। मार्कफेड में सीके खेतान, सुबोध सिंह एमडी रह चुके हैं। अनडिवाइडेड एमपी के समय सुनील कुमार भी एडिशनल एमडी का दायित्व संभाल चुके हैं। छत्तीसगढ़ में जितने निगम, बोर्ड या आयोग हैं, उनमें मार्कफेड का नम्बर सबसे उपर आता है। लगभग 15 हजार करोड़ का सलाना कारोबार करता है मार्कफेड। धान खरीदी के साथ ही किसानों को फर्टिलाइजर मुहैया कराने की जवाबदेही भी मार्कफेड की होती है। जाहिर है, भूपेश सरकार ने शम्मी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

जीरो एसपी

सूरजपुर एसपी गिरिजाशंकर जायसवाल की किस्मत एक बार फिर दगा दे गई। पिछली सरकार में वे जशपुर एसपी रहने के दौरान सस्ते में अपना विकेट गंवा बैठे थे। इस बार फिर उनके साथ वैसा ही हुआ। पुलिस अधीक्षकों के पिछले फेरबदल में गिरिजाशंकर का बिलासपुर का एसपी बनना लगभग फायनल हो गया था। मगर ऐन वक्त पर प्रशांत अग्रवाल ने इंट्री कर ली। और, गिरिजाशंकर बिलासपुर जैसे सूबे के दूसरे सबसे बड़े जिले के एसपी बनते-बनते कोरबा के उस बांगो बटालियन पहुंच गए, जिसमें कभी डायरेक्ट आईपीएस कमांडेंट नहीं रहा। गिरिजाशंकर के हटते ही 2010 बैच अब जीरो एसपी बैच हो गया है। पहिले अभिषेक मीणा और सदानंद एसपी से ऑफट्रेक हुए और अब गिरिजा का भी विकेट गिर गयज्ञं

और, ये गुड न्यूज

राजधानी पुलिस का हर हेड….हेलमेट….कैम्पेन कल रविवार को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में रजिस्टर होने जा रहा है। इसके लिए गोल्डन बुक की टीम रायपुर पहुंच चुकी है। पुलिस अब तक 16 हजार से अधिक लोगों को मु्फ्त में हेलमेट बांट चुकी है। इनमें से अगर पांच हजार लोगों ने भी हेलमेट पहन ली तो कम-से-कम इतनी जान तो सुरक्षित हो गई। कम्यूनिटी पोलिसिंग में इससे बढ़ियां काम और हो नहीं सकता। रायपुर के एसएसपी शेख आरिफ के लिए भी ये एक नायाब कीर्तिमान होगा। सोशल पोलिसिंग के लिए उनका नाम लिम्का बुक, गिनीज बुक में दर्ज हो चुका हैं। अब, हर हेड, हेलमेट से गोल्डन बुक में भी। याने तीनों वर्ल्ड रिकार्ड। ग्रेट।

अंत में दो सवाल आपसे

1. बीजेपी के किस राजा का दिल अमेरिका में अटका हुआ है?
2. लोकसभा चुनाव के नाम पर चंदा बटोरकर किस मंत्री ने पार्टी और अपने इलाके के प्रत्याशी के साथ दगा कर दिया?

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.