3.5 लाख नियोजित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका…..शिक्षकों की नहीं बढ़ेगी सैलरी…. सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका की खारिज

नई दिल्ली 27 अगस्त 2019। बिहार के करीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था। 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के समान वेतन देने का आदेश देने से इनकार किया था, जिसके बाद याचिकर्ताओं ने फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा है कि फैसले में कोई गलती नहीं है, इसलिए फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया जा सकता। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 12 पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 3.5 लाख नियोजित शिक्षक नियमित आधार पर वेतन पाने के हकदार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के समान काम के बदले समान वेतन देने के फैसले से इनकार कर दिया था। कोर्ट के इस फैसले के बाद नियोजित शिक्षकों में नाराजगी देखी गई थी और शिक्षकों ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रिव्यू पिटीशन पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पुराने फैसले में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है।

इस मामले में 31 अक्टूबर 2017 को पटना हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए नियोजित शिक्षकों के पक्ष में आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि नियोजित शिक्षकों को भी नियमित शिक्षकों के बराबर वेतन दिया जाए।इस पूरे मामले में बिहार सरकार की दलील थी कि इस आदेश से बिहार की सरकार पर अतिरिक्त 9500 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा. केंद्र सरकार ने भी इस मामले में बिहार सरकार का समर्थन किया था. कोर्ट में केंद्र सरकार ने 36 पन्नों के हलफनामे में कहा था कि इन नियोजित शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन नहीं दिया जा सकता. सरकार का तर्क था कि समान कार्य के लिए समान वेतन के कैटेगरी में ये नियोजित शिक्षक नहीं आते. यदि इन्हें इस कैटेगरी में लाया गया तो सरकार पर प्रति वर्ष करीब 36998 करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा. फिर ये भी कहा जा रहा था कि अगर इनकी मांग मानी गई तो दूसरे राज्यों से भी ऐसे मामले आएंगे.

 

 

 

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