हाईकोर्ट ने 6 पूर्व सीएम को दिया नोटिस…. पूछा- क्यों न सरकारी आवास का आवंटन रद्द कर दिया जाए……

नईदिल्ली 8 जनवरी 2019। हाईकोर्ट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों को जीवन भर के लिए मिले सरकारी आवास के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सभी को नोटिस जारी किया है। इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत तमाम पूर्व मुख्यमंत्री जिन्हें आजीवन आवासीय बंगला आवंटित हुआ है, उन्हें हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब देने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी। मुख्य न्यायाधीश एपी शाही की खण्डपीठ ने स्वतः दायर हुए जनहित याचिका को सुनते हुए राज्य सरकार एवं नोटिस हुए सभी पूर्व मुख्यमंत्री से इस बाबत भी जवाब मांगा है कि यदि उन्हें बिहार राज्य विशेष सुरक्षा कानून के तहत सुरक्षा मुहैया कराई जाए तो वे पटना में स्थित अपने निजी आवासों में क्यों नही रह सकते? राज्य सरकार की तरफ से जवाबी हलफनामा सूबे के मुख्य सचिव के जरिये दायर करने का आदेश हाई कोर्ट ने दिया है।

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राज्य के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला आवंटित किए जाने के बारे में भवन निर्माण विभाग के कार्यालय आदेश 22 मार्च 2016 पर पटना हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हई। इस बारे में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एपी शाही तथा न्यायमूर्ति अंजना मिश्रा की खंडपीठ ने पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बंगला खाली करने को लेकर दायर अपील पर सुनवाई के दौरान कार्यालय आदेश 22 मार्च 2016 पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू की है।

कोर्ट ने कहा कि किस कानून के तहत इस प्रकार का आदेश जारी किया गया। साथ ही कहा कि इन बंगलों के रखरखाव पर बगैर वित्तीय अधिसीमा के खर्च करने का प्रावधान किया गया है। कोर्ट ने कहा कि यूपी में भी इस प्रकार का आदेश जारी किया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। तेजस्वी यादव की अपील पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक हलफनामा दायर कर कोर्ट को बताया गया कि कई पूर्व मुख्यमंत्रियों  को बंगला का आवंटन किया गया है।

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