शिक्षाकर्मियों के साथ ये अन्याय क्यों ! नया आदेश हुआ जारी, सरकारी कर्मचारियों के अंशदायी पेंशन में हुआ विलंब तो दोषी अधिकारी का वेतन बंद, होगी ब्याज सहित वसूली….लेकिन शिक्षाकर्मियों की अंशदायी राशि के महीनों से गोलमाल पर सुध लेने की फुर्सत नहीं

रायपुर 22 मार्च 2018। बेहद दुर्भाग्यजनक है !….और शर्मनाक भी..! सरकार शिक्षाकर्मियों से उम्मीद तो हद से ज्यादा करती है, लेकिन शिक्षाकर्मियों की उम्मीदों को छटाक भर भी पूरा करने की दिलदारी नहीं दिखाती। आरोप तो कई बार सरकार पर भेदभाव का लगा है, विरोध भी कई दफा अनदेखी का लगा है, लेकिन इस बार जो मामला सामने आया है, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में वाकई शिक्षाकर्मियों की ना तो परेशानियों से सरकार को सरोकार है और ना ही गुरूजी के दर्द से कोई वास्ता।

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ये सवाल सरकार के उस आदेश के बाद उठा है, जिसमें सरकार ने अपने नियमित कर्मचारियों के लिए एक तल्ख आदेश सभी विभाग प्रमुखों, राजस्व मंडल, आयुक्तों और कलेक्टरों को जारी किया है। जिसमें साफ तौर पर चेतावनी है कि अगर नवीन अंशदायी पेंशन योजना के अभिदाताओं का वेतन समय पर जमा/भुगतान नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी से ब्याज की हानि की वसूली की जायेगी।

ये आदेश सरकार ने अपने नियमित कर्मचारियों के लिए निकाला है, जबकि कई महीनों से शिक्षाकर्मी अपने अंशदायी पेंशन योजना को लेकर आवज उठाते आये हैं, लेकिन आज तक शिक्षाकर्मियों की अंशदायी पेंशन योजना की राशि की गड़बड़ी पटरी पर नहीं लौटी। कई बार पंचायत विभाग ने आदेश भी जारी किया, तो जिला व जनपद पंचायत सीईओ ने आदेश को ठेंगा दिखा दिया।

आपको बता दें कि शिक्षाकर्मियों की अंशदायी पेशन योजना में कटौती का आदेश 2012 से लागू हुआ है.. राज्य शासन ने 2014 से शिक्षाकर्मियों के वेतन से कटौती शुरू की। 2012 से लागू नियम की वजह से दो साल के गैप को भरने के लिए दो-दो महीने की अंशदायी पेंशन कटौती शुरू हुई। 2014 अप्रैल से लेकर अब साल 2018 आने को है, लिहाजा करीब 70 महीने की अब तक कटौती हो चुकी है, लेकिन हकीकत में देखें तो करीब 90 फीसदी शिक्षाकर्मियों के खाते में पेंशन योजना की राशि जमा ही नहीं हुई है। 70 महीने की कटौती के बावजूद किसी के खाते में 30 महीने तो किसी के खाते में 40 महीने की राशि ही बमुश्किल जमा हुई है…जाहिर है इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार संबंधित जिला पंचायत सीईओ हैं और जनपद पंचायत सीईओ हैं। वित्त विभाग ने जो आदेश जारी किया है, उसके मुताबिक तो ये नियम शिक्षाकर्मियों पर भी लागू होना चाहिए था और संबंधित सीईओ से ब्याज की वसूली होनी थी, लेकिन शायद यहीं पर शुरू हो जाती है अनदेखी। क्योंकि वित्त विभाग ने जो अपने नियमित कर्मचारी के लिए आदेश जारी किया है, उसके मुताबिक अगर वक्त पर पेंशन योजना की राशि जमा नहीं की जाती तो ना सिर्फ सबंधित अधिकारी से ब्याज की वसूली होगी, बल्कि संबंधित अधिकारी व कर्मचारी का पेमेंट भी रोक दिया जायेगा…ऐसे कड़े आदेश शिक्षाकर्मियों के लिए क्यों लागू नहीं होते। शिक्षाकर्मियों के साथ इस अनदेखी पर शिक्षाकर्मी संघ ने भी नाराजगी जतायी है।

छत्तीसगढ़ पंचायत नगरी निकाय शिक्षक मोर्चा के प्रांतीय संचालक संजय शर्मा ने कहा कि

” हम उच्च अधिकारियों को कई बार मौखिक और लिखित रूप में अवगत करा चुके हैं हालात यह हैं कि कई जिलों में 15 से 20 माह की धनराशि शिक्षाकर्मियों के खातों में जमा ही नहीं हुई है जिससे उन्हें ब्याज का नुकसान लगातार उठाना पड़ा है शिक्षाकर्मियों के मामले में भी यही आदेश लागू होना चाहिए और आर्यन एवं संवितरण अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए “

वहीं प्रदेश मीडिया प्रभारी विवेक दुबे ने कहा कि

“अधिकांश जिलों में शिक्षाकर्मियों के खाते में हर माह पैसे जमा नहीं होते समय पर वेतन ना मिलने की शिकायत तो आम है ही वेतन मिलने की स्थिति में अंशदाई पेंशन योजना की राशि सीधे खाते से तो कटौती कर ली जाती है लेकिन हमारे खाते में हर माह धनराशि जमा करने के बजाय यह राशि अधिकारियों के खाते में पड़े रहती है शिक्षाकर्मियों के मामले में अंशदाई पेंशन योजना के मामले में बहुत बड़ी गड़बड़ी हो रही है और यह मामला करोड़ों-अरबों का है जरूरत है इस बात का उच्च अधिकारी इस ओर ध्यान दें ” 

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