बहुचर्चित विधायक खरीदी टेप कांड का खुलासा अरुण जेटली ने किया था, छत्तीसगढ़ को लॉ यूनिवर्सिटी की सौगात भी दी

रायपुर 24 अगस्त 2019। शनिवार को दोपहर पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली के निधन की खबर आग की तरह फैली….तो छत्तीसगढ़ के लोगों के जेहन में उनसे जुड़ी यादें भी ताजा हो गई। केंद्रीय कानून मंत्री रहते उन्होंने हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की सौगात दी थी। तो बिलासपुर हाईकोर्ट के उद्घाटन के अवसर पर एक नवंबर 2000 को बड़ा सारगर्भित भाषण दिया था। उन्होंने भरोसा जताया था कि छत्तीसगढ़ एक दिन देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।
छत्तीसगढ़ के लोग ये भी नहीं भूले हैं कि 2003 में बहुचर्चित विधायक खरीद कांड के खुलासे के लिए किस तरह वे पांच दिसंबर की रात यकबयक रायपुर पहुंच गए थे। सियासत के जानकार मानते हैं कि जेटली ने अगर इस मामले का भंडाफोड़ करने की व्यूहरचना नहीं बनाई होती तो 2003 में बीजेपी के सरकार नहीं बनी होती। दरअसल, विधानसभा चुनाव के पहिले जूदेव टेपकांड ने भाजपा के नेताओं का मनोबल गिरा दिया था। चुनाव में बहुत कम सीटों से बीजेपी को बहुमत तो मिल गया। लेकिन, दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में सरकार बनने से पहले विधायक के बिकाऊ होने की खबर ने आलाकमान को बेचैन कर दिया था। बीजेपी को इस संकट से जिस शख्स ने बड़ी ही कुशलता से निकाल बाहर किया….वो शख्स थे अरूण जेटली। तब के कानून मंत्री अरूण जेटली ने कुशलता से इस पूरे प्रकरण का पटाक्षेप किया।
विधायक खरीदी टेपकांड का खुलासा 5 दिसंबर 2003 की रात किया गया था, वो प्रेस कांफ्रेंस अरूण जेटली ने ही रायपुर में किया था। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी पर भारतीय जनता पार्टी के विधायकों को ख़रीदने की कोशिश का खुलासा किया था। प्रेस कांफ्रेंस में जेटली ने अजीत जोगी और भाजपा नेता वीरेंद्र पांडे के बीच कथित बातचीत का टेप भी सुनाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी सांसद बलीराम कश्यप को मुख्यमंत्री बनाने का लालच देकर बीजेपी विधायकों को तोड़ने की कोशिश की गई।
केंद्रीय क़ानून मंत्री ने उसी समय कह दिया था कि नई सरकार शपथ लेने के तुरंत बाद ही मामला सीबीआई को सौंप देगी और रमन सिंह ने ऐसा ही किया था। अरूण जेटली ने ही राज्यपाल के नाम अजीत जोगी की लिखी एक चिट्ठी भी दिखाई थी, जिसमें उन्होंने बलिराम कश्यप के नेतृत्त्व में बनने वाली पार्टी को कांग्रेस के समर्थन की बात लिखी थी। इस आरोप पर तब तिलमिलाये अजीत जोगी ने कहा था कि वह जेटली के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा ठोंकेंगे। अरूण जेटली के के खुलासे के बाद कांग्रेस में इस कदर खलबली मची की आनन-फानन में जोगी जैसे कद्दावर नेता को रातोरात पार्टी से निलंबित कर दिया गया। रमन सिंह के शपथ लेने के बाद जब उन्होंने इसे सीबीआई के सुपूर्द कर दिया था। सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी। आरोपी बरी हो गए। पांडेय अभी भाजपा में नहीं हैं। 45 लाख रुपए प्रेस कांफ्रेंस में पेश करने पर इंकम टैक्स विभाग ने उन्हें नोटिस भेज दिया था। अब वे यह साबित करने के लिए हाईकोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं कि 45 लाख उनके नहीं, बल्कि घूस के हैं।

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क्या हुआ था 5 दिसंबर की रात

2003 में विधानसभा के नतीजे आने के बाद भाजपा विधायक दल का नेता चुनने के लिए बीजेपी विधायक होटल पिकाडली में जमा थे। राष्ट्रीय महामंत्री संजय जोशी और प्रदेश प्रभारी राजनाथ सिंह भी यहीं थे। होटल के एक कमरे में भाजपा नेता वीरेंद्र पांडेय, सुनील सोनी, डॉ. कमलेश अग्रवाल आदि बैठे थे। तभी दोपहर को करीब दो बजे पांडेय के मोबाइल पर भाजपा सांसद पीआर खूंटे का फोन आया। पांडेय बताते हैं कि खूंटे ने कहा कि मैं सीएम अजीत जोगी से मिलकर आया हूं। आप सरकार बनाने लायक कुछ विधायकों को भाजपा से तोड़ लें, तो वे कांग्रेस विधायकों का समर्थन देने को तैयार हैं। 45 विधायकों के दम पर बलीराम कश्यप को सीएम बना देंगे। पांडेय ने बाद में बात करने को कहा। शाम चार बजे फिर पांडेय का फोन बजा। आठ विधायकों को खरीदने दो करोड़ का सौदा तय हुआ था।

45 लाख लिए और मीडिया के सामने रख दिया

पांडेय ने भाजपा संगठन के साथ मिलकर षड्यंत्र का भंडाफोड़ करने की योजना बनाई। घूस में मिले 45 लाख रुपए भी जाकर लिए। उसे केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली के साथ भाजपा मुख्यालय में मीडिया के सामने रखा। कार्यालय में नोटों से भरे दस-दस लाख रुपए वाले दो बैग और 25 लाख वाला बैग लेकर पांडेय खुद पहुंचे। मीडिया के सामने नोटों को बाहर निकाला गया। टेप भी सुनाया गया। छत्तीसगढ़ के साथ ही पूरे देश में हड़कंप मच गया। सनसनी फैल गई। पीसी के बाद जेटली ने पांडेय व अन्य नेताओं से कहा कि वे एंटी करप्शन ब्यूरो जाकर मामला दर्ज करवाएं। रात करीब डेढ़ बजे तक मामला दर्ज करवाया गया। दिलचस्प यह कि जोगी जिस बलीराम के लिए सारा खेल खेल रहे थे उसी बलीराम ने पांडेय के साथ मिलकर एसीबी में रिपोर्ट दर्ज करवाई।

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